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किसानों को फसल अवशेष न जलाने की दी नसीहत
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किसानों को फसल अवशेष न जलाने की दी नसीहत
भनवापुर। फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र, सोहना में किसान गोष्ठी एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज के प्राचार्य बिजेंद्र सिंह ने किया।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को जलाने से कई नुकसान होता है, इस लिए किसानों को उसे कभी नहीं जलाना चाहिए। खेत की उर्वरा शक्ति नष्ट होने के साथ ही प्रदूषण भी फैलता है। कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वालों को प्रशस्तिपत्र देते हुए उन्होंने बाकी किसानों से नवीनतम खेती के प्रति जागरूक रहने के लिए कहा। खेती में तकनीकी के इस्तेमाल पर बल दिया। प्रगतिशील किसान लाल बहादुर को काला नमक चावल की खेती के लिए, धर्म प्रकाश का मछली पालन, मनोरमा को मशरूम, तुलाराम को दुग्ध उत्पादन, राम उजागिर चौधरी को एकीकृत फसल प्रणाली के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कृषि विज्ञान केंद्र, गोंडा कृषि वैज्ञानिक डॉ. मिथिलेश पांडेय ने सब्जियों की खेती पर पर विस्तृत चर्चा करते हुए किसानों को अधिक मुनाफा कमाने के लिए प्रेरित किया।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार ने फसल अवशेष प्रबंधन के बारे लोगों को जानकारी दी। इससे पूर्व प्राचार्य ने एकता स्वयं सहायता समूह, कर्नाटक एग्रो केमिकल्स, हिंदुस्तान उर्वरक एवं केमिकल लिमिटेड एफएमसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, अजीत बीज भंडार, एग्री जंक्शन डुमरियागंज के स्टॉल का निरीक्षण कर जानकारी ली। इस दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह, डॉ. शेष नारायण सिंह, डॉ. एसके मिश्रा, डॉ. मार्केंडेय सिंह, ओमप्रकाश वर्मा, एपी राव, केशव राम शर्मा, जटाशंकर पांडेय, प्रेम शंकर चौधरी, महेंद्र गिरी, अमरजीत पाठक, चंद्रमौली त्रिपाठी, अशोक कुमार त्रिपाठी, मुकेश मिश्र, रामू, जागीर चौधरी, आलम, हरीश कुमार, अली मुर्तजा, रामदास मौर्या आदि मौजूद रहे।
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भनवापुर। फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र, सोहना में किसान गोष्ठी एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज के प्राचार्य बिजेंद्र सिंह ने किया।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को जलाने से कई नुकसान होता है, इस लिए किसानों को उसे कभी नहीं जलाना चाहिए। खेत की उर्वरा शक्ति नष्ट होने के साथ ही प्रदूषण भी फैलता है। कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वालों को प्रशस्तिपत्र देते हुए उन्होंने बाकी किसानों से नवीनतम खेती के प्रति जागरूक रहने के लिए कहा। खेती में तकनीकी के इस्तेमाल पर बल दिया। प्रगतिशील किसान लाल बहादुर को काला नमक चावल की खेती के लिए, धर्म प्रकाश का मछली पालन, मनोरमा को मशरूम, तुलाराम को दुग्ध उत्पादन, राम उजागिर चौधरी को एकीकृत फसल प्रणाली के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कृषि विज्ञान केंद्र, गोंडा कृषि वैज्ञानिक डॉ. मिथिलेश पांडेय ने सब्जियों की खेती पर पर विस्तृत चर्चा करते हुए किसानों को अधिक मुनाफा कमाने के लिए प्रेरित किया।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार ने फसल अवशेष प्रबंधन के बारे लोगों को जानकारी दी। इससे पूर्व प्राचार्य ने एकता स्वयं सहायता समूह, कर्नाटक एग्रो केमिकल्स, हिंदुस्तान उर्वरक एवं केमिकल लिमिटेड एफएमसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, अजीत बीज भंडार, एग्री जंक्शन डुमरियागंज के स्टॉल का निरीक्षण कर जानकारी ली। इस दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह, डॉ. शेष नारायण सिंह, डॉ. एसके मिश्रा, डॉ. मार्केंडेय सिंह, ओमप्रकाश वर्मा, एपी राव, केशव राम शर्मा, जटाशंकर पांडेय, प्रेम शंकर चौधरी, महेंद्र गिरी, अमरजीत पाठक, चंद्रमौली त्रिपाठी, अशोक कुमार त्रिपाठी, मुकेश मिश्र, रामू, जागीर चौधरी, आलम, हरीश कुमार, अली मुर्तजा, रामदास मौर्या आदि मौजूद रहे।
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