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Siddharthnagar News: नगर पालिका की नाकामी, मेडिकल कॉलेज पर बढ़ा मरीजों का बोझ

Wed, 07 Jun 2023 11:15 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Wed, 07 Jun 2023 11:15 PM IST
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Failure of municipality, increased burden of patients on medical college
सिद्धार्थनगर। नगर पालिका की नाकामी कारण फैली गंदगी और जलभराव से लोग तो परेशान हैं ही, मेडिकल कॉलेज पर मरीजों का भार बढ़ता जा रहा है। गर्मी और मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीज तो पहुंच ही रहे हैं। ओपीडी में आने वाले एक तिहाई लोग ऐसे हैं जो जलजनित और मच्छरों के कारण फैलने वाली बीमारियों से पीड़ित हैं। अगर रोस्टर के मुताबिक सफाई और फॉगिंग हो तो इन बीमारियों से लोगों को बचाया जा सकता है।
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मेडिकल कॉलेज में कार्यरत वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि गर्मी में हीट स्ट्रोक के साथ ही मच्छर जनित बीमारियां भी लोगों को परेशान कर रही हैं। अशुद्ध पानी के कारण होने वाले टाइफायड और पीलिया के मरीजों की संख्या भी काफी बढ़ी है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में बुधवार को ओपीडी में 949 लोगों ने पंजीयन कराया, जबकि करीब 450 मरीजों ने पुराने पर्चे पर डॉक्टरों से परामर्श और दवा ली। ओपीडी से चार मरीजों को इमरजेंसी में रेफर किया गया, जबकि 24 घंटे में इमरजेंसी में 62 मरीज भर्ती हुए। ये आंकड़े महज मेडिकल कॉलज हैं, जबकि जिले में 13 सीएचसी और 39 पीएचसी में भी मरीजों का तांता लग रहा है।
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नालियों और अंधेरे में रहते हैं मच्छर
जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि मानसून की दस्तक से पहले की गर्मी में मच्छर कम होते हैं और जून में बारिश के बाद लार्वा पनपते हैं। 40 डिग्री तापमान में अंधेरे स्थान और नालियों की नमी में मच्छर जीवित रहते हैं। डेंगू के लार्वा को साफ पानी मिलता है तो 7-8 माह बाद भी वह पनप जाता है। जब संक्रमित मच्छर किसी को काटता है तो बीमारियां होती है। पिछले वर्ष सर्वे में पता चला कि सिद्धार्थनगर में डेंगू के संवाहक मच्छर कम हैं। फिलहाल मलेरिया के तीन और जेई के 12 केस मिले हैं। मच्छरों के कारण मलेरिया, जेई, डेंगू चिकनगुनिया, फाइलेरिया का संक्रमण होता है। पिछले साल मई जून में 10 हजार जांच हुई थी, जबकि इस बार 28 हजार लोगों की जांच की गई है।
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दावा : साफ हो गई हैं 80 प्रतिशत नालियां
नगर पालिका परिषद के ईओ मुकेश कुमार चौधरी ने कहा कि मानसून की दस्तक से पहले सभी नाले-नालियों की सफाई का लक्ष्य है। शहर में 80 प्रतिशत नालियों की सफाई की जा चुकी है, जबकि फॉगिंग भी कराई जा रही है। नगर पालिका परिषद 182 सफाई कर्मी हैं, जबकि निर्धारित समय में सफाई कार्य पूरा करने के लिए 25 कर्मचारी अतिरिक्त लगाए गए हैं।एक बड़ी फागिंग मशीन है, 8 छोटी मशीन है। फागिंग की दो बड़ी मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
गांव में कम, शहर में अधिक मच्छर
मैं कभी गांव में रहता हूं तो कभी शहर में। गांव की अपेक्षा में शहर में मच्छर अधिक हैं। इसका मतलब है कि शहरी नाले-नालियों में मच्छरों को जीवन मिल रहा है। मच्छरों की वजह से नींद हराम हो रही है।

- अखलाक अहमद, आजाद नगर
सफाई कम और फाॅगिंग भी नहीं
शहरी क्षेत्र में नालियों की पर्याप्त सफाई नहीं है, वहीं, फाॅगिंग करने वाले भी कभी नहीं दिखते। गर्मी में बिजली गुल होते ही मच्छरों का हमला बढ़ जाता है। मच्छरों को मारने वाली अगरबत्ती से भी सेहत को नुकसान पहुंच रहा है। - अवेद्यनाथ, वाल्मिकी नगर
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