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जेसीबी से कराई तालाब की खुदाई, मनरेगा मद से निकाले डेढ़ लाख

Thu, 05 Nov 2020 10:51 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 05 Nov 2020 10:51 PM IST
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Excavation of pond under JCB
इसी तालाब की खुदाई के नाम पर हुआ खेल। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
जेसीबी से कराई तालाब की खुदाई, मनरेगा मद से निकाले डेढ़ लाख
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ग्राम प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया
सिद्धार्थनगर। तालाब को जेसीबी से ठीक कराकर ग्राम प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक ने एक लाख 50 हजार 150 रुपये की बंदरबांट कर ली। जांच में फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर जिलाधिकारी दीपक मीणा ने तीनों से धनराशि वसूलने का आदेश जारी किया है। ग्राम प्रधान के खिलाफ पंचायती राज एक्ट के तहत जबकि ग्राम सचिव और तकनीकी सहायक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

मामला विकास खंड इटवा के खड़सरी का है। गांव के इजहार खान सहित कई लोगों ने उपायुक्त मनरेगा के यहां 20 फरवरी 2020 को मनरेगा विकास कार्य में हेराफेरी की शिकायत की थी। उनका आरोप था कि गांव में पहले से तैयार तालाब को जेसीबी से ठीक करा कर मनरेगा मद से डेढ़ लाख रुपये की हेराफेरी गई है। डीसी मनरेगा संजय शर्मा ने इसकी जांच खंड विकास अधिकारी इटवा को सौंपी थी। बीडीओ इटवा ने सितंबर 2020 में जांच की। जांच में पाया गया कि तालाब पहले से ही निर्मित था। वर्ष 2017-18 में मनरेगा कार्य की आईडी जेनरेट कराकर इस तालाब में कुछ मजदूरों को लगाकर फोटोग्राफ लिए गए। गांव के हनीफ, रियाजुल्लाह, नूरुलहुदा, इम्तियाज, पवन कुमार, आलम खान आदि ने बताया कि तालाब की खुदाई जेसीबी से कराई गई थी। जांच में उनकी बातें सही पाई गईं। बीडीओ की ओर से डीसी मनरेगा को भेजी गई जांच रिपोर्ट में ग्राम प्रधान अब्दुल मन्नान, ग्राम पंचायत अधिकारी ओम प्रकाश और तकनीकी सहायक शिव प्रताप मिश्र को मनरेगा कार्य में हेराफेरी का दोषी पाया गया। तालाब निर्माण में खर्च 1,50,150 रुपये तीनों से बराबर बराबर वसूले जाने की संस्तुति की गई है। डीसी मनरेगा संजय शर्मा ने बताया कि खड़सरी गांव में वर्ष 2017-18 तालाब में काम नहीं कराया गया और ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव व तकनीकी सहायक ने धन की अनियमितता की। तीनों से रकम वसूली कराने के साथ ग्राम प्रधान के खिलाफ पंचायत राज एक्ट के तहत जबकि सचिव, तकनीकी सहायक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
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