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Siddharthnagar News: हर साल बाढ़ में डूबती हैं उम्मीदें, जिंदगी की जद्दोजहद में बदलते हैं ठिकाना
Wed, 03 Jun 2026 02:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 03 Jun 2026 02:00 AM IST
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सिद्धार्थनगर। बाढ़ की त्रासदी हर साल सैकड़ों गांवों के हजारों लोगों के सपनों को बहा ले जाती है। त्रासदी के बाद तिनका-तिनका जोड़कर जबतक पटरी पर जिंदगी लौटती है, तब तक फिर उसी बाढ़ का खतरा सताने लगता है। हर साल होने वाली इस मुसीबत से बचने के लिए लोगों ने अपने जीने का तरीका ही बदल लिया है।
बाढ़ के पानी से जलमग्न होने वाले नदी किनारे बसे गांवों के लोगों ने जहां ऊंचे स्थानों पर ठिकाना बना लिया है, वहीं रास्ता डूबा रहने के कारण विकल्प के तौर पर नाव की व्यवस्था भी कर ली है। हर साल बाढ़ आने के बाद हाेने वाले जलभराव से धान की फसल नष्ट हो जाती है। इससे उन्हें खाद्यान्न संकट से भी जूझना पड़ता है। प्रत्येक वर्ष बाढ़ की विभिषिका झेल रहे उसका क्षेत्र के हथिवड़ताल के तिवारीडीह टोला निवासी शैलेंद्र नाथ त्रिपाठी, साधुसरन और नरोत्तम आदि ने सुरक्षा के लिए ऊंचे स्थानों पर घर बनाया है। वहीं, गांव के कुछ लोगों ने हर वर्ष बाढ़ से पानी से बचने के लिए बांध किनारे दो मंजिला मकान बनाया है, जिसमें वह ग्राउंड फ्लोर का उपयोग नहीं करते। छत पर ही अपना ठिकाना बनाकर जीवन यापन करते हैं।
हर वर्ष मचने वाली तबाही से बचाव और सुरक्षा के लिए प्रशासन और सिंचाई विभाग की ओर से इंतजाम किए जाते हैं। बाढ़ पीड़ित भी खुद के बचाव और सुरक्षा के लिए जद्दोजहद करते नजर आते हैं। हर वर्ष बाढ़ के पानी से जलमग्न होने वाले गांव के लोगों ने सबसे पहले ऊंचे स्थानों पर ठिकाना बनाया है।
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बाढ़ के पानी से जलमग्न होने वाले नदी किनारे बसे गांवों के लोगों ने जहां ऊंचे स्थानों पर ठिकाना बना लिया है, वहीं रास्ता डूबा रहने के कारण विकल्प के तौर पर नाव की व्यवस्था भी कर ली है। हर साल बाढ़ आने के बाद हाेने वाले जलभराव से धान की फसल नष्ट हो जाती है। इससे उन्हें खाद्यान्न संकट से भी जूझना पड़ता है। प्रत्येक वर्ष बाढ़ की विभिषिका झेल रहे उसका क्षेत्र के हथिवड़ताल के तिवारीडीह टोला निवासी शैलेंद्र नाथ त्रिपाठी, साधुसरन और नरोत्तम आदि ने सुरक्षा के लिए ऊंचे स्थानों पर घर बनाया है। वहीं, गांव के कुछ लोगों ने हर वर्ष बाढ़ से पानी से बचने के लिए बांध किनारे दो मंजिला मकान बनाया है, जिसमें वह ग्राउंड फ्लोर का उपयोग नहीं करते। छत पर ही अपना ठिकाना बनाकर जीवन यापन करते हैं।
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हर वर्ष मचने वाली तबाही से बचाव और सुरक्षा के लिए प्रशासन और सिंचाई विभाग की ओर से इंतजाम किए जाते हैं। बाढ़ पीड़ित भी खुद के बचाव और सुरक्षा के लिए जद्दोजहद करते नजर आते हैं। हर वर्ष बाढ़ के पानी से जलमग्न होने वाले गांव के लोगों ने सबसे पहले ऊंचे स्थानों पर ठिकाना बनाया है।
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