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Siddharthnagar News: सड़क के किनारे के पोखरों की बेशकीमती भूमि पर कब्जा

Sun, 22 Oct 2023 11:00 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 22 Oct 2023 11:00 PM IST
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encroachment on ponds
फोटो-
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अतिक्रमण से संकरी हो गई शहर के 35 पोखरों की भूमि
शिकायत के बाद भी नहीं हुई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर में अगर कहीं पर सड़क किनारे कोई पोखरा है तो तय है कि उस पर कब्जेदारों की नजर लग गई है। इससे इन पोखरों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। शहर के थरौली स्थित बेलहिया मंदिर के किनारे पोखरे की बेशकीमती भूमि कब्जा हो चुकी है। इससे इसका अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है। मौके पर सड़क के किनारे की तरफ से तेजी से मिट्टी और कूड़ा डालकर पोखरे को पाटने का कार्य किया जा रहा है।
शहर के भीमापार, थरौली, सिविल लाइंस, गोबरहवा, आजादनगर, बेलसड़, पकड़ी, बसडिलिया, मधुकरपुर, मुड़िला व पुरानी नौगढ़ समेत विभिन्न मोहल्लों में 40 से अधिक पोखरे स्थित हैं। इनमें 35 पोखरों पर आंशिक अथवा अधिक भूमि पर कब्जा हो चुका है। कुछ पोखरों का अस्तित्व ही समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है। अब इनमें सड़क के किनारे के पोखरों पर नजर दौड़ाएं तो उनकी बेशकीमती भूमि पर भूमाफिया की नजर लग गई है।
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शहर के नौगढ़-गोरखपुर मुख्य मार्ग पर थरौली में स्थित बेलहिया मंदिर के सटे दक्षिण में स्थित पोखरा गाटा संख्या 410 का रकबा 0.251 हेक्टेयर है। इस दो बीघा से अधिक भूमि की सड़क के किनारे चौड़ाई सौ फीट से अधिक है। वर्तमान में इस पोखरे की संपूर्ण भूमि कब्जे की जद में आ चुकी है। इस मामले में स्थानीय राजस्वकर्मियों ने चार लोगों के कब्जे की रिपोर्ट भी भेजी है। इसके बाद भी प्रशासन की तरफ से कार्रवाई में देरी हो रही है।
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अधिवक्ता प्रशस्ति उपाध्याय कहते हैं कि सरकारी भूमि से कब्जा हटाया जाए तो कई ऐसे विकास के प्रोजेक्ट हैं जिन पर कार्य करने में प्रशासन को सहूलियत मिल जाएगी।

घनी आबादी के पोखरे भी अतिक्रमण की जद में
शहर की घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित कई पोखरे अतिक्रमण की जद में है। हालात ये हैं कि इनमें कई पोखरों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। ये वर्तमान में सिर्फ राजस्व अभिलेख में ही मौजूद रह गए हैं। इनमें सिविल लाइंस, आजादनगर, सिसहनिया, बेलसड़ व पुरानी नौगढ़ के पोखरे शामिल हैं। वहीं, जहां आबादी नहीं है उन पोखरों में नींव डालकर कब्जा करने का कार्य भूमाफिया कर रहे हैं।

सफेदपोशों की शह पर कब्जे का खेल
पोखरों समेत सरकारी भूमियों पर कब्जे के खेल में स्थानीय कर्मियों के साथ ही कुछ राजनीतिकों का भी हाथ है। इनकी शह पर किए जा रहे कब्जे के विरोध में कार्रवाई नहीं हो पा रही है। यहां तक कि जब भी किसी पोखरा अथवा सरकारी भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू होती है तो ये सफेदपोश सक्रिय हो जाते हैं। उनकी पैरवी पर अतिक्रमण विरोधी अभियान बंद हो जाता है।
कोट
शहर में तालाबों में हुए अतिक्रमण को चिह्नित किया जाएगा और सीमांकन कराकर वहां से अतिक्रमण हटवाया जाएगा। तालाबों पर सुंदरीकरण के कार्य भी होंगे।
-पवन अग्रवाल, जिलाधिकारी
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