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आठ माह बीते, किसानों को नहीं मिली बाढ़ राहत की फूटी कौड़ी

Sat, 21 Apr 2018 10:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Sat, 21 Apr 2018 10:41 PM IST
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Eight months passed, farmers did not get flood relief
किसान सफात। - फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। बाढ़ खत्म हुए आठ माह बीत चुके हैं। रबी की कटाई के बाद खरीफ की नई फसल की तैयारी शुरू होने लगी है। उन किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, जिनकी फसल बाढ़ में चौपट हो गई थी। कर्ज लेकर खेती करने वाले यह किसान मारे-मारे फिर रहे हैं। एक तो उन पर ब्याज का दवाब बढ़ रहा है और दूसरी ओर नए फसल की खेती भी सिर पर आ गई है। खेती ही जिनकी आजीविका का सहारा है, उन्हें कुछ नहीं सूझ रहा। मौसम की मार से बेहाल किसान अब व्यवस्था की भी मार से कराह रहे हैं।  
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13 अगस्त 2017 को जिले में सैलाब आया था। छह सौ गांवों के एक लाख से अधिक परिवार इसकी जद में आए। घर-मकान सहित खेत-खलिहान सब डेढ़ माह तक पानी में डूबे रहे। किसानों की खरीफ की फसल ही चौपट हो गई थी। बाढ़ का पानी उतरने के बाद हुए सर्वे में 54 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ की फसल बर्बाद होने की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। इसके बाद से ही किसान मुआवजा मिलने की आस लगाए हुए थे।
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योगी सरकार की गंभीरता के बाद उन्हें उम्मीद थी कि मुआवजे की रकम जल्द मिलेगी। इससे वह अपनी क्षति की भरपाई करेंगे। बैंक व साहूकार का कर्ज लौटाकर नई खेती की तैयारी करेंगे। इस आस में ही आठ माह बीत गए हैं, लेकिन किसानों को बाढ़ की क्षति के मुआवजे की फूटी कौड़ी नसीब नहीं हुई है। गौर फरमाने वाली बात है कि अगले माह से फिर से खरीफ के खेती की तैयारी शुरू जाएगी। ऐसे में किसान यह सोचकर चिंतित है कि पिछला बकाया न देने के कारण वह बैंक व साहूकार के पास किस आधार पर कर्ज मांगने जाएंगे। खेती चौपट होने के बाद उनके तमाम अन्य जरूरी काम भी लंबित पड़े हैं। स्थिति बदहाल होती जा रही है। किसानों का कहना है कि मुआवजा वितरण में इतनी देरी तो पूर्ववर्ती सरकारों में भी होती थी, फिर योगी सरकार में बदला क्या है। समय से क्षतिपूर्ति न मिलना चिंताजनक है। 
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