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आठ माह से लोकार्पण का इंतजार
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 16 Feb 2017 11:02 PM IST
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महिला अस्पताल में नहीं सर्जन, हो रही परेशानी
- फोटो : अमर उजाला
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बर्डपुर। मातृ व शिशु कल्याण योजना के तहत बर्डपुर में बना तीस बेड का अस्पताल आज तक शुरू नहीं हो सका जबकि भवन बन कर आठ माह पहले तैयार है। बर्डपुर के नागरिकों की लगातार मांग को देखते हुए विभाग ने यहां तीस बेड वाले अस्पताल का निर्माण कराया है पर अब तक इस अस्पताल को प्रारंभ करने की जरूरत नहीं समझी गई। बर्डपुर ब्लॉक के लोगों को समुचित स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए आठ महीने पहले तीस बेड वाले सरकारी अस्पताल का निर्माण कराया गया। अस्पताल के निर्माण को पूरा हुए काफी समय गुजर चुका है पर इसे प्रारंभ करवाने को लेकर अब तक कोई कवायद नहीं शुरू हुई।
निर्माण समय से पूरा होने के बाद से लोगों को यह उम्मीद भी कि उन्हें शीघ्र सुविधा का लाभ मिलेगा। विभाग की उदासीनता ने इसपर विराम लगा दिया। दौलतपुर की रहने वाली सोनम चौधरी का कहना है कि महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने के लिए जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। इलाज के लिए अस्पताल भवन बनकर तैयार है पर विभागीय लापरवाही के कारण इसे शुरू नहीं किया जा रहा। परसा बेलहरी की सिंधुमती कहती हैं कि प्रसव केंद्रों की बेहतर व्यवस्था के अभाव मेें महिलाओं को परेशान होना पड़ता है। अस्पताल बनने से यह उम्मीद थी कि जल्द ही सुविधा मिलेगी पर अभी भी उम्मीद अधूरी है।
कंचन वर्मा का कहना है कि अस्पताल निर्माण कराने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी गई। एक कमरे के भवन में यहां का अस्पताल संचालित होता है जिससे मरीजों को असुविधा झेलनी पड़ती है। देवेंद्र कुमार का कहना है कि लोगों की दिक्कत को देखते हुए अस्पताल को शीघ्र शुरू किया जाए अन्यथा नागरिक आंदोलन को बाध्य होंगे। संबंध में बर्डपुर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सक डॉ. प्रशांत अस्थाना का कहना है कि कार्यदाई संस्था निर्माण के बाद भवन को हैंडओवर नहीं कर रही है, जिससे समस्या बनी हुई है। मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
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निर्माण समय से पूरा होने के बाद से लोगों को यह उम्मीद भी कि उन्हें शीघ्र सुविधा का लाभ मिलेगा। विभाग की उदासीनता ने इसपर विराम लगा दिया। दौलतपुर की रहने वाली सोनम चौधरी का कहना है कि महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने के लिए जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। इलाज के लिए अस्पताल भवन बनकर तैयार है पर विभागीय लापरवाही के कारण इसे शुरू नहीं किया जा रहा। परसा बेलहरी की सिंधुमती कहती हैं कि प्रसव केंद्रों की बेहतर व्यवस्था के अभाव मेें महिलाओं को परेशान होना पड़ता है। अस्पताल बनने से यह उम्मीद थी कि जल्द ही सुविधा मिलेगी पर अभी भी उम्मीद अधूरी है।
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कंचन वर्मा का कहना है कि अस्पताल निर्माण कराने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी गई। एक कमरे के भवन में यहां का अस्पताल संचालित होता है जिससे मरीजों को असुविधा झेलनी पड़ती है। देवेंद्र कुमार का कहना है कि लोगों की दिक्कत को देखते हुए अस्पताल को शीघ्र शुरू किया जाए अन्यथा नागरिक आंदोलन को बाध्य होंगे। संबंध में बर्डपुर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सक डॉ. प्रशांत अस्थाना का कहना है कि कार्यदाई संस्था निर्माण के बाद भवन को हैंडओवर नहीं कर रही है, जिससे समस्या बनी हुई है। मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
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