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सामाजिक बराबरी का सबसे बड़ा पर्व है ईद उल फितर

Thu, 13 May 2021 10:25 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 13 May 2021 10:25 PM IST
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Eid will be considered today, the sweetness in relationships will be felt by the servants
आज मनेगी ईद, रिश्तों में मिठास घोलेगी सेवइयों की खुश्बू
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कोरोना प्रोटोकॉल के चलते आज ईदगाह के बजाय घरों पर अदा होगी नमाज
जुमा को पढ़ी जाएगी ईद की नमाज, लोग अपने परिवार में मनाएंगे खुशियां
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर/डुमरियागंज। रहमत और बरकत के माह-ए-रमजान की इबादत के बाद शुक्रवार को ईद की खुशियां मनाई जाएंगी। कोरोना प्रोटोकाल के कारण ईदगाह में ईद की नमाज चंद लोग ही पढ़ेंगे। महामारी से बचने के लिए लोग घरों में ही नमाज अदा करेंगे। इस बार बाजार पर कोरोना का साया रहा और खरीदारी नहीं हो सकी। पकवान कम बनेंगे और परिवार में ही ईद की खुशियां मनाई जाएंगी। मीठी सेवइयों की खुश्बू से रिश्तों में मिठास घुलेगी। कोरोना संक्रमण से जागरूकता के कारण लोग ईद की पार्टियों से परहेज करेंगे। सोशल मीडिया के माध्यम से बात और पैगाम भेजकर लोग खुशियों का इजहार करेंगे। लगातार दूसरी बार कोरोना ने ईद की रौनक पर पानी फेर दिया है लेकिन इबादत और खुशियों में कोई कमी नहीं आई। एक सोसाइटी के प्रबंधक वकार मोइज खान ने मुस्लिम समाज के लोग घर में नमाज अदा करें। ईद का मुबारकबाद देने के लिए घरों से बाहर न निकलें। मुश्किल दौर में एक-दूसरे की मदद करें और जागरूक होकर कोरोना को मात दें।
ईद में निभाएंगे सामाजिक दूरी का फर्ज
हाशिम रिजवी
डुमरियागंज। सामाजिक बराबरी के पर्व में लोग कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सामाजिक दूरी का फर्ज निभाएंगे। ‘एक ही सफ में खड़े हो गये महमूद व-आयाज, ना कोई बंदा रहा और कोई बंदा नवाज।’ सामाजिक बराबरी का पैगाम देने वाले दुनिया के इस बेमिसाल पर्व का अर्थ ऊपर लिखे शेर से काफी कुछ साफ हो जाता है।
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दरअसल ईद का त्योहार रमजान की इबादत का शानदार तोहफा है। 30 दिन के रोजे यानी रमजान के बाद रोजेदार ईदगाह में एकत्र होकर एक साथ नमाज अदा करने के बाद खुशियां भी मनाते हैं। इस त्योहार का असल मकसद पीड़ित और दु:खी इंसानों की मदद के अलावा उन्हें सामाजिक बराबरी प्रदान करना भी है। नमाज से पहले हर सक्षम मुसलमान अपनी दौलत का ढाई प्रतिशत दान करने के बाद ही नमाज अदा करता है। ढाई प्रतिशत की जकात को गरीबों में वितरित किया जाता है। फितरा और जकात की अवधारणा के पीछे उन गरीबों की मदद करने की मंशा है, जो खुशहाली के रास्ते पर किसी वजह से पिछड़ गए हैं ऐसे वंचितों की मदद करने के लिए खुदा ने यह व्यवस्था की है। शुक्रवार को ईद उल फितर के पर्व पर घरों से फितरा और जकात निकलेगा।
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