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Siddharthnagar News: भीड़ का हिस्सा न बनें, केवल अपने लक्ष्य को साधें और आगे बढ़ें
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बर्डपुर के बुद्ध विधा पीठ इंटर कॉलेज में आयोजित अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम में छात्राओं को
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- अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बुद्ध विद्यापीठ इंटर कॉलेज में आयोजित हुआ अपराजिता कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
बर्डपुर। भीड़ का हिस्सा न बनें, केवल अपने लक्ष्य को साधें और आगे बढ़ें, सफलता जरूर मिलेगी। यह बातें सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. दीपक मिश्र ने सोमवार को बुद्ध विद्यापीठ इंटर कॉलेज में कही। वह अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे अपराजिता अभियान के तहत आयोजित व्याख्यान में छात्र-छात्राओं से रूबरू हुए। साथ ही उन्होंने करियर संबंधी कई महत्वपूर्ण टिप्स दिए।
मुख्य अतिथि प्रो. दीपक मिश्र ने छात्रों को यह मशविरा भी दिया कि विचारों को साझा करें, लेकिन किसी विचारधारा के पीछे न चलें। छात्र जीवन में जो वक्त मिलता है, वह सबसे बहुमूल्य होता है। पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित करें। हमेशा अपडेट रहें। अपनी योग्यता एवं क्षमता का आकलन खुद करें और उसी के अनुसार लक्ष्य निर्धारित करें। आज के समय मेें योग भी रोजगार का बड़ा साधन हो गया है। कहने का मतलब यह है कि जो भीड़ कुछ गिनीचुनी सरकारी नौकरी के पीछे भाग रही है, उस का हिस्सा न बनें। रोजगार के रोज नए रूप सामने आ रहे हैं। विज्ञान की कई नई शाखाएं खुली हैं। साहित्य, संगीत और कला के क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं। जरूरत है कि खुद को अपनी क्षमता के अनुसार ढालें। देश में बड़ी आबादी ऐसे युवाओं की है जो अकुशल हैं। सफलता के लिए शिक्षित, दीक्षित, परीक्षित और प्रशिक्षित होना जरूरी है। यही आपको कुशल बनाएगा और कॅरियर की ऊंचाई तक पहुंचने में मदद करेगा। अब नॉलेज भी एक प्रकार का उद्योग हो गया है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों और अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। शिक्षा रोजगारपरक तभी होगी, जब इसका आधारभूत ढांचा मजबूत होगा। इस पर मंथन करना होगा कि हम जो पढ़ा रहे हैं और छात्र-छात्राओं को जो संसाधन उपलब्ध कर रहे हैं, वे किसी काम के हैं या नहीं।
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कॉलेज के प्रधानाचार्य मनोज कुमार मिश्रा ने अमर उजाला की इस पहल को सराहा और छात्र-छात्राओं से कहा कि लड़किया पहले से ही अपराजिता हैं, उनको अपने शक्ति का अहसास करवा जा रहा है की कही पर भी अपनी बात और कार्य को साहस और धैर्य पूर्वक करें।
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. यशवंत कुमार ने किया। अंत में मुख्य वक्ता ने सभी को अपराजिता अभियान के तहत नारी सशक्तिकरण की शपथ दिलाई।
इस दौरान शिवकरन, राम बचन राम, विरेंद्र, राजेश कुमार, रविंद्र कुमार, विजय बहादुर वर्मा आदि मौजूद रहे।
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शिक्षा से ही मिलेगा मुकाम
शिक्षा जीवन के सभी अंधियारों को दूर करती है। आधुनिक युग में शिक्षित होना आवश्यक है। उच्च शिक्षा ही महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा दिला सकती है।
-सोनी गुप्ता, छात्र
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भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या बेहद कम है। देश की आधी आबादी होने के बावजूद भी केवल 27 प्रतिशत महिलाएं ही कामकाजी हैं। सोमालिया जैसे गरीब देश में भी कामकाजी महिलाओं की संख्या भारत से अधिक हैं।
-सुष्मिता
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अमर उजाला की ओर से चलाए जा रहे अपराजिता कार्यक्रम से छात्राओं का मनोबल बढ़ा है। महिला सशक्तीकरण के लिए सरकार और सामाजिक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों के साथ-साथ लोगों को भी अपनी सोच बदलनी होगी भी नारी अपराजिता बनेगी।
-सपना कसौंधन
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प्राचीनकाल में नारी पूजनीय थी और कई ऐसे उदाहरण है कि महिलाएं इतिहास में अमर हो गईं। मध्यकाल में महिलाओं की दशा काफी सोचनीय हो गई थी, लेकिन अब इसमें काफी सुधार आया है।
-कुसुम कसौंधन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बर्डपुर। भीड़ का हिस्सा न बनें, केवल अपने लक्ष्य को साधें और आगे बढ़ें, सफलता जरूर मिलेगी। यह बातें सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. दीपक मिश्र ने सोमवार को बुद्ध विद्यापीठ इंटर कॉलेज में कही। वह अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे अपराजिता अभियान के तहत आयोजित व्याख्यान में छात्र-छात्राओं से रूबरू हुए। साथ ही उन्होंने करियर संबंधी कई महत्वपूर्ण टिप्स दिए।
मुख्य अतिथि प्रो. दीपक मिश्र ने छात्रों को यह मशविरा भी दिया कि विचारों को साझा करें, लेकिन किसी विचारधारा के पीछे न चलें। छात्र जीवन में जो वक्त मिलता है, वह सबसे बहुमूल्य होता है। पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित करें। हमेशा अपडेट रहें। अपनी योग्यता एवं क्षमता का आकलन खुद करें और उसी के अनुसार लक्ष्य निर्धारित करें। आज के समय मेें योग भी रोजगार का बड़ा साधन हो गया है। कहने का मतलब यह है कि जो भीड़ कुछ गिनीचुनी सरकारी नौकरी के पीछे भाग रही है, उस का हिस्सा न बनें। रोजगार के रोज नए रूप सामने आ रहे हैं। विज्ञान की कई नई शाखाएं खुली हैं। साहित्य, संगीत और कला के क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं। जरूरत है कि खुद को अपनी क्षमता के अनुसार ढालें। देश में बड़ी आबादी ऐसे युवाओं की है जो अकुशल हैं। सफलता के लिए शिक्षित, दीक्षित, परीक्षित और प्रशिक्षित होना जरूरी है। यही आपको कुशल बनाएगा और कॅरियर की ऊंचाई तक पहुंचने में मदद करेगा। अब नॉलेज भी एक प्रकार का उद्योग हो गया है।
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उन्होंने कहा कि शिक्षकों और अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। शिक्षा रोजगारपरक तभी होगी, जब इसका आधारभूत ढांचा मजबूत होगा। इस पर मंथन करना होगा कि हम जो पढ़ा रहे हैं और छात्र-छात्राओं को जो संसाधन उपलब्ध कर रहे हैं, वे किसी काम के हैं या नहीं।
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कॉलेज के प्रधानाचार्य मनोज कुमार मिश्रा ने अमर उजाला की इस पहल को सराहा और छात्र-छात्राओं से कहा कि लड़किया पहले से ही अपराजिता हैं, उनको अपने शक्ति का अहसास करवा जा रहा है की कही पर भी अपनी बात और कार्य को साहस और धैर्य पूर्वक करें।
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. यशवंत कुमार ने किया। अंत में मुख्य वक्ता ने सभी को अपराजिता अभियान के तहत नारी सशक्तिकरण की शपथ दिलाई।
इस दौरान शिवकरन, राम बचन राम, विरेंद्र, राजेश कुमार, रविंद्र कुमार, विजय बहादुर वर्मा आदि मौजूद रहे।
शिक्षा से ही मिलेगा मुकाम
शिक्षा जीवन के सभी अंधियारों को दूर करती है। आधुनिक युग में शिक्षित होना आवश्यक है। उच्च शिक्षा ही महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा दिला सकती है।
-सोनी गुप्ता, छात्र
भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या बेहद कम है। देश की आधी आबादी होने के बावजूद भी केवल 27 प्रतिशत महिलाएं ही कामकाजी हैं। सोमालिया जैसे गरीब देश में भी कामकाजी महिलाओं की संख्या भारत से अधिक हैं।
-सुष्मिता
अमर उजाला की ओर से चलाए जा रहे अपराजिता कार्यक्रम से छात्राओं का मनोबल बढ़ा है। महिला सशक्तीकरण के लिए सरकार और सामाजिक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों के साथ-साथ लोगों को भी अपनी सोच बदलनी होगी भी नारी अपराजिता बनेगी।
-सपना कसौंधन
प्राचीनकाल में नारी पूजनीय थी और कई ऐसे उदाहरण है कि महिलाएं इतिहास में अमर हो गईं। मध्यकाल में महिलाओं की दशा काफी सोचनीय हो गई थी, लेकिन अब इसमें काफी सुधार आया है।
-कुसुम कसौंधन