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Siddharthnagar News: घर-घर पहुंची शुगर-बीपी मशीन, सेहत की निगरानी का बढ़ा चलन

Thu, 09 Jul 2026 03:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 09 Jul 2026 03:01 AM IST
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Diabetes and blood pressure monitoring devices have reached households; the trend of health monitoring is on the rise.
अब घर ही बना छोटी लैब, खुद कर रहे शुगर-बीपी की जांच, मेडिकल स्टोरों पर ग्लूकोमीटर और बीपी मशीनों की बिक्री बढ़ी
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विशेषज्ञ बोले, निगरानी के लिए ठीक, इलाज का विकल्प नहीं
सिद्धार्थनगर। बदलती जीवनशैली, बढ़ते मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मामलों तथा स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता ने घर-घर में शुगर और बीपी जांच मशीनों की पहुंच बढ़ा दी है। पहले ये उपकरण केवल अस्पतालों और क्लीनिकों तक सीमित थे लेकिन अब सामान्य परिवार भी इन्हें खरीद रहे हैं। खास बात यह है कि सिर्फ मधुमेह या बीपी के मरीज ही नहीं बल्कि पूरी तरह स्वस्थ लोग भी नियमित निगरानी के लिए ग्लूकोमीटर और डिजिटल ब्लड प्रेशर मॉनिटर अपने घर में रख रहे हैं।
जिले के मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इन उपकरणों की मांग लगातार बढ़ी है। पहले महीने में इक्का-दुक्का मशीनें बिकती थीं, अब नियमित बिक्री हो रही है। बुजुर्गों के साथ-साथ युवा भी इन्हें खरीद रहे हैं ताकि समय-समय पर अपनी सेहत पर नजर रख सकें।
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मेडिकल व्यवसायी शिवम सिंह बताते हैं कि पहले लोग केवल डॉक्टर की सलाह पर ग्लूकोमीटर या बीपी मशीन खरीदते थे लेकिन अब लोग स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं। कई परिवारों में दोनों उपकरण स्थायी रूप से मौजूद हैं। इसी तरह मेडिकल व्यवसायी श्याम चतुर्वेदी का कहना है कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ मशीनों की बिक्री में भी लगातार इजाफा हुआ है। डिजिटल मशीनों के इस्तेमाल ने जांच को आसान बना दिया है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि घर पर नियमित जांच से बीमारी का समय रहते पता चल सकता है और इलाज की निगरानी भी बेहतर होती है। हालांकि यह सुविधा तभी तक लाभकारी है, जब तक इसका उपयोग सही तरीके से किया जाए। कई लोग एक-दो बार रीडिंग अधिक या कम आने पर स्वयं दवा बदल देते हैं या घबरा जाते हैं जबकि ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है।

फिजिशियन डॉ. आशुतोष कुमार शुक्ल कहते हैं कि ग्लूकोमीटर और डिजिटल बीपी मशीनें निगरानी के अच्छे साधन हैं लेकिन इनकी रीडिंग को अंतिम सत्य मानकर इलाज नहीं करना चाहिए। यदि लगातार असामान्य रीडिंग मिले तो चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। समय-समय पर मशीन की शुद्धता की जांच और सही तरीके से उपयोग भी आवश्यक है।
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क्या हैं फायदे
- घर बैठे कुछ ही मिनटों में जांच संभव।
- मधुमेह और बीपी मरीज नियमित निगरानी कर सकते हैं।
- अचानक तबीयत बिगड़ने पर शुरुआती स्थिति का पता चलता है।
- डॉक्टर को इलाज का रिकॉर्ड दिखाने में आसानी होती है।
- बुजुर्ग और दूरदराज के मरीजों को बार-बार अस्पताल नहीं जाना पड़ता।
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सिर्फ मशीन के भरोसे न रहें
- एक बार की रीडिंग देखकर दवा न बढ़ाएं या बंद करें।
- गलत तरीके से जांच करने पर परिणाम भ्रामक हो सकते हैं।
- पुरानी या खराब स्ट्रिप और बिना कैलिब्रेशन वाली मशीन गलत रीडिंग दे सकती है।
- बार-बार जांच करने से कई लोग अनावश्यक तनाव का शिकार हो जाते हैं।
- लगातार असामान्य रीडिंग मिलने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
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विशेषज्ञों की सलाह
- सुबह खाली पेट और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही शुगर जांच करें।
- बीपी जांच से पहले कम से कम पांच मिनट आराम करें।
- लगातार कई दिनों तक रीडिंग का रिकॉर्ड बनाकर रखें।
- साल में एक बार लैब जांच से मशीन की रीडिंग का मिलान करा लें।
- बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा में कोई बदलाव न करें।
- संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद को प्राथमिकता दें।
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