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बढ़ेगी कालानमक की महक, किसान ऐसे करें रोपाई
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रोपाई में देरी से बढ़ेगा काला नमक में महक
15 जून के बाद डालें नर्सरी और जुलाई दूसरे सप्ताह के बाद शुरू करें रोपाई
मौसम अनुकूल नहीं होने के कारण उड़ जाती है महक
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। काला महक धान की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। धान की खुशबू बरकरार रहे, इसके लिए किसान धान की नर्सरी को 15 जून के बाद डाले। रोपाई जहां तक हो सके जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में करें। इससे धान की बाली अनुकूल समय पर निकलेगी तो उसकी खुशबू बरकरार रहेगी। यह कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है। इस अनुसार अगर फसल लगाते हैं तो किसानों को फायदा मिलेगा।
काला नमक की खुशबू आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में अपनी पहचान बना चुका है। इसलिए प्रदेश सरकार ने इसे एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल करके पहचान और ब्रांड बनाने की कवायद शुरू की है। मगर मौसम परिवर्तन से धान की खुशबू फीका पड़ने लगा। महक बनी रहे इसके लिए किसान तमाम उपाय भी कर रहे हैं, लेकिन पहले जैसी खुशबू नहीं आ रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने इसके पीछे मौसम परिवर्तन को जिम्मेदार बताया है। उनका कहना है कि काला नमक की बाली निकलते समय ठंड की जरूरत होती है। जबकि पिछले कई वर्षों से मौसम में परिवर्तन से ठंड लेट से शुरू होती है। ऐसे में तब तक धान की बाली निकल जाती है। मौसम अनुकूल नहीं होने और धूप व गर्मी पड़ने से खुशबू धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। इसलिए धान की खुशबू बरकरार रहे और उत्पादन अच्छा हो। किसानों को देर से रोपाई करनी होगी। इससे महक बनी रहेगी और बीमारियों का प्रकोप भी कम रहेगा। किसानों को लाभ मिलेगा और चावल भी स्वादिष्ट होगा।
क्यों देर में रोपाई करने की सलाह दे रहे वैज्ञानिक
दरअसल मौसम में परिवर्तन से बारिश का कोई समय नहीं रह गया है। साथ ही ठंड कब पड़ेगी इसका भी अब समय सही नहीं हैं। वहीं पहले किसान जड़हन और ओसहन दो प्रकार के धान लगाते थे। ओसहन अर्थात अगेती धान, जबकि जड़हन में बड़े डंठल के अधिक पानी वाले खेत में धान की रोपाई करते थे। इन दोनों की रोपाई में 15 दिन का अंतराल हो जाता था। काला नमक भी जड़हन की प्रजाति में गिनी जाती है। इसलिए इसकी रोपाई देरी से होनी चाहिए। मगर किसान पिछले कई वर्षों से दोनों एक साथ रोपाई करते हैं। ऐसे में किसान मौसम की मार खा जाता है। फसल को अनुकूल समय नहीं मिलता। इसलिए वैज्ञानिक देरी से रोपाई की सलाह दे रहे हैं।
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जिले में इतने हेक्टेयर भूमि पर होती है खेती
मौजूदा समय में 10 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर काला नमक धान की खेती होती है।
वैज्ञानिक की सलाह
काला नमक धान की खुशबू तब बनी रहती है, जब ठंड में उसकी बाली निकलती है। पहले हथिया नक्षत्र में बारिश के बाद ठंड शुरू होती थी। इसी में इस धान में बाली निकलती थी। इससे उसकी महक बनी रहती थी। मगर इधर कई वर्षों से किसान आगे रोपाई कर दे रहे हैं। गर्मी और अनुकूल मौसम नहीं मिलने से महक कम हो जा रही है। महक बनी रहे इसके लिए किसान 15 जून के बाद धान की नर्सरी डाले और जुलाई के दूसरे सप्ताह में रोपाई कर दें। इस प्रयोग से धान में महक और बढ़ जाएगी।
- डॉ. एसके मिश्र कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र सोहना
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15 जून के बाद डालें नर्सरी और जुलाई दूसरे सप्ताह के बाद शुरू करें रोपाई
मौसम अनुकूल नहीं होने के कारण उड़ जाती है महक
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। काला महक धान की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। धान की खुशबू बरकरार रहे, इसके लिए किसान धान की नर्सरी को 15 जून के बाद डाले। रोपाई जहां तक हो सके जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में करें। इससे धान की बाली अनुकूल समय पर निकलेगी तो उसकी खुशबू बरकरार रहेगी। यह कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है। इस अनुसार अगर फसल लगाते हैं तो किसानों को फायदा मिलेगा।
काला नमक की खुशबू आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में अपनी पहचान बना चुका है। इसलिए प्रदेश सरकार ने इसे एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल करके पहचान और ब्रांड बनाने की कवायद शुरू की है। मगर मौसम परिवर्तन से धान की खुशबू फीका पड़ने लगा। महक बनी रहे इसके लिए किसान तमाम उपाय भी कर रहे हैं, लेकिन पहले जैसी खुशबू नहीं आ रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने इसके पीछे मौसम परिवर्तन को जिम्मेदार बताया है। उनका कहना है कि काला नमक की बाली निकलते समय ठंड की जरूरत होती है। जबकि पिछले कई वर्षों से मौसम में परिवर्तन से ठंड लेट से शुरू होती है। ऐसे में तब तक धान की बाली निकल जाती है। मौसम अनुकूल नहीं होने और धूप व गर्मी पड़ने से खुशबू धीरे-धीरे खत्म हो जाती है। इसलिए धान की खुशबू बरकरार रहे और उत्पादन अच्छा हो। किसानों को देर से रोपाई करनी होगी। इससे महक बनी रहेगी और बीमारियों का प्रकोप भी कम रहेगा। किसानों को लाभ मिलेगा और चावल भी स्वादिष्ट होगा।
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क्यों देर में रोपाई करने की सलाह दे रहे वैज्ञानिक
दरअसल मौसम में परिवर्तन से बारिश का कोई समय नहीं रह गया है। साथ ही ठंड कब पड़ेगी इसका भी अब समय सही नहीं हैं। वहीं पहले किसान जड़हन और ओसहन दो प्रकार के धान लगाते थे। ओसहन अर्थात अगेती धान, जबकि जड़हन में बड़े डंठल के अधिक पानी वाले खेत में धान की रोपाई करते थे। इन दोनों की रोपाई में 15 दिन का अंतराल हो जाता था। काला नमक भी जड़हन की प्रजाति में गिनी जाती है। इसलिए इसकी रोपाई देरी से होनी चाहिए। मगर किसान पिछले कई वर्षों से दोनों एक साथ रोपाई करते हैं। ऐसे में किसान मौसम की मार खा जाता है। फसल को अनुकूल समय नहीं मिलता। इसलिए वैज्ञानिक देरी से रोपाई की सलाह दे रहे हैं।
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जिले में इतने हेक्टेयर भूमि पर होती है खेती
मौजूदा समय में 10 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर काला नमक धान की खेती होती है।
वैज्ञानिक की सलाह
काला नमक धान की खुशबू तब बनी रहती है, जब ठंड में उसकी बाली निकलती है। पहले हथिया नक्षत्र में बारिश के बाद ठंड शुरू होती थी। इसी में इस धान में बाली निकलती थी। इससे उसकी महक बनी रहती थी। मगर इधर कई वर्षों से किसान आगे रोपाई कर दे रहे हैं। गर्मी और अनुकूल मौसम नहीं मिलने से महक कम हो जा रही है। महक बनी रहे इसके लिए किसान 15 जून के बाद धान की नर्सरी डाले और जुलाई के दूसरे सप्ताह में रोपाई कर दें। इस प्रयोग से धान में महक और बढ़ जाएगी।
- डॉ. एसके मिश्र कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र सोहना