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Siddharthnagar News: दीपावली के जश्न में डूबा नेपाल, पुरानी परंपरा कायम
Sat, 11 Nov 2023 12:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 11 Nov 2023 12:43 AM IST
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नेपाल में कूत्ते का पूजा करते पुलिस के जवान।
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कौआ, कुत्ता, गाय और बैल की होती है पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
तुलसियापुर। पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में दीपावली की पुरानी परंपरा अब भी बरकरार है। पर्व का जश्न मनाने के लिए भारत के विभिन्न शहरों में रहने वाले नेपाली नागरिकों का घर लौटने का सिलसिला जारी है। यहां पर्व की शुरुआत काग पूजा से होती है और समापन भाई टीका से।
पड़ोसी नेपाल में हिंदू धर्मावलंबी दीपावली पर्व को ''तिहार'' के रूप में बड़े धूमधाम के साथ मनाते हैं। घरों की साफ-सफाई करने के साथ दीपक व जगमग लाइटों से घरों को सजाते हैं। पांच दिनों तक चलने वाले त्योहार के उल्लास में पूरा नेपाल डूब जाता है।
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी अर्थात पहला दिन काग तिहार के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कौओं की विधिवत पूजा की जाती है। उन्हें खाने के सामान पेश किए जाते हैं। कौओं को यमराज के दूत के रूप में माना जाता है। अगले दिन कुकर तिहार मनाया जाता है। इस दिन कुत्ते की पूजा की जाती है।
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हिंदू परंपरा के अनुसार मान्यता है कि कुत्ता, यम का दूत है। कुकुर तिहार के दिन कुत्तों को उनका पसंदीदा भोजन परोसा जाता है। विधिवत पूजन कर माला पहनाया जाता है। अमावस्या यानी दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी के रूप में गाय की पूजा की जाती है। विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद धन-धान्य, समृद्धि व खुशहाली की कामना की जाती है।
चौथे दिन शक्ति के देवता के रूप में बैल को पूजा जाता है। आखिरी दिन भाई टीका यानी भाई दूज का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। बहनें अपने भाइयों भाइयों की दीर्घायु की कामना यमराज से करती हैं।
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कौआ, कुत्ता, गाय और बैल की होती है पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
तुलसियापुर। पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में दीपावली की पुरानी परंपरा अब भी बरकरार है। पर्व का जश्न मनाने के लिए भारत के विभिन्न शहरों में रहने वाले नेपाली नागरिकों का घर लौटने का सिलसिला जारी है। यहां पर्व की शुरुआत काग पूजा से होती है और समापन भाई टीका से।
पड़ोसी नेपाल में हिंदू धर्मावलंबी दीपावली पर्व को ''तिहार'' के रूप में बड़े धूमधाम के साथ मनाते हैं। घरों की साफ-सफाई करने के साथ दीपक व जगमग लाइटों से घरों को सजाते हैं। पांच दिनों तक चलने वाले त्योहार के उल्लास में पूरा नेपाल डूब जाता है।
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कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी अर्थात पहला दिन काग तिहार के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कौओं की विधिवत पूजा की जाती है। उन्हें खाने के सामान पेश किए जाते हैं। कौओं को यमराज के दूत के रूप में माना जाता है। अगले दिन कुकर तिहार मनाया जाता है। इस दिन कुत्ते की पूजा की जाती है।
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हिंदू परंपरा के अनुसार मान्यता है कि कुत्ता, यम का दूत है। कुकुर तिहार के दिन कुत्तों को उनका पसंदीदा भोजन परोसा जाता है। विधिवत पूजन कर माला पहनाया जाता है। अमावस्या यानी दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी के रूप में गाय की पूजा की जाती है। विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद धन-धान्य, समृद्धि व खुशहाली की कामना की जाती है।
चौथे दिन शक्ति के देवता के रूप में बैल को पूजा जाता है। आखिरी दिन भाई टीका यानी भाई दूज का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। बहनें अपने भाइयों भाइयों की दीर्घायु की कामना यमराज से करती हैं।