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खतरा : गर्मी से राहत के लिए ट्यूबवेल की टंकी में नहा रहे बच्चे
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खेसरहा क्षेत्र के सिसहनिया गांव के पूरब ट्यूबवेल के पानी की टंकी में नहाते क्षेत्रीय बच्चे। संव
संवाद न्यूज एजेंसी
सकारपार। भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इस चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी से राहत पाने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में कई बच्चे ग्रामीण इलाकों में लगे ट्यूबवेल की टंकियों में नहाने का जोखिम उठा रहे हैं। जो उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
क्षेत्र के बांसी-धानी मार्ग स्थित सिसहनिया गांव के पूरब सिवान में बने ट्यूबवेल की टंकी में आए दिन बच्चे नहाते रहते हैं। पानी की टंकी लगभग 25 फीट की ऊंचाई पर बना है। वहीं, टंकी की गहराई लगभग आठ फीट है। बिजली रहने पर इसमें हर वक्त पानी की सप्लाई होती रहती है। ऐसे में बच्चे गर्मी से राहत पाने के लिए टंकी में घुस कर नहाते हैं। जो बच्चों के लिए कभी भी खतरा साबित हो सकता है।
किसानों को सिंचाई के लिए समय- समय पर बेहतर सुविधा मिल सके। इसके लिए सरकार की तरफ से हर गांव में ट्यूबवेल का निर्माण कराया गया। इसी क्रम में सिसहनिया गांव के पूरब बांसी- पंघटिया बांध के पास सिवान में सिंचाई के लिए ट्यूबवेल बना है। ट्यूबवेल के पंप हाउस से पानी निकलकर सीधा सामने बने टंकी में गिरता है। वहां से सिवान में बने अवलेटों में जाता है।
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क्षेत्र के बच्चे आए दिन सुबह ग्यारह बजे से दोपहर दो बजे तक पानी की टंकी में नहाते हैं। बच्चे पानी सप्लाई के लिए लगी लोहे की पाइप के सहारे दीवार पर चढ़ कर टंकी में घुस जाते हैं। उछल कूद करते हुए नहाते हैं। इसी तरह सिसहनिया गांव के दक्षिण बांसी धानी- मार्ग से सटे डडिया में बने ट्यूबवेल में बच्चे आए दिन नहाते रहते हैं। हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां ट्यूबवेल की टंकियों में नहाते समय बच्चों की जान चली गई।
टंकियों में पानी गहरा और ठंडा होता है, जिससे बच्चों को हाइपोथर्मिया या डूबने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा, टंकियों के अंदर काई और गंदगी जमा होने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
ऐसे में माता- पिता और अभिभावकों को चाहिए कि अपने बच्चों को ऐसी जगहों पर नहाने से रोकें, और उनको समझने की कोशिश करें कि ऐसी जगहों पर नहाना खतरा हो सकता है। वहीं, विभाग की तरफ से सभी पानी की टंकियों पर ऊपर से जाली लगवाकर सुरक्षित करवाना चाहिए। ताकि भविष्य में न कोई टंकी में घुस कर नहा सके और न ही उससे कोई खतरा पैदा हो सके। साथ ही स्थानीय प्रशासन को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
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सकारपार। भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इस चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी से राहत पाने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में कई बच्चे ग्रामीण इलाकों में लगे ट्यूबवेल की टंकियों में नहाने का जोखिम उठा रहे हैं। जो उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
क्षेत्र के बांसी-धानी मार्ग स्थित सिसहनिया गांव के पूरब सिवान में बने ट्यूबवेल की टंकी में आए दिन बच्चे नहाते रहते हैं। पानी की टंकी लगभग 25 फीट की ऊंचाई पर बना है। वहीं, टंकी की गहराई लगभग आठ फीट है। बिजली रहने पर इसमें हर वक्त पानी की सप्लाई होती रहती है। ऐसे में बच्चे गर्मी से राहत पाने के लिए टंकी में घुस कर नहाते हैं। जो बच्चों के लिए कभी भी खतरा साबित हो सकता है।
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किसानों को सिंचाई के लिए समय- समय पर बेहतर सुविधा मिल सके। इसके लिए सरकार की तरफ से हर गांव में ट्यूबवेल का निर्माण कराया गया। इसी क्रम में सिसहनिया गांव के पूरब बांसी- पंघटिया बांध के पास सिवान में सिंचाई के लिए ट्यूबवेल बना है। ट्यूबवेल के पंप हाउस से पानी निकलकर सीधा सामने बने टंकी में गिरता है। वहां से सिवान में बने अवलेटों में जाता है।
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क्षेत्र के बच्चे आए दिन सुबह ग्यारह बजे से दोपहर दो बजे तक पानी की टंकी में नहाते हैं। बच्चे पानी सप्लाई के लिए लगी लोहे की पाइप के सहारे दीवार पर चढ़ कर टंकी में घुस जाते हैं। उछल कूद करते हुए नहाते हैं। इसी तरह सिसहनिया गांव के दक्षिण बांसी धानी- मार्ग से सटे डडिया में बने ट्यूबवेल में बच्चे आए दिन नहाते रहते हैं। हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां ट्यूबवेल की टंकियों में नहाते समय बच्चों की जान चली गई।
टंकियों में पानी गहरा और ठंडा होता है, जिससे बच्चों को हाइपोथर्मिया या डूबने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा, टंकियों के अंदर काई और गंदगी जमा होने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
ऐसे में माता- पिता और अभिभावकों को चाहिए कि अपने बच्चों को ऐसी जगहों पर नहाने से रोकें, और उनको समझने की कोशिश करें कि ऐसी जगहों पर नहाना खतरा हो सकता है। वहीं, विभाग की तरफ से सभी पानी की टंकियों पर ऊपर से जाली लगवाकर सुरक्षित करवाना चाहिए। ताकि भविष्य में न कोई टंकी में घुस कर नहा सके और न ही उससे कोई खतरा पैदा हो सके। साथ ही स्थानीय प्रशासन को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।