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Siddharthnagar News: बांध का गैप बढ़ाएगी मुसीबत, जलस्तर बढ़ने के साथ बढ़ने लगी धड़कन
Thu, 16 Jul 2026 01:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 16 Jul 2026 01:01 AM IST
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सिद्धार्थनगर। नेपाल में हो रही बारिश के चलते तेजी से बढ़ रहे राप्ती के जलस्तर से जिले में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जलस्तर बढ़ने से राप्ती के बाएं तट पर बने दो बांधों से बांसी व डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के सैंकड़ों गांवों की सुरक्षा होती है।
39.500 किमी लंबे बांसी-डुमरियागंज व 40.800 किमी लंबे शाहपुर भोजपुर बांध में 10 किमी से अधिक लंबे गैप के भरने का विभागीय प्रयास अभी तक असफल साबित हुआ है। अब राप्ती के बढ़ रहे जलस्तर से बांधों के गैप के रास्ते कई गांवों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की धड़कने भी बढ़ गई हैं।
जिले में सर्वाधिक तबाही मचाने वाली नदियों में राप्ती का जलस्तर बुधवार सुबह खतरे के लाल निशान 84.900 मीटर से नीचे 81.48 मीटर पर बह रहा था, जबकि तेजी से बढ़ रहा जलस्तर शाम तक 81.64 मीटर पर पहुंच गया है, जो खतरे के लाल निशान से मात्र 3.26 मीटर नीचे है। वहीं एक दिन पहले मंगलवार सुबह राप्ती का जलस्तर 81.20 मीटर पर था।
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बाढ़ से तबाही मचाने वाली दूसरी सबसे बड़ी नदी बूढ़ी राप्ती का जलस्तर बुधवार को खतरे के लाल निशान 85.650 मीटर से 3.81 मीटर नीचे 81.84 मीटर पर पहुंचकर स्थिर हो गया है। नेपाल व जिले में चार दिनों से हो रही बारिश के चलते ऐसा ही कूड़ा, घोघी व बानगंगा आदि नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव शुरू होने से आसपास के ग्रामीणों की सांसें अटक गई हैं।
जहां डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में बांध के गैप से तबाही की आशंका है, वहीं बांसी, शोहरतगढ़, इटवा व नौगढ़ तहसीलों में नदियों के किनारे कटान की आशंका बाढ़ पीड़ित सशंकित हैं।
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गैप से खतरे में है दो सौ से अधिक गांवों की सुरक्षा
शाहपुर। 200 से अधिक गांवों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण 40.800 किमी लंबे शाहपुर-भोजपुर बांध का निर्माण अब भी अधूरा है। डुमरियागंज व इटवा तहसील से होकर गुजरने वाले इस बांध की परियोजना के लिए 2020 में 74.72 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसमें भूमि मुआवजा, रेगुलेटर निर्माण और अधूरे हिस्सों को पूरा करना शामिल था। परियोजना के पांच गैप में जिले के चार गैप की कुल लंबाई 8.400 किमी है। वहीं राप्ती के बढ़ते जलस्तर को देखकर धान की रोपाई कर चुके किसानों को फसल बर्बाद होने का डर सताने लगा है। इससे क्षेत्र के रमवापुर उर्फ नेबुआ, धनोहरा, धनोहरी, पेंडारी मुस्तहकम आदि गांव में बाढ़ का खतरा है।
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यहां नहीं भरे गए बांधों में गैप
शाहपुर-भोजपुर बांध में शुरुआत में 15 स्थानों पर गैप थे, जिनमें से 10 को भर लिया गया है। इस बांध में पेंडारी मुस्तहकम से मछिया, खुरपहवा, फत्तेपुर, भरवठिया मुस्तहकम, तेनुई आदि गांवों में गैप है। बिजौरा-बेतनार के 1.4 किलोमीटर गैप को मुआवजा देकर पूरा किया गया, वीरपुर कोहलवा के पास गैप शेष हैं। सबसे बड़ा गैप भरवठिया मुस्तहकम में है, जिसकी लंबाई लगभग 4.1 किलोमीटर है। यहां पिछले वर्ष दो करोड़ रुपये मुआवजे के लिए मिले थे, जिससे करीब 60 प्रतिशत किसानों को भुगतान किया गया। शेष 40 प्रतिशत किसानों को भुगतान के लिए इस वर्ष अब तक धन नहीं मिल पाया है, जिससे कार्य शुरू नहीं हो सका। बेवां मुस्तहकम और भरवठिया ऐहतेमाली में किसान बांध का मार्ग बदलने की मांग कर रहे है।
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बांसी डुमरियागंज बांध में गैप से खतरा
राप्ती के किनारे बन रहा 39.500 किमी लंबा डुमरियागंज- बांसी बांध दो दशक बाद भी अधूरा है, जिससे राप्ती में उफान आने पर कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। राप्ती तट के किनारे बसे गांवों को बाढ़ व कटान से बचाव के लिए वर्ष 1997-98 से ही निर्मित हो रहे बांध में तीन बड़े- बड़े गैप हैं। बांध निर्माण में कुछ काश्तकारों से जमीन को लेकर विवाद है। इससे बंजरहवा गांव, वीरपुर रतनपुर गांव, रसूलपुर गांव के पास गैप छोड़ दिया। जो बांसी व डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कई गांव में तबाही मचाने का काम कर रहे हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से बनजरहवा, अंदुआ, अल्लापुर, मल्हवार, रसूलपुर, कुंडी, असनहरा, महोखवा, सीरमझारी, जमालजोत आदि गांवों में तबाही मचने का खतरा मंडरा रहा है।
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प्रमुख नदियों का जलस्तर मीटर में
नदी खतरे का स्तर बुधवार
राप्ती 84.900 81.64
बूढ़ी राप्ती 85.650 81.84
कूड़ा 83.520 78.80
बानगंगा 93.420 89.15
39.500 किमी लंबे बांसी-डुमरियागंज व 40.800 किमी लंबे शाहपुर भोजपुर बांध में 10 किमी से अधिक लंबे गैप के भरने का विभागीय प्रयास अभी तक असफल साबित हुआ है। अब राप्ती के बढ़ रहे जलस्तर से बांधों के गैप के रास्ते कई गांवों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की धड़कने भी बढ़ गई हैं।
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जिले में सर्वाधिक तबाही मचाने वाली नदियों में राप्ती का जलस्तर बुधवार सुबह खतरे के लाल निशान 84.900 मीटर से नीचे 81.48 मीटर पर बह रहा था, जबकि तेजी से बढ़ रहा जलस्तर शाम तक 81.64 मीटर पर पहुंच गया है, जो खतरे के लाल निशान से मात्र 3.26 मीटर नीचे है। वहीं एक दिन पहले मंगलवार सुबह राप्ती का जलस्तर 81.20 मीटर पर था।
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बाढ़ से तबाही मचाने वाली दूसरी सबसे बड़ी नदी बूढ़ी राप्ती का जलस्तर बुधवार को खतरे के लाल निशान 85.650 मीटर से 3.81 मीटर नीचे 81.84 मीटर पर पहुंचकर स्थिर हो गया है। नेपाल व जिले में चार दिनों से हो रही बारिश के चलते ऐसा ही कूड़ा, घोघी व बानगंगा आदि नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव शुरू होने से आसपास के ग्रामीणों की सांसें अटक गई हैं।
जहां डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में बांध के गैप से तबाही की आशंका है, वहीं बांसी, शोहरतगढ़, इटवा व नौगढ़ तहसीलों में नदियों के किनारे कटान की आशंका बाढ़ पीड़ित सशंकित हैं।
गैप से खतरे में है दो सौ से अधिक गांवों की सुरक्षा
शाहपुर। 200 से अधिक गांवों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण 40.800 किमी लंबे शाहपुर-भोजपुर बांध का निर्माण अब भी अधूरा है। डुमरियागंज व इटवा तहसील से होकर गुजरने वाले इस बांध की परियोजना के लिए 2020 में 74.72 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसमें भूमि मुआवजा, रेगुलेटर निर्माण और अधूरे हिस्सों को पूरा करना शामिल था। परियोजना के पांच गैप में जिले के चार गैप की कुल लंबाई 8.400 किमी है। वहीं राप्ती के बढ़ते जलस्तर को देखकर धान की रोपाई कर चुके किसानों को फसल बर्बाद होने का डर सताने लगा है। इससे क्षेत्र के रमवापुर उर्फ नेबुआ, धनोहरा, धनोहरी, पेंडारी मुस्तहकम आदि गांव में बाढ़ का खतरा है।
यहां नहीं भरे गए बांधों में गैप
शाहपुर-भोजपुर बांध में शुरुआत में 15 स्थानों पर गैप थे, जिनमें से 10 को भर लिया गया है। इस बांध में पेंडारी मुस्तहकम से मछिया, खुरपहवा, फत्तेपुर, भरवठिया मुस्तहकम, तेनुई आदि गांवों में गैप है। बिजौरा-बेतनार के 1.4 किलोमीटर गैप को मुआवजा देकर पूरा किया गया, वीरपुर कोहलवा के पास गैप शेष हैं। सबसे बड़ा गैप भरवठिया मुस्तहकम में है, जिसकी लंबाई लगभग 4.1 किलोमीटर है। यहां पिछले वर्ष दो करोड़ रुपये मुआवजे के लिए मिले थे, जिससे करीब 60 प्रतिशत किसानों को भुगतान किया गया। शेष 40 प्रतिशत किसानों को भुगतान के लिए इस वर्ष अब तक धन नहीं मिल पाया है, जिससे कार्य शुरू नहीं हो सका। बेवां मुस्तहकम और भरवठिया ऐहतेमाली में किसान बांध का मार्ग बदलने की मांग कर रहे है।
बांसी डुमरियागंज बांध में गैप से खतरा
राप्ती के किनारे बन रहा 39.500 किमी लंबा डुमरियागंज- बांसी बांध दो दशक बाद भी अधूरा है, जिससे राप्ती में उफान आने पर कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। राप्ती तट के किनारे बसे गांवों को बाढ़ व कटान से बचाव के लिए वर्ष 1997-98 से ही निर्मित हो रहे बांध में तीन बड़े- बड़े गैप हैं। बांध निर्माण में कुछ काश्तकारों से जमीन को लेकर विवाद है। इससे बंजरहवा गांव, वीरपुर रतनपुर गांव, रसूलपुर गांव के पास गैप छोड़ दिया। जो बांसी व डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कई गांव में तबाही मचाने का काम कर रहे हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से बनजरहवा, अंदुआ, अल्लापुर, मल्हवार, रसूलपुर, कुंडी, असनहरा, महोखवा, सीरमझारी, जमालजोत आदि गांवों में तबाही मचने का खतरा मंडरा रहा है।
प्रमुख नदियों का जलस्तर मीटर में
नदी खतरे का स्तर बुधवार
राप्ती 84.900 81.64
बूढ़ी राप्ती 85.650 81.84
कूड़ा 83.520 78.80
बानगंगा 93.420 89.15