{"_id":"634d9b5626961c01423e19f0","slug":"cut-dam-to-save-marooned-villeges-siddharthnagar-news-gkp4544097102","type":"story","status":"publish","title_hn":"जलमग्न गांवों को बचाने के लिए काटा बांध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जलमग्न गांवों को बचाने के लिए काटा बांध
विज्ञापन
उसका क्षेत्र में कटा अजगरा बांध। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जलमग्न गांवों को बचाने के लिए काटा बांध
सिद्धार्थनगर। राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के बीच जलमग्न उसका एवं जोगिया के कछार क्षेत्र के कई सौ गांवों को बचाने के लिए अजिगरा गांव के पास बांध काट दिया गया। इससे इस कटोरे के आकार वाले भूभाग में एकत्रित पानी नदी में गिरने लगा है। इस क्षेत्र में एकत्रित पानी बांध पर दो किमी तक ओवरफ्लो कर रहा था। प्रशासन के अनुसार बांध कटने से जहां गांव सुरक्षित होंगे, वहीं आसपास के बांध टूटने से भी बच जाएंगे।
दो नदियों के बीच स्थित उसका एवं जोगिया के कछार क्षेत्र के सैकड़ों गांव दोनों नदियों के किनारे बने बांध से घिरे हुए है। सोमवार तक इसके दोनों तरफ बने बांध सुरक्षित थे, लेकिन दूसरे क्षेत्र में फैला बाढ़ का पानी आने से कटोरी आकार के इस नीचले भूभाग में स्थित सौ से अधिक गांव डूबे हुए थे। जलभराव की स्थिति यह हो गई थी कि राप्ती नदी किनारे बने भवारी-खजुरडाड-अजिगरा बांध पर भवारी से गायघाट के बीच दो किमी तक ओवरफ्लो कर पानी नदी की तरफ गिर रहा था। इससे बांध पर खतरा मंडरा ही रहा था, साथ ही जलमग्न हो चुके सैंकड़ों गांव के लोगों को सांसत झेलनी पड़ रही थी।
उसका प्रतिनिधि के अनुसार, जलमग्न गांव बैरवानानकार, रीवां नानकार, इटौवा, अजिगरा, तालभिरौना, हरनी, टड़िया, खजुरडाड़ आदि गांव के लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया था। उन्हें जरूरी सामग्री और इलाज के लिए बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। इस कारण बूढ़ी राप्ती नदी किनारे बने फत्तेपुर-खजुरडाड़-अजिगरा बांध को अजिगरा के पास स्थित रेगुलेटर के बगल में काट दिया गया। हालांकि, कोई जिम्मदार बांध काटने पर बोलने को तैयार नहीं है। डीएम संजीव रंजन ने कहा कि जलमग्न गांवों एवं बांध को सुरक्षित करने को सिंचाई विभाग को जरूरी कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था, जिससे जलभराव क्षेत्र से पानी की नदी में निकासी हो सके।
विज्ञापन
पहले बांध टूटने से तबाही, अब जलभराव का दर्द
बूढ़ी राप्ती नदी किनारे बने तीन बांधों के टूटने से जिले में चारो तरफ तबाही मच गई थी, लेकिन अब नदियों का जलस्तर कम होने के साथ ही लोग जलभराव का दर्द झेल रहे है। उसका एवं जोगिया के इस कछार क्षेत्र के दोनों तरफ बने बांध तो सुरक्षित थे, लेकिन दूसरी जगहों के बाढ़ का पानी भरने से यहां त्राहि-त्राहि मची हुई थी। राप्ती किनारे बने बांधों के गैप और बूढ़ी राप्ती नदी किनारे बांधों के टूटने से बाढ़ का पानी फजिहतवा नाला के माध्यम कछार क्षेत्र में भर गया था।
घट रहा नदियों का जलस्तर
जिले में नदियों का जलस्तर घट रहा है फिर राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी आठ दिन से लगातार लाल निशान से उपर बह रही है। उच्चतम जलस्तर 86.280 मीटर का रिकार्ड बनाकर राप्ती नदी घटने लगी है, फिर भी वह सोमवार को खतरे के निशान 84.900 से 1.26 मीटर अधिक 86.160 मीटर पर बह रही है। यह पुराने उच्चतम जलस्तर 85.950 से अभी भी अधिक है। वहीं बूढ़ी राप्ती नदी भी खतरे के निशान 85.650 से डेढ़ मीटर अधिक 87.120 मीटर पर बह रही है।
ग्रामीणों में था तनाव
उसका बाजार। बाढ़ से प्रभावित गांव अजिगरा गायघाट, हथिवड़ताल, ताल बगहिया और रीवा नानकार के लोगों ने बैरवा नानकार के पास बाढ़ से बचाव के लिए बांध पर रखी मिट्टी से भरी बोरियों को हटा दिया। बाद में बैरवा के लोगों ने बोरियों को रख फिर से पानी का बहाव रोक दिया। इससे दोनों पक्ष के ग्रामीणों में तनाव था। एसडीएम प्रदीप कुमार यादव ने कहा कि ताल बगहिया गांव जाने वाले मोड़ पर बांध में लगे ह्यूम पाइप खोले गए हैं।
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के बीच जलमग्न उसका एवं जोगिया के कछार क्षेत्र के कई सौ गांवों को बचाने के लिए अजिगरा गांव के पास बांध काट दिया गया। इससे इस कटोरे के आकार वाले भूभाग में एकत्रित पानी नदी में गिरने लगा है। इस क्षेत्र में एकत्रित पानी बांध पर दो किमी तक ओवरफ्लो कर रहा था। प्रशासन के अनुसार बांध कटने से जहां गांव सुरक्षित होंगे, वहीं आसपास के बांध टूटने से भी बच जाएंगे।
दो नदियों के बीच स्थित उसका एवं जोगिया के कछार क्षेत्र के सैकड़ों गांव दोनों नदियों के किनारे बने बांध से घिरे हुए है। सोमवार तक इसके दोनों तरफ बने बांध सुरक्षित थे, लेकिन दूसरे क्षेत्र में फैला बाढ़ का पानी आने से कटोरी आकार के इस नीचले भूभाग में स्थित सौ से अधिक गांव डूबे हुए थे। जलभराव की स्थिति यह हो गई थी कि राप्ती नदी किनारे बने भवारी-खजुरडाड-अजिगरा बांध पर भवारी से गायघाट के बीच दो किमी तक ओवरफ्लो कर पानी नदी की तरफ गिर रहा था। इससे बांध पर खतरा मंडरा ही रहा था, साथ ही जलमग्न हो चुके सैंकड़ों गांव के लोगों को सांसत झेलनी पड़ रही थी।
विज्ञापन
उसका प्रतिनिधि के अनुसार, जलमग्न गांव बैरवानानकार, रीवां नानकार, इटौवा, अजिगरा, तालभिरौना, हरनी, टड़िया, खजुरडाड़ आदि गांव के लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया था। उन्हें जरूरी सामग्री और इलाज के लिए बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। इस कारण बूढ़ी राप्ती नदी किनारे बने फत्तेपुर-खजुरडाड़-अजिगरा बांध को अजिगरा के पास स्थित रेगुलेटर के बगल में काट दिया गया। हालांकि, कोई जिम्मदार बांध काटने पर बोलने को तैयार नहीं है। डीएम संजीव रंजन ने कहा कि जलमग्न गांवों एवं बांध को सुरक्षित करने को सिंचाई विभाग को जरूरी कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था, जिससे जलभराव क्षेत्र से पानी की नदी में निकासी हो सके।
विज्ञापन
पहले बांध टूटने से तबाही, अब जलभराव का दर्द
बूढ़ी राप्ती नदी किनारे बने तीन बांधों के टूटने से जिले में चारो तरफ तबाही मच गई थी, लेकिन अब नदियों का जलस्तर कम होने के साथ ही लोग जलभराव का दर्द झेल रहे है। उसका एवं जोगिया के इस कछार क्षेत्र के दोनों तरफ बने बांध तो सुरक्षित थे, लेकिन दूसरी जगहों के बाढ़ का पानी भरने से यहां त्राहि-त्राहि मची हुई थी। राप्ती किनारे बने बांधों के गैप और बूढ़ी राप्ती नदी किनारे बांधों के टूटने से बाढ़ का पानी फजिहतवा नाला के माध्यम कछार क्षेत्र में भर गया था।
घट रहा नदियों का जलस्तर
जिले में नदियों का जलस्तर घट रहा है फिर राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी आठ दिन से लगातार लाल निशान से उपर बह रही है। उच्चतम जलस्तर 86.280 मीटर का रिकार्ड बनाकर राप्ती नदी घटने लगी है, फिर भी वह सोमवार को खतरे के निशान 84.900 से 1.26 मीटर अधिक 86.160 मीटर पर बह रही है। यह पुराने उच्चतम जलस्तर 85.950 से अभी भी अधिक है। वहीं बूढ़ी राप्ती नदी भी खतरे के निशान 85.650 से डेढ़ मीटर अधिक 87.120 मीटर पर बह रही है।
ग्रामीणों में था तनाव
उसका बाजार। बाढ़ से प्रभावित गांव अजिगरा गायघाट, हथिवड़ताल, ताल बगहिया और रीवा नानकार के लोगों ने बैरवा नानकार के पास बाढ़ से बचाव के लिए बांध पर रखी मिट्टी से भरी बोरियों को हटा दिया। बाद में बैरवा के लोगों ने बोरियों को रख फिर से पानी का बहाव रोक दिया। इससे दोनों पक्ष के ग्रामीणों में तनाव था। एसडीएम प्रदीप कुमार यादव ने कहा कि ताल बगहिया गांव जाने वाले मोड़ पर बांध में लगे ह्यूम पाइप खोले गए हैं।