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Siddharthnagar News: बेपटरी हो गया था सीएमओ कार्यालय
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वीडियो वायरल होने के बाद खुद को बचाने में जुटे रहे अधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एक सितंबर को वीडियो वायरल होने के बाद सीएमओ कार्यालय बेपटरी हो गया था। तीन अधिकारी खुद बचाने में जुटे हुए थे। इस कारण कार्यालय से क्षेत्र तक का कार्य प्रभावित हो रहा था। इस प्रकरण बाद सीएमओ कार्यालय में चहल पहल की बजाए सन्नाटा नजर आ रहा था, क्योंकि डिप्टी सीएमओ कार्यालय में कुर्सियां खाली रहने लगी है।
सीएमओ कार्यालय में लेन देन की वीडियो वायरल होने के बाद निजी अस्पतालों की जांच थम गई है, जबकि निजी अस्पतालों एवं जांच सेंटरों को लाइसेंस की फाइलें दब गई थीं। सीएमओ कार्यालय में निजी अस्पतालों व जांच सेंटरों के करीब 70 आवेदनों पर निर्णय नहीं हुआ है। इस कारण ये निजी अस्पताल व जांच सेंटर अवैध हो गए हैं, जबकि शोहरतगढ़ के निजी अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद विधायक विनय वर्मा ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से शिकायत की। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने ताबड़तोड़ छापा मारा और 13 निजी अस्पतालों एवं जांच सेंटरों को सील कर दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अभियान में फर्जी निजी अस्पतालों के संचालन के खुलासे हुए, लेकिन यह अभियान अचानक बंद हो गया। इसी प्रकार सीएमओ कार्यालय की फाइलों को ठंडे बस्ते में जाने की समस्या सामने आने लगी।
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सीएमओ की तहरीर पर एएसपी सिद्धार्थ ने जांच की। उसके बाद डिप्टी सीएमओ डॉ. एमएम त्रिपाठी एवं डॉ. बीएन चतुर्वेदी व निजी अस्पताल के संचालक रंजीत के खिलाफ केस दर्ज हुआ तो दोनों डिप्टी सीएमओ ने कार्यालय आना बंद कर दिया है। इस कारण भी कार्य प्रभावित हो रहा है। डिप्टी सीएमओ डॉ. एमएम त्रिपाठी के पास जिला क्षय रोग का प्रभार भी है।
निजी अस्पतालों के नोडल अफसर डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता को जल्द ही प्रभार मिला है, जबकि लिपिक भी अवकाश पर है। जिन निजी अस्पतालों व जांच सेंटरों के लाइसेंस का आवेदन हुआ, उनके संचालक स्वास्थ्य विभाग का चक्कर लगा रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एक सितंबर को वीडियो वायरल होने के बाद सीएमओ कार्यालय बेपटरी हो गया था। तीन अधिकारी खुद बचाने में जुटे हुए थे। इस कारण कार्यालय से क्षेत्र तक का कार्य प्रभावित हो रहा था। इस प्रकरण बाद सीएमओ कार्यालय में चहल पहल की बजाए सन्नाटा नजर आ रहा था, क्योंकि डिप्टी सीएमओ कार्यालय में कुर्सियां खाली रहने लगी है।
सीएमओ कार्यालय में लेन देन की वीडियो वायरल होने के बाद निजी अस्पतालों की जांच थम गई है, जबकि निजी अस्पतालों एवं जांच सेंटरों को लाइसेंस की फाइलें दब गई थीं। सीएमओ कार्यालय में निजी अस्पतालों व जांच सेंटरों के करीब 70 आवेदनों पर निर्णय नहीं हुआ है। इस कारण ये निजी अस्पताल व जांच सेंटर अवैध हो गए हैं, जबकि शोहरतगढ़ के निजी अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद विधायक विनय वर्मा ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से शिकायत की। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने ताबड़तोड़ छापा मारा और 13 निजी अस्पतालों एवं जांच सेंटरों को सील कर दिया गया।
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स्वास्थ्य विभाग के अभियान में फर्जी निजी अस्पतालों के संचालन के खुलासे हुए, लेकिन यह अभियान अचानक बंद हो गया। इसी प्रकार सीएमओ कार्यालय की फाइलों को ठंडे बस्ते में जाने की समस्या सामने आने लगी।
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सीएमओ की तहरीर पर एएसपी सिद्धार्थ ने जांच की। उसके बाद डिप्टी सीएमओ डॉ. एमएम त्रिपाठी एवं डॉ. बीएन चतुर्वेदी व निजी अस्पताल के संचालक रंजीत के खिलाफ केस दर्ज हुआ तो दोनों डिप्टी सीएमओ ने कार्यालय आना बंद कर दिया है। इस कारण भी कार्य प्रभावित हो रहा है। डिप्टी सीएमओ डॉ. एमएम त्रिपाठी के पास जिला क्षय रोग का प्रभार भी है।
निजी अस्पतालों के नोडल अफसर डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता को जल्द ही प्रभार मिला है, जबकि लिपिक भी अवकाश पर है। जिन निजी अस्पतालों व जांच सेंटरों के लाइसेंस का आवेदन हुआ, उनके संचालक स्वास्थ्य विभाग का चक्कर लगा रहे हैं।