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सीएमओ कार्यालय पर जड़ा ताला
ब्यूरो/अमर उजाला ,सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 14 Sep 2016 11:36 PM IST
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प्रदर्शन किया ।
- फोटो : अमर उजाला
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आउटसोर्सिंग भर्ती व्यवस्था बंद करने सहित छह सूत्री मांगों को लेकर एनएचएम संविदा कर्मियों और आशाओं का आंदोलन बुधवार को भी जारी रहा। शासन-प्रशासन की अनदेखी से क्षुब्ध भूख हड़ताल पर बैठी आशाओं व संविदा कर्मियों ने सीएमओ कार्यालय पर ताला जड़ दिया। करीब आधे घंटे तक कार्यालय पर ताला लगा रहा। अफसर-कर्मचारी अंदर कैद रहे। काफी अनुनय-विनय के बाद सीएमओव कर्मचारी कार्यालय से बाहर निकले। दोपहर बाद मौके पर पहुंचे सांसद जगदंबिका पाल ने मांगों को शासन स्तर पर उठाने का आश्वासन देकर भूख हड़ताल समाप्त कराया, हालांकि धरना लगातार जारी है।
धरने में जिलाध्यक्ष मनीष पांडेय ने कहा कि सरकार लगातार काम के बाद भी हमारी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। जब तक हमारी मांगें मान नहीं ली जाती हैं, भूख हड़ताल जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सफल स्वास्थ्य सेवाओं में 80 प्रतिशत योगदान स्वास्थ्य संविदा कर्मियों एवं आशा कर्मचारियों का होता है। इनके हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिले व राज्य स्तर पर अधिकारियों की मनमानी के चलते संविदा पर तैनात कर्मचारियों को निकाला जा रहा है। इस पर तत्काल अंकुश लगना चाहिए। नियमित नियुक्तियों में संविदा कर्मियों को वरीयता देकर उन्हें समायोजित किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने रिजवी कमेटी की संस्तुतियों को लागू करने, आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर रोक लगाने, आशा बहुओं को निश्चित मानदेय व राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया। धरना-प्रदर्शन में दीपेंद्र मणि त्रिपाठी, संतोष श्रीवास्तव, वीरेंद्र मौर्य, अमित, राधा सिंह, इंद्रेश, राहुल पांडेय, अनिल गुप्ता, अमित मिश्रा, दिनेश मिश्रा आदि मौजूद।
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धरने में जिलाध्यक्ष मनीष पांडेय ने कहा कि सरकार लगातार काम के बाद भी हमारी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। जब तक हमारी मांगें मान नहीं ली जाती हैं, भूख हड़ताल जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सफल स्वास्थ्य सेवाओं में 80 प्रतिशत योगदान स्वास्थ्य संविदा कर्मियों एवं आशा कर्मचारियों का होता है। इनके हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिले व राज्य स्तर पर अधिकारियों की मनमानी के चलते संविदा पर तैनात कर्मचारियों को निकाला जा रहा है। इस पर तत्काल अंकुश लगना चाहिए। नियमित नियुक्तियों में संविदा कर्मियों को वरीयता देकर उन्हें समायोजित किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने रिजवी कमेटी की संस्तुतियों को लागू करने, आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर रोक लगाने, आशा बहुओं को निश्चित मानदेय व राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया। धरना-प्रदर्शन में दीपेंद्र मणि त्रिपाठी, संतोष श्रीवास्तव, वीरेंद्र मौर्य, अमित, राधा सिंह, इंद्रेश, राहुल पांडेय, अनिल गुप्ता, अमित मिश्रा, दिनेश मिश्रा आदि मौजूद।
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