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Siddharthnagar News: बदली और धुंध से बदला मौसम... किसानों की बढ़ी चिंता
Fri, 13 Mar 2026 01:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 13 Mar 2026 01:18 AM IST
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कोहरे के दौरान सुबह वाहन की लाईट जला कर जाते लोग। संवाद
भारतभारी/भवानीगंज। बदलते मौसम के कारण जहां एक ओर लोग सर्दी, जुकाम और बुखार से परेशान हैं, वहीं बृहस्पतिवा की सुबह घना कोहरा छा जाने से किसान भी चिंतित हो गए। अचानक पड़े कोहरे से तैयार हो चुकी गेहूं और सरसों की फसल को नुकसान पहुंचने का डर किसानों को सताने लगा है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए मौसम साफ होने की उम्मीद कर रहे हैं।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में बुधवार को सुबह से ही मौसम का मिजाज बदला नजर आया। सुबह से बदली छाई रही और कई इलाकों में हल्की धुंध भी दिखाई दी। मौसम में आए इस बदलाव से किसानों में फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता देखने को मिली।
किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं, सरसों और दलहन की फसल पकने की अवस्था में है। ऐसे में लगातार बदली और धुंध रहने से फसलों पर बुरा असर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ किसानों का मानना है कि यदि मौसम सामान्य रहा और बारिश न हुई तो फसलों को अधिक नुकसान नहीं होगा। मीरवापुर गांव निवासी किसान भूपेंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं की फसल में अब बालियां आ चुकी हैं। ऐसे में अगर धूप कम निकलेगी और लगातार नमी बनी रही तो फसल में रोग लगने की संभावना बढ़ जाएगी। महुआ खुर्द निवासी किसान सोहन, लालमन, टिकरिया के अब्दुल अली, शमीम तथा असनहरा बखमरा के अनिल पांडेय और पप्पू पांडेय ने बताया कि गेहूं की फसल अब पकने की कगार पर है। ऐसे समय में अचानक पड़ रहा कोहरा गेहूं की बालियों में कीड़े लगने और फसल के कुपोषित होने की आशंका बढ़ा रहा है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। खरगौला निवासी मुनव्वर हुसैन ने कहा कि सुबह धुंध और बदली रहने से खेतों में नमी बनी हुई है, जो कुछ हद तक फसलों के लिए लाभकारी भी हो सकती है लेकिन अगर मौसम ज्यादा दिनों तक ऐसा ही बना रहा तो कटाई के समय परेशानी हो सकती है। ग्राम बिजवार बढ़ई निवासी किसान संजय मिश्र ने बताया कि सरसों की फसल पककर तैयार है। ऐसे में अगर तेज हवा या बारिश होती है तो दाेनों को नुकसान हो सकता है। मौसम के बदलते रुख को लेकर सभी चिंतित हैं।
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-- - माहो कीट और फफूंद का बढ़ सकता है प्रकोप
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रवेश कुमार ने बताया कि तेज हवा एवं ओलावृष्टि न हो तो गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं होगा। बारिश होने से फसल को लाभ मिलेगा। लगातार बदली व धुंध होने से आलू, चना, मसूर व सरसों की फसल में माहाे कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। आम की फसल में फंफूदी रोग हो सकता है। आलू व सरसों की फसल को माहो कीट से बचाने के लिए एक मिलीलीटर इमिडा नामक दवा तीन लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर फसल में छिड़काव करना चाहिए। इसी तरह आम की फसल को फंफूदी रोग रोग से बचाने के लिए एक लीटर पानी में दो ग्राम घुलनशील गंधक का घोल बनाकर आम के पेड़ पर छिड़काव करना लाभदायक होगा।
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डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में बुधवार को सुबह से ही मौसम का मिजाज बदला नजर आया। सुबह से बदली छाई रही और कई इलाकों में हल्की धुंध भी दिखाई दी। मौसम में आए इस बदलाव से किसानों में फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता देखने को मिली।
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किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं, सरसों और दलहन की फसल पकने की अवस्था में है। ऐसे में लगातार बदली और धुंध रहने से फसलों पर बुरा असर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ किसानों का मानना है कि यदि मौसम सामान्य रहा और बारिश न हुई तो फसलों को अधिक नुकसान नहीं होगा। मीरवापुर गांव निवासी किसान भूपेंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं की फसल में अब बालियां आ चुकी हैं। ऐसे में अगर धूप कम निकलेगी और लगातार नमी बनी रही तो फसल में रोग लगने की संभावना बढ़ जाएगी। महुआ खुर्द निवासी किसान सोहन, लालमन, टिकरिया के अब्दुल अली, शमीम तथा असनहरा बखमरा के अनिल पांडेय और पप्पू पांडेय ने बताया कि गेहूं की फसल अब पकने की कगार पर है। ऐसे समय में अचानक पड़ रहा कोहरा गेहूं की बालियों में कीड़े लगने और फसल के कुपोषित होने की आशंका बढ़ा रहा है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। खरगौला निवासी मुनव्वर हुसैन ने कहा कि सुबह धुंध और बदली रहने से खेतों में नमी बनी हुई है, जो कुछ हद तक फसलों के लिए लाभकारी भी हो सकती है लेकिन अगर मौसम ज्यादा दिनों तक ऐसा ही बना रहा तो कटाई के समय परेशानी हो सकती है। ग्राम बिजवार बढ़ई निवासी किसान संजय मिश्र ने बताया कि सरसों की फसल पककर तैयार है। ऐसे में अगर तेज हवा या बारिश होती है तो दाेनों को नुकसान हो सकता है। मौसम के बदलते रुख को लेकर सभी चिंतित हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रवेश कुमार ने बताया कि तेज हवा एवं ओलावृष्टि न हो तो गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं होगा। बारिश होने से फसल को लाभ मिलेगा। लगातार बदली व धुंध होने से आलू, चना, मसूर व सरसों की फसल में माहाे कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। आम की फसल में फंफूदी रोग हो सकता है। आलू व सरसों की फसल को माहो कीट से बचाने के लिए एक मिलीलीटर इमिडा नामक दवा तीन लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर फसल में छिड़काव करना चाहिए। इसी तरह आम की फसल को फंफूदी रोग रोग से बचाने के लिए एक लीटर पानी में दो ग्राम घुलनशील गंधक का घोल बनाकर आम के पेड़ पर छिड़काव करना लाभदायक होगा।