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Siddharthnagar News: बाॅर्डर एरिया की दुकानों पर खप रहा चाइनीज तो अंदर आ रहा गोरखपुर का लहसुन
Wed, 11 Sep 2024 11:32 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 11 Sep 2024 11:32 PM IST
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सीमावर्ती क्षेत्र शोहरतगढ़ और नौगढ़ क्षेत्र की दुकानों पर मिलाकर बेचा जा रहा है चाइनीज लहसुन
डुमरियागंज के सहियापुर मंडी प्रतिदिन आता है 20 से 50 क्विंटल लहसुन,
सीमावर्ती क्षेत्र में प्रतिदिन 20 क्विंटल आ रहा है चाइनीज लहसुन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में हर दिन 40 क्विंटल से अधिक लहसुन की खपत है। इसमें स्थानीय किसानों के यहां पैदा होने वाले लहसुन के अलावा केमिकल और कीटनाशक और जिंक का प्रयोग करके पैदा किए जाने वाले लहसुन बिक रहा है जो सेहत के लिए काफी नुकसानदेह है। चमक और बड़े दाने का यह लहसुन देश का नहीं, बल्कि चीन का है। जिसे तस्कर नेपाल के रास्ते बार्डर पाकर करके ला रहे हैं और दुकानों पर खपा रहे हैं।
चमक और बड़ा दाना देखकर खाना सेहत के लिए घातक हो सकता है। क्योंकि इसमें घातक के किस्म के रसायनिक तत्व पाए जाते हैं जो गंभीर का शिकार बना सकते हैं। ऐसा स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ बता रहे हैं। ऐसे में खरीदते और खाते समय सावधान बरतने की जरूरत है। नहीं तो सेहतमंद बनाने और कई बीमारियों की दवा कहा जाने वाला लहसुन आपको बीमार बना दे। इसमें आपका को खुद सगज होने की जरूरत है। क्योंकि जिसको जांच का जिम्मा है, उन्हें यह पता नहीं है कि बाजार में चाइनीज लहसुन खपाया जा रहा है। वहीं, कारोबारी इससे अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं और कुछ भी बोलने से मना कर रहे हैं। उनका कहना कि लहसुन खरीदकर बेच रहे हैं, यह कहां का है हमें जानकारी नहीं है।
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पड़ताल में आई लहसुन की आवक की हकीकत
जो लहसुन बाजार में बिक रहा है वह कहां से आ रहा है। इसके बारे में जानकारी ली गई तो शोहरतगढ़ के कोटिया, ककरहवा और खुनुवां बाजार के अधिकांश दुकानों पर बड़े दाने वाला चमकरदार लहसुन मिला। पूछते पूछते खुनुवां के एक कारोबारी ने बताया कि उन्हें मुनाफा से मतलब है। स्थानीय किसानों के यहां का लहसुन छोटा होता है और महंगा होता है। जबकि दिखने में भी अच्छा नहीं होता है। उसका छिलका कमजोर रहता है। जिससे वह खराब होने लगता है। जबकि यह लहसुन 120 रुपये किलो तक थोक में मिल जा रहा है। दिखने मेंं अच्छा है और ग्राहक देखकर तत्काल खरीद ले रहे हैं। सीजन है, महंगा हुआ कमाई कर लें। वहीं, अन्य दुकानदारों से जानने की कोशिश की गई तो उन लोगों ने कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया। जबकि, सिद्धार्थनगर नवीन मंडी की बात करें तो यहां से जानकारी मिली की पहले एक पिकअप गोरखपुर मंडी से आता था। लेकिन महंगाई की वजह से मांग कम हो गई है। इसलिए तीन से चार क्विवट ही आ रहा है। वहीं, डुमरियागंज और इटवा की सबसे बड़ी मंडी की सहियापुर में देखा गया तो यहां लहसुन का बड़ा खेप पाया गया। बकायदा बड़ी राशि का चमकता हुआ लहसुन दिखा। बात की गई तो पता चला कि यहां लहसुन हर दिन गोरखपुर मंडी से आता है। पहले से लगभग 40 क्विंटल उतरता था। अब 20-25 हो गया। क्योंकि एक किलो खरीदने वाले एक पाव पर आ गया। ऐसा दुकान पर आने वाले किराना वाले बताते हैं। इसलिए मांग के हिसाब से मंगाया जा रहा है। कुल खपत की बात करें तो जिले में प्रतिदिन 40 क्विंटल लहसुन की खपत है। जिसमें तस्कर सीमा पार से बार्डर एरिया में चाइनीज लहसुन पहुंचा रहे हैं। तस्करी हो रही है। इस बात की पुष्टि एसएसबी की ओर सीमा पर पकड़ी जा रही लहसुन की खेप आ रही है।
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बोले कारोबारी
डुमरियागंज में फुटकर सब्जी विक्रेता सिराज ने आज कहा 280 रुपये प्रति किलो लहसुन बेच रहा हूं । 250 रुपये प्रति किलो की दर से पांच किलो लहसुन शाहपुर मंडी से खरीद कर लाया हूं। फुटकर में महंगाई के चलते लोग 50 से 100 ग्राम ही लोग खरीदते हैं। पांच किलो लहसुन बेचने में दो से तीन दिन लग जाता है।
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इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है कि चाइनीज लहसुन आ रहा है अगर ऐसा हो रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। 9 कुतल 99 वे किलो से नीचे अगर कोई माल है तो उसपर हम जुर्माना नहीं लगा सकते। बॉर्डर पर तैनात जिम्मेदार अगर सख्त कार्रवाई करें तो हम सबको इतना परेशान नहीं होना पड़ेगा।
राम जी यादव, मंडी सचिव शाहपुर
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चीन के लहसुन की जांच जरूरी
आयुर्वेद के डॉक्टर गिरीधर राजेश अग्रहरि कहते हैं कि देसी लहसुन अपने सुगंध के चलते ही आसानी से पहचान लिया जाता है। जबकि, चीन के लहसुन की कलियां मोटी और बड़ी होती हैं। यह एक हाइब्रिड है। चूंकि चीन के लहसुन ठंडे वातावरण में केवल केमिकल के बल पर पैदा होते हैं, इसलिए इसमें लहसुन के प्राकृतिक गुण नहीं मिलेंगे। इसको खाने से यहां के लोगों के सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। अपने क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में लहसुन होता है, इसलिए लोगों को स्थानीय स्तर पर उत्पादित लहसुन का ही प्रयोग करना चाहिए।
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दवा के रूप में शुरू हुआ इस्तेमाल, स्वाद ने बिगाड़ी आदत
डॉ. लक्षमण ने बताया कि लहसुन का प्रयोग पहले दवा के रूप में हुई। इसके खाने से जोड़ों का दर्द ठीक रहता है। पेट की अग्नि को प्रदिप्त करता है, जिससे खाना पचने में आसानी होती है। कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल में रखता है। इसके गुणों के कारण ही इसका प्रयोग सब्जी में मसाला के तौर पर किया जाने लगा, लेकिन किसी भी वस्तु का आवश्यकता से अधिक प्रयोग दुरुपयोग की श्रेणी आता है और जब किसी का दुरुपयोग होता है तो वह नुकसानदायक बन जाता है।
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बोले जिम्मेदार
चाइनीज लहसुन बाजार में आ रहा है इसके बारे में जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हो रहा है तो दुकानों की जांच की जाएगी। बार्डर पर विशेष जांच की जाएगी। पकड़ में आने वालों पर कार्रवाई होगी।
चंद्रभानु पटेल, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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डुमरियागंज के सहियापुर मंडी प्रतिदिन आता है 20 से 50 क्विंटल लहसुन,
सीमावर्ती क्षेत्र में प्रतिदिन 20 क्विंटल आ रहा है चाइनीज लहसुन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में हर दिन 40 क्विंटल से अधिक लहसुन की खपत है। इसमें स्थानीय किसानों के यहां पैदा होने वाले लहसुन के अलावा केमिकल और कीटनाशक और जिंक का प्रयोग करके पैदा किए जाने वाले लहसुन बिक रहा है जो सेहत के लिए काफी नुकसानदेह है। चमक और बड़े दाने का यह लहसुन देश का नहीं, बल्कि चीन का है। जिसे तस्कर नेपाल के रास्ते बार्डर पाकर करके ला रहे हैं और दुकानों पर खपा रहे हैं।
चमक और बड़ा दाना देखकर खाना सेहत के लिए घातक हो सकता है। क्योंकि इसमें घातक के किस्म के रसायनिक तत्व पाए जाते हैं जो गंभीर का शिकार बना सकते हैं। ऐसा स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ बता रहे हैं। ऐसे में खरीदते और खाते समय सावधान बरतने की जरूरत है। नहीं तो सेहतमंद बनाने और कई बीमारियों की दवा कहा जाने वाला लहसुन आपको बीमार बना दे। इसमें आपका को खुद सगज होने की जरूरत है। क्योंकि जिसको जांच का जिम्मा है, उन्हें यह पता नहीं है कि बाजार में चाइनीज लहसुन खपाया जा रहा है। वहीं, कारोबारी इससे अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं और कुछ भी बोलने से मना कर रहे हैं। उनका कहना कि लहसुन खरीदकर बेच रहे हैं, यह कहां का है हमें जानकारी नहीं है।
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पड़ताल में आई लहसुन की आवक की हकीकत
जो लहसुन बाजार में बिक रहा है वह कहां से आ रहा है। इसके बारे में जानकारी ली गई तो शोहरतगढ़ के कोटिया, ककरहवा और खुनुवां बाजार के अधिकांश दुकानों पर बड़े दाने वाला चमकरदार लहसुन मिला। पूछते पूछते खुनुवां के एक कारोबारी ने बताया कि उन्हें मुनाफा से मतलब है। स्थानीय किसानों के यहां का लहसुन छोटा होता है और महंगा होता है। जबकि दिखने में भी अच्छा नहीं होता है। उसका छिलका कमजोर रहता है। जिससे वह खराब होने लगता है। जबकि यह लहसुन 120 रुपये किलो तक थोक में मिल जा रहा है। दिखने मेंं अच्छा है और ग्राहक देखकर तत्काल खरीद ले रहे हैं। सीजन है, महंगा हुआ कमाई कर लें। वहीं, अन्य दुकानदारों से जानने की कोशिश की गई तो उन लोगों ने कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया। जबकि, सिद्धार्थनगर नवीन मंडी की बात करें तो यहां से जानकारी मिली की पहले एक पिकअप गोरखपुर मंडी से आता था। लेकिन महंगाई की वजह से मांग कम हो गई है। इसलिए तीन से चार क्विवट ही आ रहा है। वहीं, डुमरियागंज और इटवा की सबसे बड़ी मंडी की सहियापुर में देखा गया तो यहां लहसुन का बड़ा खेप पाया गया। बकायदा बड़ी राशि का चमकता हुआ लहसुन दिखा। बात की गई तो पता चला कि यहां लहसुन हर दिन गोरखपुर मंडी से आता है। पहले से लगभग 40 क्विंटल उतरता था। अब 20-25 हो गया। क्योंकि एक किलो खरीदने वाले एक पाव पर आ गया। ऐसा दुकान पर आने वाले किराना वाले बताते हैं। इसलिए मांग के हिसाब से मंगाया जा रहा है। कुल खपत की बात करें तो जिले में प्रतिदिन 40 क्विंटल लहसुन की खपत है। जिसमें तस्कर सीमा पार से बार्डर एरिया में चाइनीज लहसुन पहुंचा रहे हैं। तस्करी हो रही है। इस बात की पुष्टि एसएसबी की ओर सीमा पर पकड़ी जा रही लहसुन की खेप आ रही है।
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बोले कारोबारी
डुमरियागंज में फुटकर सब्जी विक्रेता सिराज ने आज कहा 280 रुपये प्रति किलो लहसुन बेच रहा हूं । 250 रुपये प्रति किलो की दर से पांच किलो लहसुन शाहपुर मंडी से खरीद कर लाया हूं। फुटकर में महंगाई के चलते लोग 50 से 100 ग्राम ही लोग खरीदते हैं। पांच किलो लहसुन बेचने में दो से तीन दिन लग जाता है।
इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है कि चाइनीज लहसुन आ रहा है अगर ऐसा हो रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। 9 कुतल 99 वे किलो से नीचे अगर कोई माल है तो उसपर हम जुर्माना नहीं लगा सकते। बॉर्डर पर तैनात जिम्मेदार अगर सख्त कार्रवाई करें तो हम सबको इतना परेशान नहीं होना पड़ेगा।
राम जी यादव, मंडी सचिव शाहपुर
चीन के लहसुन की जांच जरूरी
आयुर्वेद के डॉक्टर गिरीधर राजेश अग्रहरि कहते हैं कि देसी लहसुन अपने सुगंध के चलते ही आसानी से पहचान लिया जाता है। जबकि, चीन के लहसुन की कलियां मोटी और बड़ी होती हैं। यह एक हाइब्रिड है। चूंकि चीन के लहसुन ठंडे वातावरण में केवल केमिकल के बल पर पैदा होते हैं, इसलिए इसमें लहसुन के प्राकृतिक गुण नहीं मिलेंगे। इसको खाने से यहां के लोगों के सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। अपने क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में लहसुन होता है, इसलिए लोगों को स्थानीय स्तर पर उत्पादित लहसुन का ही प्रयोग करना चाहिए।
दवा के रूप में शुरू हुआ इस्तेमाल, स्वाद ने बिगाड़ी आदत
डॉ. लक्षमण ने बताया कि लहसुन का प्रयोग पहले दवा के रूप में हुई। इसके खाने से जोड़ों का दर्द ठीक रहता है। पेट की अग्नि को प्रदिप्त करता है, जिससे खाना पचने में आसानी होती है। कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल में रखता है। इसके गुणों के कारण ही इसका प्रयोग सब्जी में मसाला के तौर पर किया जाने लगा, लेकिन किसी भी वस्तु का आवश्यकता से अधिक प्रयोग दुरुपयोग की श्रेणी आता है और जब किसी का दुरुपयोग होता है तो वह नुकसानदायक बन जाता है।
बोले जिम्मेदार
चाइनीज लहसुन बाजार में आ रहा है इसके बारे में जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हो रहा है तो दुकानों की जांच की जाएगी। बार्डर पर विशेष जांच की जाएगी। पकड़ में आने वालों पर कार्रवाई होगी।
चंद्रभानु पटेल, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी