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Siddharthnagar News: ठंड में ठिठुर रहे बच्चे, ड्रेस व स्वेटर बिना पढ़ाई
Wed, 11 Dec 2024 09:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 11 Dec 2024 09:43 AM IST
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भनवापुर। वर्तमान समय में सरकार के निर्देश पर बच्चों या उनके अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से पैसा भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद अधिकतर बच्चे बिना ऊनी कपड़े, जूता व ड्रेस के पढ़ते मिल रहे।
टेंडर के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को ड्रेस, जूता, मोजा, बैग व टाई उपलब्ध कराने की व्यवस्था बदलने के बाद भी बच्चे ड्रेस में नहीं मिल रहे हैं।
जिले में मौजूद लगभग 2.35 लाख्ा छात्र-छात्राओं में से लगभग 2.14 लाख छात्र-छात्राओं को डीबीटी के माध्यम से भेजा गया पैसा मिल गया हैं। जबकि अभी भी जिले के लगभग 20 हजार छात्र-छात्राओं को ऊनी कपड़े, जूता आैर ड्रेस के लिए पैसा नहीं मिल पाया हैं।
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ऐसे में बढ़ रही ठंड में छात्रों को ठिठुर कर पढ़ना पड़ रहा हैं। लेकिन इसकी सुधी न तो शिक्षा विभाग ले रहा हैं और न ही अभिभावक ही इसकी सुधी ले रहे हैं।
ऐसे में छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा हैं। जबकि मंगलवार को पड़ताल में पता चला किया मात्र 50 प्रतिशत छात्रों के पास ऊनी कपड़े, जूता व ड्रेस मिले हैं। जबकि अन्य छात्र घर के कपड़े में पढ़ते नजर आए।
शिक्षकों ने बताया कि अभिभावक के खाते में पैसा जाने से वह अन्य जरूरी सामानों को खरीद लेते हैं। इससे छात्रों को ऊनी कपड़े, जूता व ड्रेस से वंचित होना पड़ रहा हैं।
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टेंडर के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को ड्रेस, जूता, मोजा, बैग व टाई उपलब्ध कराने की व्यवस्था बदलने के बाद भी बच्चे ड्रेस में नहीं मिल रहे हैं।
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जिले में मौजूद लगभग 2.35 लाख्ा छात्र-छात्राओं में से लगभग 2.14 लाख छात्र-छात्राओं को डीबीटी के माध्यम से भेजा गया पैसा मिल गया हैं। जबकि अभी भी जिले के लगभग 20 हजार छात्र-छात्राओं को ऊनी कपड़े, जूता आैर ड्रेस के लिए पैसा नहीं मिल पाया हैं।
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ऐसे में बढ़ रही ठंड में छात्रों को ठिठुर कर पढ़ना पड़ रहा हैं। लेकिन इसकी सुधी न तो शिक्षा विभाग ले रहा हैं और न ही अभिभावक ही इसकी सुधी ले रहे हैं।
ऐसे में छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा हैं। जबकि मंगलवार को पड़ताल में पता चला किया मात्र 50 प्रतिशत छात्रों के पास ऊनी कपड़े, जूता व ड्रेस मिले हैं। जबकि अन्य छात्र घर के कपड़े में पढ़ते नजर आए।
शिक्षकों ने बताया कि अभिभावक के खाते में पैसा जाने से वह अन्य जरूरी सामानों को खरीद लेते हैं। इससे छात्रों को ऊनी कपड़े, जूता व ड्रेस से वंचित होना पड़ रहा हैं।