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उसका बाजार में अतिक्रमण पर चला बुलडोजर
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उसका बाजार में अतिक्रमण पर चला बुलडोजर
उसका बाजार। नगर पंचायत प्रशासन ने उच्च न्यायालय के निर्देश पर अशोक नगर वार्ड में सोमवार को काली मंदिर की जमीन से अवैध निर्माण हटवाया। इस दौरान एक पक्ष ने प्रशासन पर पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए विरोध किया। उच्च न्यायालय के निर्देश के कारण प्रशासन ने विरोध को दरकिनार कर अवैध निर्माण ध्वस्त करने के बाद ही मौके से हटा।
नगर पंचायत उसका के अशोक नगर वार्ड निवासी अधिवक्ता ओमप्रकाश त्रिपाठी ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर काली मंदिर की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की अपील की थी। इस जमीन पर श्रवण चौरसिया व घनश्याम चौरसिया की ओर से अतिक्रमण किया गया था। उच्च न्यायालय ने चार जनवरी 2019 को काली मंदिर की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया था लेकिन नगर पंचायत प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल की गई। उसमें बुधवार को अधिशासी अधिकारी को उपस्थित होकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। उसके बाद प्रशासन हरकत में आया और काली मंदिर की जमीन को श्रवण चौरसिया, घनश्याम चौरसिया व ओमप्रकाश त्रिपाठी के अतिक्रमण से खाली कराया। तहसीलदार राम ऋषि रमन ने राजस्व निरीक्षक सुरेश तिवारी, लेखपाल रामकरन गुप्ता, उमेश श्रीवास्तव, सुरेंद्र चौरसिया, गिरीश चंद्र मिश्रा आदि की मौजूदगी में अतिक्रमण हटवाया।
पक्षपात का लगाया आरोप
अधिवक्ता ओमप्रकाश त्रिपाठी, जगदीश त्रिपाठी व शिवप्रसाद त्रिपाठी ने नगर पंचायत प्रशासन पर आरोप लगाया कि जिस अतिक्रमण के लिए न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी, उसे नहीं हटाया गया, बल्कि उनकी ही जमीन पर बनी चहारदीवारी को ढहा दिया गया। बताया कि पूर्व के लेखपाल ने पक्के मकान को काली मंदिर की जमीन में बना बताया था, जबकि राजस्व टीम उसे छोड़ टीनशेड को गिरा कर कोरम पूरा कर लिया। यह न्याय संगत नहीं है। कहा कि वह उच्चाधिकारी व न्यायालय से इसकी शिकायत करेंगे।
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उच्च न्यायालय से अवमानना का नोटिस जारी होने के उपरांत एसडीएम सदर विकास कश्यप के निर्देश पर राजस्व टीम ने पैमाइश कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। पक्षपात का आरोप निराधार है, राजस्व टीम ने पैमाइश के दौरान अतिक्रमण की जिस जमीन को चिह्नित किया, उसे ही हटाया गया है। -जितेंद्र सिंह यादव, अधिशासी अधिकारी, उसका बाजार।
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उसका बाजार। नगर पंचायत प्रशासन ने उच्च न्यायालय के निर्देश पर अशोक नगर वार्ड में सोमवार को काली मंदिर की जमीन से अवैध निर्माण हटवाया। इस दौरान एक पक्ष ने प्रशासन पर पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए विरोध किया। उच्च न्यायालय के निर्देश के कारण प्रशासन ने विरोध को दरकिनार कर अवैध निर्माण ध्वस्त करने के बाद ही मौके से हटा।
नगर पंचायत उसका के अशोक नगर वार्ड निवासी अधिवक्ता ओमप्रकाश त्रिपाठी ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर काली मंदिर की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की अपील की थी। इस जमीन पर श्रवण चौरसिया व घनश्याम चौरसिया की ओर से अतिक्रमण किया गया था। उच्च न्यायालय ने चार जनवरी 2019 को काली मंदिर की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया था लेकिन नगर पंचायत प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल की गई। उसमें बुधवार को अधिशासी अधिकारी को उपस्थित होकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। उसके बाद प्रशासन हरकत में आया और काली मंदिर की जमीन को श्रवण चौरसिया, घनश्याम चौरसिया व ओमप्रकाश त्रिपाठी के अतिक्रमण से खाली कराया। तहसीलदार राम ऋषि रमन ने राजस्व निरीक्षक सुरेश तिवारी, लेखपाल रामकरन गुप्ता, उमेश श्रीवास्तव, सुरेंद्र चौरसिया, गिरीश चंद्र मिश्रा आदि की मौजूदगी में अतिक्रमण हटवाया।
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पक्षपात का लगाया आरोप
अधिवक्ता ओमप्रकाश त्रिपाठी, जगदीश त्रिपाठी व शिवप्रसाद त्रिपाठी ने नगर पंचायत प्रशासन पर आरोप लगाया कि जिस अतिक्रमण के लिए न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी, उसे नहीं हटाया गया, बल्कि उनकी ही जमीन पर बनी चहारदीवारी को ढहा दिया गया। बताया कि पूर्व के लेखपाल ने पक्के मकान को काली मंदिर की जमीन में बना बताया था, जबकि राजस्व टीम उसे छोड़ टीनशेड को गिरा कर कोरम पूरा कर लिया। यह न्याय संगत नहीं है। कहा कि वह उच्चाधिकारी व न्यायालय से इसकी शिकायत करेंगे।
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उच्च न्यायालय से अवमानना का नोटिस जारी होने के उपरांत एसडीएम सदर विकास कश्यप के निर्देश पर राजस्व टीम ने पैमाइश कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। पक्षपात का आरोप निराधार है, राजस्व टीम ने पैमाइश के दौरान अतिक्रमण की जिस जमीन को चिह्नित किया, उसे ही हटाया गया है। -जितेंद्र सिंह यादव, अधिशासी अधिकारी, उसका बाजार।