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Siddharthnagar News: बीमारों को ठीक करने के लिए लाए गए.. खुद बीमार पड़े हैं
Sat, 20 Jul 2024 02:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 20 Jul 2024 02:51 AM IST
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मेडिकल कालेज के कोरोना वार्ड में रखा गया वेंटिलेटर। संवाद
कोरोना काल में लाए गए 75 वेंटिलेटर में से इस वक्त 40 खराब पड़े हैं, आईसीयू वार्ड के न होने के कारण मरीज होते हैं रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर।
कोरोना काल में मरीजों का जीवन बचाने के लिए लाए गए वेंटिलेटर उपयोग के अभाव में खुद बीमार हो चुके हैं और कबाड़ जैसी हालत में रखे हैं। दूसरी तरफ आईसीयू की सुविधा न होने के कारण हर दिन मरीज दूसरे शहर रेफर कर दिए जाते हैं।
कोरोना काल में माधव प्रसाद त्रिपाठी कॉलेज तब यह जिला अस्पताल था के लिए 75 वेंटिलेटर आए थे। फिलहाल उनमें से 35 उपयोग में लाए जा रहे हैं, जबकि 40 कमरों में बंद रखे हैं। बताया जा रहा है कि वे 40 वेंटिलेटर खराब हो चुके हैं। इस्तेमाल करने से पहले उसे बनवाना पड़ेगा।
कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। इसका कारण अस्पतालों में पर्याप्त संसाधनों का अभाव था विशेष कर ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी। दोबारा ऐसी नौबत न आए इसके लिए सरकार ने हर अस्पताल में पीएम केयर फंड के जरिए वेंटिलेटर मशीन उपलब्ध कराने के साथ-साथ वार्ड आरक्षित करके उसके संचालन का निर्देश दिया था।
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तब जिला अस्पताल को कई बार में 75 वेंटिलेटर मशीनें मिलीं। इसके बाद जिला और महिला अस्पताल परिसर में बने ऑक्सीजन प्लांट के पास वेंटिलेटर युक्त वार्ड बनाया गया। कोरोना संक्रमण काल के बीच तीसरी और चौथी लहर तक आई। जब संक्रमण बढ़ा तो मॉकड्रिल करके मशीनों की स्थिति और उसके चलने के बारे में जानकारी लेकर मशीनों को दोबारा कमरे में बंद कर दिया जाता। मशीनों की हकीकत जानने के लिए एमसीएच विंग में पहुंचे तो वहां दो वार्ड में 20 से अधिक मशीनें बेड के साथ पड़ी हुई हैं। साफ-सफाई तो दिखी, लेकिन वेंटिलेटर िक्रयाशील हैं कि नहीं यह पता नहीं चला। इसके बाद पहुंचे ऑक्सीजन प्लांट के पास वार्ड में तो यहां भी मशीनें रखी मिलीं। इसके बारे में जिम्मेदारों से बात की गई तो पता चला कि पीआईसीयू और एसएनसीयू वार्ड सहित अन्य में 35 मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है। शेष 40 मशीनों को प्रयोग में लाने की प्रक्रिया चल रही है। उन्हें रिपेयरिंग की जरूरत है।
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सीएचसी पर क्रियाशील मिली मशीन
कोरोना काल में ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेंवा में तीन वेंटिलेटर का वार्ड बनाया गया था। यहां जानकारी ली गई तो पता चला कि जरूरतमंद मरीजों को भर्ती करके इलाज करने में प्रयोग किया जा रहा है।
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प्रयोग में नहीं आई मशीन और वार्ड
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठवल तिलौली में वेंटिलेटर वार्ड बना था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी राम निवास ने बताया कि उनकी ज्वाइनिंग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठवल में एक नवंबर को हुई थी। जब से हम यहां हैं तब से इसका उपयोग नहीं हुआ है। क्योंकि इस तरह के मरीज अभी तक नहीं आए। इसलिए इस मशीन का उपयोग नहीं हो सका। वेंटिलेटर मशीन जिस कमरे में लगी है। उस जगह साफ-सफाई दिखी। वेंटिलेटर मशीन वाले कमरे के सामने ऑक्सीजन का बाटला भी मौजूद था।
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आईसीयू वार्ड न होने के कारण रेफर हो रहे मरीज
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से ऐसे मरीज भी रेफर किए जाते हैं, जिनका इलाज संभव है। यहां के डॉक्टर उसे कर सकते हैं, लेकिन आईसीयू की सुविधा न होने के कारण इलाज करने में सक्षम होते हुए भी रेफर कर रहे हैं। अगर इसी वेंटिलेटर का उपयोग किया जाता है तो शायद हर 24 घंटे में हादसे के शिकार, हार्ट अटैक सहित अन्य प्रकार के सात आठ गंभीर मरीजों को रेफर होना पड़ा है। इससे जहां उन्हें लाने और लेकर जाने में जान खतरा बना रहता है। वहीं, आर्थिक क्षति और समय की बर्बादी भी होती है।
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मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर मशीन की देखरेख होती है। लगभग 35 मशीन उपयोग में लाई जा रही हैं। अन्य को क्रियाशील किया जाएगा। उन्हें मामूली मरम्मत की जरूरत है, जिससे कराकर जल्द ही प्रयोग किया जााएगा।
-डॉ. राजेश मोहन, प्राचार्य, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर।
कोरोना काल में मरीजों का जीवन बचाने के लिए लाए गए वेंटिलेटर उपयोग के अभाव में खुद बीमार हो चुके हैं और कबाड़ जैसी हालत में रखे हैं। दूसरी तरफ आईसीयू की सुविधा न होने के कारण हर दिन मरीज दूसरे शहर रेफर कर दिए जाते हैं।
कोरोना काल में माधव प्रसाद त्रिपाठी कॉलेज तब यह जिला अस्पताल था के लिए 75 वेंटिलेटर आए थे। फिलहाल उनमें से 35 उपयोग में लाए जा रहे हैं, जबकि 40 कमरों में बंद रखे हैं। बताया जा रहा है कि वे 40 वेंटिलेटर खराब हो चुके हैं। इस्तेमाल करने से पहले उसे बनवाना पड़ेगा।
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कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। इसका कारण अस्पतालों में पर्याप्त संसाधनों का अभाव था विशेष कर ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी। दोबारा ऐसी नौबत न आए इसके लिए सरकार ने हर अस्पताल में पीएम केयर फंड के जरिए वेंटिलेटर मशीन उपलब्ध कराने के साथ-साथ वार्ड आरक्षित करके उसके संचालन का निर्देश दिया था।
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तब जिला अस्पताल को कई बार में 75 वेंटिलेटर मशीनें मिलीं। इसके बाद जिला और महिला अस्पताल परिसर में बने ऑक्सीजन प्लांट के पास वेंटिलेटर युक्त वार्ड बनाया गया। कोरोना संक्रमण काल के बीच तीसरी और चौथी लहर तक आई। जब संक्रमण बढ़ा तो मॉकड्रिल करके मशीनों की स्थिति और उसके चलने के बारे में जानकारी लेकर मशीनों को दोबारा कमरे में बंद कर दिया जाता। मशीनों की हकीकत जानने के लिए एमसीएच विंग में पहुंचे तो वहां दो वार्ड में 20 से अधिक मशीनें बेड के साथ पड़ी हुई हैं। साफ-सफाई तो दिखी, लेकिन वेंटिलेटर िक्रयाशील हैं कि नहीं यह पता नहीं चला। इसके बाद पहुंचे ऑक्सीजन प्लांट के पास वार्ड में तो यहां भी मशीनें रखी मिलीं। इसके बारे में जिम्मेदारों से बात की गई तो पता चला कि पीआईसीयू और एसएनसीयू वार्ड सहित अन्य में 35 मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है। शेष 40 मशीनों को प्रयोग में लाने की प्रक्रिया चल रही है। उन्हें रिपेयरिंग की जरूरत है।
सीएचसी पर क्रियाशील मिली मशीन
कोरोना काल में ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेंवा में तीन वेंटिलेटर का वार्ड बनाया गया था। यहां जानकारी ली गई तो पता चला कि जरूरतमंद मरीजों को भर्ती करके इलाज करने में प्रयोग किया जा रहा है।
प्रयोग में नहीं आई मशीन और वार्ड
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठवल तिलौली में वेंटिलेटर वार्ड बना था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी राम निवास ने बताया कि उनकी ज्वाइनिंग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठवल में एक नवंबर को हुई थी। जब से हम यहां हैं तब से इसका उपयोग नहीं हुआ है। क्योंकि इस तरह के मरीज अभी तक नहीं आए। इसलिए इस मशीन का उपयोग नहीं हो सका। वेंटिलेटर मशीन जिस कमरे में लगी है। उस जगह साफ-सफाई दिखी। वेंटिलेटर मशीन वाले कमरे के सामने ऑक्सीजन का बाटला भी मौजूद था।
आईसीयू वार्ड न होने के कारण रेफर हो रहे मरीज
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से ऐसे मरीज भी रेफर किए जाते हैं, जिनका इलाज संभव है। यहां के डॉक्टर उसे कर सकते हैं, लेकिन आईसीयू की सुविधा न होने के कारण इलाज करने में सक्षम होते हुए भी रेफर कर रहे हैं। अगर इसी वेंटिलेटर का उपयोग किया जाता है तो शायद हर 24 घंटे में हादसे के शिकार, हार्ट अटैक सहित अन्य प्रकार के सात आठ गंभीर मरीजों को रेफर होना पड़ा है। इससे जहां उन्हें लाने और लेकर जाने में जान खतरा बना रहता है। वहीं, आर्थिक क्षति और समय की बर्बादी भी होती है।
मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर मशीन की देखरेख होती है। लगभग 35 मशीन उपयोग में लाई जा रही हैं। अन्य को क्रियाशील किया जाएगा। उन्हें मामूली मरम्मत की जरूरत है, जिससे कराकर जल्द ही प्रयोग किया जााएगा।
-डॉ. राजेश मोहन, प्राचार्य, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज