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Siddharthnagar News: बिस्कोहर की भूली विरासत को फिर मिलेगी नई पहचानी
Sat, 13 Jun 2026 12:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 13 Jun 2026 12:07 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिस्कोहर (सिद्धार्थनगर)। कभी 365 मंदिरों और 365 कुओं के लिए देश-विदेश में पहचान रखने वाला बिस्कोहर अब अपनी खोई हुई विरासत को फिर से पाने की ओर बढ़ रहा है। नगर पंचायत में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के मंदिरों व प्राचीन कुओं के संरक्षण और जीर्णोद्धार की तैयारी शुरू हो गई है। शुक्रवार को जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने इन धरोहरों का निरीक्षण कर विकास योजनाओं की समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि बिस्कोहर के 365 मंदिरों और कुओं का पुरातात्विक सर्वेक्षण पूरा कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद पर्यटन विभाग इनके संरक्षण, जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य कराएगा। जर्जर हो चुके मंदिरों और कुओं को नया स्वरूप देकर उन्हें धार्मिक और पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की योजना है।
जिलाधिकारी ने कहा कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल विरासत बचाने का कार्य नहीं बल्कि क्षेत्र की पहचान और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम भी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए।
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इतिहास में रहस्य भी : मंदिरों की स्थापना कब हुई, इसका स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ मंदिरों का निर्माण जमींदारों ने कराया था, जबकि कस्बे के पश्चिम स्थित एक प्राचीन मंदिर पर अलाउद्दीन खिलजी के नाम का उल्लेख मिलने की चर्चा भी प्रचलित है। यही कारण है कि बिस्कोहर की यह विरासत आस्था के साथ-साथ इतिहास और रहस्य का भी केंद्र मानी जाती है।
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बिस्कोहर (सिद्धार्थनगर)। कभी 365 मंदिरों और 365 कुओं के लिए देश-विदेश में पहचान रखने वाला बिस्कोहर अब अपनी खोई हुई विरासत को फिर से पाने की ओर बढ़ रहा है। नगर पंचायत में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के मंदिरों व प्राचीन कुओं के संरक्षण और जीर्णोद्धार की तैयारी शुरू हो गई है। शुक्रवार को जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने इन धरोहरों का निरीक्षण कर विकास योजनाओं की समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि बिस्कोहर के 365 मंदिरों और कुओं का पुरातात्विक सर्वेक्षण पूरा कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद पर्यटन विभाग इनके संरक्षण, जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य कराएगा। जर्जर हो चुके मंदिरों और कुओं को नया स्वरूप देकर उन्हें धार्मिक और पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की योजना है।
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जिलाधिकारी ने कहा कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल विरासत बचाने का कार्य नहीं बल्कि क्षेत्र की पहचान और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम भी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए।
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इतिहास में रहस्य भी : मंदिरों की स्थापना कब हुई, इसका स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ मंदिरों का निर्माण जमींदारों ने कराया था, जबकि कस्बे के पश्चिम स्थित एक प्राचीन मंदिर पर अलाउद्दीन खिलजी के नाम का उल्लेख मिलने की चर्चा भी प्रचलित है। यही कारण है कि बिस्कोहर की यह विरासत आस्था के साथ-साथ इतिहास और रहस्य का भी केंद्र मानी जाती है।