{"_id":"5fb6a6bd8ebc3e9bdf462dce","slug":"baudh-sangrahalay-organised-photo-pradarshni-siddharthnagar-news-gkp3737584115","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजकीय बौद्ध संग्रहालय ने लगाई ऑनलाइन छायाचित्र प्रदर्शनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजकीय बौद्ध संग्रहालय ने लगाई ऑनलाइन छायाचित्र प्रदर्शनी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजकीय बौद्ध संग्रहालय ने लगाई ऑनलाइन छायाचित्र प्रदर्शनी
विश्व धरोहर सप्ताह के तहत किया गया आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। विश्व धरोहर सप्ताह के अवसर पर राजकीय बौद्ध संग्रहालय पिपरहवा, सिद्धार्थनगर की ओर से बृहस्पतिवार को भारतीय कला में बुद्ध विषय पर ऑनलाइन छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में गांधार कला शैली पर आधारित बौद्ध कलाकृतियों को छायाचित्र के जरिए दिखाया गया।
वीथिका सहायक रामानंद प्रजापति ने बताया कि प्राचीन काल में भारतीय उपमहाद्वीप का कुछ क्षेत्र गांधार प्रदेश में सम्मिलित था। चीनी यात्री ह्वेनसांग के वर्णन में गांधार की सीमाएं उत्तर में पुष्पकलावती से लेकर स्वात व बुनेर की पहाड़ियों तक, पूर्व में सिंधु तक विस्तृत थीं। गांधार कला में प्रतिमा निर्माण के सात केंद्र, तक्षशिला, पुष्पकलावती, नगरहार, स्वातघाटी, कपिशा, बामियान और बैक्ट्रिया थे। इस कला के मूर्तिकार ईरानी एवं ग्रीको रोमन कला से परिचित थे। गांधार कला में बुद्ध प्रतिमा निर्माण में लहरदार बाल, भौहों के मध्य ऊर्णा का चिह्न प्रचलित था। इस शैली में बनाई गई कलाकृतियों जैसे बुद्ध और बोधिसत्व की प्रतिमाएं, जातक कथाएं और देवी-देवताओं की प्रतिमा का निर्माण बहुलता से किया गया। यह प्रदर्शनी इंटरनेट पर ऑनलाइन उपलब्ध है।
विज्ञापन
विश्व धरोहर सप्ताह के तहत किया गया आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। विश्व धरोहर सप्ताह के अवसर पर राजकीय बौद्ध संग्रहालय पिपरहवा, सिद्धार्थनगर की ओर से बृहस्पतिवार को भारतीय कला में बुद्ध विषय पर ऑनलाइन छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में गांधार कला शैली पर आधारित बौद्ध कलाकृतियों को छायाचित्र के जरिए दिखाया गया।
वीथिका सहायक रामानंद प्रजापति ने बताया कि प्राचीन काल में भारतीय उपमहाद्वीप का कुछ क्षेत्र गांधार प्रदेश में सम्मिलित था। चीनी यात्री ह्वेनसांग के वर्णन में गांधार की सीमाएं उत्तर में पुष्पकलावती से लेकर स्वात व बुनेर की पहाड़ियों तक, पूर्व में सिंधु तक विस्तृत थीं। गांधार कला में प्रतिमा निर्माण के सात केंद्र, तक्षशिला, पुष्पकलावती, नगरहार, स्वातघाटी, कपिशा, बामियान और बैक्ट्रिया थे। इस कला के मूर्तिकार ईरानी एवं ग्रीको रोमन कला से परिचित थे। गांधार कला में बुद्ध प्रतिमा निर्माण में लहरदार बाल, भौहों के मध्य ऊर्णा का चिह्न प्रचलित था। इस शैली में बनाई गई कलाकृतियों जैसे बुद्ध और बोधिसत्व की प्रतिमाएं, जातक कथाएं और देवी-देवताओं की प्रतिमा का निर्माण बहुलता से किया गया। यह प्रदर्शनी इंटरनेट पर ऑनलाइन उपलब्ध है।
विज्ञापन