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- पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी की जमानत याचिका निरस्त
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पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी की जमानत याचिका निरस्त
थर्ड अपर जिला जज निर्भय नारायण राय ने की जमानत याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी व पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद और सहयोगी अतहर फारुकी की अग्रिम जमानत याचिका थर्ड अपर जिला जज निर्भय नारायण राय ने खारिज कर दी है।
पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी व पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद की संस्था डॉक्टर जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट फर्रुखाबाद पर आरोप लगे थे कि दिव्यांगों को उपकरण नहीं दिए गए। कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सात लाख रुपये निकाल लिए गए। मामले में उसका थाने में लुईस खुर्शीद और उनके सहयोगी अतहर फारुकी पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। मामले में अग्रिम जमानत के लिए न्यायालय में उनके अधिवक्ता की तरफ से अर्जी पड़ी थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई थी। सुनवाई करते हुए थर्ड अपर जिला जज निर्भय नारायण राय ने दोनों लोगों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अभियोजन की तरफ से जमानत का विरोध करने वाले सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ईश्वर चंद दुबे ने न्यायालय को बताया कि अत्यंत गंभीर अपराध है। जनप्रतिनिधि होते हुए गरीब दिव्यांगों को उपकरण न उपलब्ध कराना बेहद ही निंदनीय है।
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थर्ड अपर जिला जज निर्भय नारायण राय ने की जमानत याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी व पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद और सहयोगी अतहर फारुकी की अग्रिम जमानत याचिका थर्ड अपर जिला जज निर्भय नारायण राय ने खारिज कर दी है।
पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी व पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद की संस्था डॉक्टर जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट फर्रुखाबाद पर आरोप लगे थे कि दिव्यांगों को उपकरण नहीं दिए गए। कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सात लाख रुपये निकाल लिए गए। मामले में उसका थाने में लुईस खुर्शीद और उनके सहयोगी अतहर फारुकी पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। मामले में अग्रिम जमानत के लिए न्यायालय में उनके अधिवक्ता की तरफ से अर्जी पड़ी थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई थी। सुनवाई करते हुए थर्ड अपर जिला जज निर्भय नारायण राय ने दोनों लोगों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अभियोजन की तरफ से जमानत का विरोध करने वाले सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ईश्वर चंद दुबे ने न्यायालय को बताया कि अत्यंत गंभीर अपराध है। जनप्रतिनिधि होते हुए गरीब दिव्यांगों को उपकरण न उपलब्ध कराना बेहद ही निंदनीय है।
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