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Siddharthnagar News: गिरफ्तारी न विवेचना हुई पूरी, कैसे मामले से उठे पर्दा

Tue, 21 Nov 2023 11:24 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Nov 2023 11:24 PM IST
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Arrest was not completed and investigation was not completed, how the curtain was raised from the case.
- अवैध रूप से संचालित होने वाले अस्पतालों में दम तोड़ चुके मरीजों के परिजनों को न्याय की दरकार
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- जिले में प्रसूताओं की मौत के मामले में केस दर्ज, आरोपियों की गिरफ्तारी तक नहीं

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से लोगों की जान जा रही है। वहीं, पुलिस की शिथिलता से जान लेने वाले खुला घूम रहे हैं। केस दर्ज होने के बाद न तो उनकी गिरफ्तारी की जा रही है और न ही विवेचना पूरी हुई है। मामला जिले के अवैध रूप से संचालित होने वाले अस्पतालों में दम तोड़ऩे वालों की है। जबकि विधि विशेषज्ञों की राय है कि संगीन मामलों में जल्द से जल्द विवेचना पूरी होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया जा रहा है तो अपराध करने वाले का सहयोग करना प्रतीत हो रहा है।

जिले में स्वास्थ्य पेशे को बीमार बनाने का खेल चल रहा है। अवैध रूप से अस्पताल खोलकर और बड़े-बड़े चिकित्सकों का बोर्ड लगाकर मरीजों को अच्छे इलाज करने का दावा करके फंसाया जा रहा है और रुपये लेने के साथ ही उनकी जान भी ली जा रही है। जब अस्पताल में किसी की मौत होती है और पीड़ित आगे आता है तो पता चलता है कि अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहा था। जबकि यह अस्पताल विभागीय शह पर चलते हैं। ऐसा स्वास्थ्य विभाग के लोगों का भी कहना है। अवैध रूप से संचालन के लिए बड़ी रकम मिलती है। जिले में पिछले चार माह में पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। सभी मामले में गैर इरादतन हत्या सहित अन्य आरोप में केस दर्ज हुआ है। लेकिन एक भी मामले में अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। जब गिरफ्तारी नहीं हुई है तो विवेचना कैसे पूरी होगी हो आप समझ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों की माने तो पहले गिरफ्तारी में खेल करके रोका जा रहा है। इसलिए विवेचना पूरी नहीं की जा रही है। कारण विवेचना पूरी करके चार्जशीट न्यायालय में दाखिल करते ही गिरफ्तारी पर सवाल उठेगा। इसलिए पुलिस गिरफ्तारी करने में टोल मटोल कर रही है। इसमें स्वास्थ्य विभाग की भी लापरवाही है। वह विवेचक का सहयोग नहीं कर कर रहे हैं। इसलिए कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है।
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पेट में छोड़ दिया कपड़ा, चली गई थी महिला की जान

उसका थाना क्षेत्र के उसका कस्बे में संचालित होने वाले नवजीवन हास्पिटल में 22 जुलाई को गौरा गांव निवासी मदीना (26) का पित्त का ऑपरेशन हुआ था। इस दौरान पेट में सूती कपड़ा छोड़ दिया गया। दिक्कत होने पर दूसरे अस्पताल में भर्ती करवाया गया, छह अगस्त को उसकी मौत हो गई। इस मामले में मृतका के पिता की तहरीर पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ। लेकिन अभी तक न तो गिरफ्तारी हुई और न ही विवेचना पूरी हुई है।
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प्रसूता और बच्चे की मौत पर दर्ज हुआ था केस

इटवा थाना क्षेत्र के कुनगाई गांव निवासी पंकज दुबे ने 18 जुलाई को पत्नी का ऑपरेशन करवाया था। इसमें प्रसूता और बच्चे की मौत हो गई थी। पीड़ित ने ऑपरेशन में लापरवाही करने का आरोप लगाया था। इस मामले में आरोपी महिला चिकित्सक पर गैरइरादतन हत्या सहित अन्य धारा में केस दर्ज हुआ था। लेकिन अभी तक न तो गिरफ्तारी हुई और न ही विवेचना पूरी हुई है।

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संचालिका की गिरफ्तारी नहीं

नगर के विकास भवन के सामने परसा शाह आलम में एक अवैध रूप से संचालित होने वाले अस्पताल में जबरन ऑपरेशन करने से बच्चे ने दम तोड़ दिया। इसके बाद मां की मौत हो गई। इस मामले में संचालिका का नाम प्रकाश में आने के बाद उसके और अज्ञात चिकित्सक और कर्मी पर गैर इरादतन हत्या सहित अन्य धारा में केस दर्ज हुआ। जांच चल रही है, अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। घटना 30 अक्तूबर को हुई थी।


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गिरफ्तारी और विवेचना में देरी, आरोपियों को किया जा रहा मजबूत

गैर इरादतन हत्या के मामले में तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए। इसके साथ ही विवेचना जल्द से जल्द पूरी करके चार्जशीट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। जिससे मुकदमें की जल्द सुनवाई हो सके। अगर अपराधी जेल में है तो 60 से 90 दिन के भीतर विवेचना पूरी हो जानी चाहिए। अगर बाहर है तो इसकी कोई सीमा निर्धारित नहीं है। लेकिन अपराध की गंभीरता पर विवेचना निर्धारित होती है। हत्या, गैर इरादतन हत्या, दुष्कर्म जैसे अपराध में 24 घंटे में विवेचना पूरी कर सकते हैं। गिरफ्तारी और विवेचना में देरी होना मतलब पुलिस खुद सहयोग कर रही है। ऐसे में आरोपी साक्ष्य को खत्म कर सकता है।

संजय कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ट अधिवक्ता क्राइम, जनपद न्यायालय सिद्धार्थनगर

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बोले जिम्मेदारी

जिन मामलों में केस दर्ज हुआ है, सभी मामलों में जांच चल रही है। पुलिस टीम जांच में लगी है। हर मामले में कार्रवाई की जाएगी।

अभिषेक अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक
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