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Siddharthnagar News: सिविवि प्रशासन को कक्षाओं के संचालन के बाद अब परीक्षा पर घेरने की तैयारी
Tue, 16 May 2023 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 16 May 2023 11:23 PM IST
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में प्री पीएचडी कोर्स वर्क में कक्षा संचालन के साथ परीक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं। कंप्यूटर की परीक्षा में अनुत्तीर्ण छात्र-छात्राएं अब विरोध की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि परीक्षा कराने से पहले पेपर मॉडरेट करने में अनियमितता हुई है, इसे ही वे मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय ने फिलहाल जांच कराने से इन्कार कर दिया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार छात्र-छात्राओं का आरोप गलत है। उन्हें परीक्षा से पहले शिकायत करनी चाहिए थी। इस मामले में छात्र-छात्राओं ने अब राज्यपाल से शिकायत करने के साथ न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की है। छात्र-छात्राओं ने कुलसचिव अमरेंद्र कुमार सिंह पर अभद्रता का भी आरोप लगाया है, जबकि कुलसचिव ने इसे निराधार बताया। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने नियमों के अंतर्गत परीक्षा कराई और परिणाम जारी किया है। अंजना त्रिपाठी, अली जान अली, बिंदू व अनुपम यादव ने कहा कि उनके साथ अन्याय हो रहा है, उनकी सुनवाई नहीं हुई तो न्यायालय से न्याय की शरण में जाएंगे। विद्यार्थियों ने कहा कि कंप्यूटर का पेपर अंग्रेजी भाषा में ही था, जबकि दो भाषाओं में होना चाहिए।
इन सवालों पर घेरने की तैयारी
छात्राओं ने परीक्षा के संबंध में नियमों के पालन के बारे में जांच की मांग करने की योजना बनाई है। पाठ्यक्रम सिमिति ने प्रश्न पत्र बनाने का प्रस्ताव एवं परीक्षकों के नाम प्रस्ताव देने और पेपर के मॉडरेशन में भाषा संबंधी सुझाव प्राप्त होने या नहीं होने से संबंधित विषयों पर शिकायत करने की योजना बनाई है।
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यह है मामला
शोध छात्र-छात्राओं का आरोप है कि प्री पीएचडी में सत्र 2021-2022 में हुई शोध प्रवेश परीक्षा में माध्यम से चयनित शोधार्थियों के लिए शोध कार्य प्रारंभ होने से पूर्व कंप्यूटर की कक्षाएं संचालित नहीं हुईं और इस विषय में 27 छात्र-छात्राएं फेल हो गए हैं। प्री पीएचडी कोर्स वर्क का एक अनिवार्य विषय कंप्यूटर भी है, जिसमें 60 नंबर का लिखित और 40 अंक की प्रायोगिक परीक्षा निर्धारित थी। विद्यार्थियों का अरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्री पीएचडी कोर्स वर्क के छात्र-छात्रों से अपनी कमी को छुपाने के लिए शपथपत्र ले लिया है कि पाठ्यक्रम पूरा हो गया है।
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विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार छात्र-छात्राओं का आरोप गलत है। उन्हें परीक्षा से पहले शिकायत करनी चाहिए थी। इस मामले में छात्र-छात्राओं ने अब राज्यपाल से शिकायत करने के साथ न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की है। छात्र-छात्राओं ने कुलसचिव अमरेंद्र कुमार सिंह पर अभद्रता का भी आरोप लगाया है, जबकि कुलसचिव ने इसे निराधार बताया। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने नियमों के अंतर्गत परीक्षा कराई और परिणाम जारी किया है। अंजना त्रिपाठी, अली जान अली, बिंदू व अनुपम यादव ने कहा कि उनके साथ अन्याय हो रहा है, उनकी सुनवाई नहीं हुई तो न्यायालय से न्याय की शरण में जाएंगे। विद्यार्थियों ने कहा कि कंप्यूटर का पेपर अंग्रेजी भाषा में ही था, जबकि दो भाषाओं में होना चाहिए।
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इन सवालों पर घेरने की तैयारी
छात्राओं ने परीक्षा के संबंध में नियमों के पालन के बारे में जांच की मांग करने की योजना बनाई है। पाठ्यक्रम सिमिति ने प्रश्न पत्र बनाने का प्रस्ताव एवं परीक्षकों के नाम प्रस्ताव देने और पेपर के मॉडरेशन में भाषा संबंधी सुझाव प्राप्त होने या नहीं होने से संबंधित विषयों पर शिकायत करने की योजना बनाई है।
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यह है मामला
शोध छात्र-छात्राओं का आरोप है कि प्री पीएचडी में सत्र 2021-2022 में हुई शोध प्रवेश परीक्षा में माध्यम से चयनित शोधार्थियों के लिए शोध कार्य प्रारंभ होने से पूर्व कंप्यूटर की कक्षाएं संचालित नहीं हुईं और इस विषय में 27 छात्र-छात्राएं फेल हो गए हैं। प्री पीएचडी कोर्स वर्क का एक अनिवार्य विषय कंप्यूटर भी है, जिसमें 60 नंबर का लिखित और 40 अंक की प्रायोगिक परीक्षा निर्धारित थी। विद्यार्थियों का अरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्री पीएचडी कोर्स वर्क के छात्र-छात्रों से अपनी कमी को छुपाने के लिए शपथपत्र ले लिया है कि पाठ्यक्रम पूरा हो गया है।