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Siddharthnagar News: अधिवक्ताओं लगाए तहसील प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप
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- शोहरतगढ़ में तहसील इकाई के बार एसोसिएशन की बैठक
संवाद न्यूज एजेंसी
शोहरतगढ़। स्थानीय तहसील इकाई के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दयासागर पाठक की अध्यक्षता में शनिवार को एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने बैठक की। इसमें तहसील प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए 13 मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में कहा गया कि बिना अवैध वसूली के तहसील के किसी पटल पर कार्य नहीं हो रहा है। असंक्रमणीय व सीलिंग पट्टीदारों के शासनादेश के बावजूद बिना पैसे के संक्रमणीय भूमिधर नहीं किया जा रहा है।
अध्यक्ष ने कहा कि पत्रावलियों में साक्ष्य पूरा होने पर कई महीनों तक आदेश नहीं किया जा रहा है। कानूनगो और तहसीलदार को खतौनी सही करने के लिए दिया जा रहा है। इसको लेकर अवैध वसूली की जा रही है। जिस मामले में पैसा नहीं मिल रहा है, उसको उलझा दिया जा रहा है।
तहसीलदार न्यायालय में नामांतरण पत्रावलियों में पैसे की वसूली की जा रही है। पैमाइश कराने के लिए काश्तकारों द्वारा फीस जमा करने के बाद वर्षों तक उनको तहसील का चक्कर लगवाया जाता है। वरासत के मामले में साक्ष्य पूर्ण होने पर भी आदेश नहीं किया जा रहा है। पुराने दस्तावेजों पर एक हजार रुपये की प्रतिवर्ष की मांग की जा रही है।
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एसडीएम के न्यायालय में शांतिभंग के मामले में जमानत एवं अन्य मामलों में फौजदारी बाबू व तहसीलदार के पेशकार द्वारा धन उगाही की जाती है। इस पर कोई लगाम नहीं है। इस दौरान महामंत्री बृजेश दत्त शुक्ल, अशोक उमर, गोपाल जी मिश्र, विशाल,अरविंद, प्रमोद, राजन श्रीवास्तव, शंभू विश्वकर्मा, विशाल श्रीवास्तव सहित आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शोहरतगढ़। स्थानीय तहसील इकाई के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दयासागर पाठक की अध्यक्षता में शनिवार को एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने बैठक की। इसमें तहसील प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए 13 मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में कहा गया कि बिना अवैध वसूली के तहसील के किसी पटल पर कार्य नहीं हो रहा है। असंक्रमणीय व सीलिंग पट्टीदारों के शासनादेश के बावजूद बिना पैसे के संक्रमणीय भूमिधर नहीं किया जा रहा है।
अध्यक्ष ने कहा कि पत्रावलियों में साक्ष्य पूरा होने पर कई महीनों तक आदेश नहीं किया जा रहा है। कानूनगो और तहसीलदार को खतौनी सही करने के लिए दिया जा रहा है। इसको लेकर अवैध वसूली की जा रही है। जिस मामले में पैसा नहीं मिल रहा है, उसको उलझा दिया जा रहा है।
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तहसीलदार न्यायालय में नामांतरण पत्रावलियों में पैसे की वसूली की जा रही है। पैमाइश कराने के लिए काश्तकारों द्वारा फीस जमा करने के बाद वर्षों तक उनको तहसील का चक्कर लगवाया जाता है। वरासत के मामले में साक्ष्य पूर्ण होने पर भी आदेश नहीं किया जा रहा है। पुराने दस्तावेजों पर एक हजार रुपये की प्रतिवर्ष की मांग की जा रही है।
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एसडीएम के न्यायालय में शांतिभंग के मामले में जमानत एवं अन्य मामलों में फौजदारी बाबू व तहसीलदार के पेशकार द्वारा धन उगाही की जाती है। इस पर कोई लगाम नहीं है। इस दौरान महामंत्री बृजेश दत्त शुक्ल, अशोक उमर, गोपाल जी मिश्र, विशाल,अरविंद, प्रमोद, राजन श्रीवास्तव, शंभू विश्वकर्मा, विशाल श्रीवास्तव सहित आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।