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Siddharthnagar News: इंस्टेंट लोप एप का संजाल, फंसकर युवा हो रहे कंगाल

Thu, 04 Jun 2026 01:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 04 Jun 2026 01:53 AM IST
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A web of instant loop apps is trapping young people into poverty.
सिद्धार्थनगर। जरूरत के समय तुरंत पैसा मिलना कभी बड़ी राहत माना जाता था, लेकिन अब यही सुविधा कई लोगों के लिए नई मुसीबत बनती जा रही है। मोबाइल पर मौजूद इंस्टेंट लोन एप कुछ ही मिनटों में कर्ज देने का दावा कर रहे हैं। आधार, पैन और बैंक खाते की जानकारी अपलोड करते ही पैसा खाते में पहुंच जा रहा है। आसान दिखने वाला यह कर्ज बाद में कई लोगों के लिए आर्थिक और मानसिक परेशानी का कारण बन रहा है। सिद्धार्थनगर के बड़ी संख्या में युवा ऐसे लोन कंगाल हो रहे हैं और उन्हें लोन लेने का पछतावा हो रहा है।
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डिजिटल लोन एप का नेटवर्क अब महानगरों से निकलकर छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच चुका है। जिले के नौकरी की तैयारी कर रहे युवा, छात्र, छोटे कारोबारी और सीमित आय वाले लोग अचानक जरूरत पड़ने पर इन एप का सहारा ले रहे हैं। कई बार लोग बिना नियम और शर्तें पढ़े ही लोन ले लेते हैं। बाद में उन्हें ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और जुर्माने की वास्तविक राशि का पता चलता है।
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साइबर विशेषज्ञ संजय शुक्ल बताते हैं कि कुछ एप छोटी अवधि के लिए लोन देते हैं, लेकिन देरी होने पर वसूली का दबाव तेजी से बढ़ जाता है। रिकवरी एजेंटों की लगातार कॉल, संदेश और भुगतान के लिए दबाव कई लोगों को मानसिक तनाव में डाल देता है। कुछ मामलों में लोगों ने सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और परिचितों तक संपर्क करने की शिकायतें भी की हैं।
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साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ दिलीप द्विवेदी का कहना है कि कई लोन एप इंस्टॉल करते समय मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो गैलरी और अन्य निजी जानकारी तक पहुंच मांगते हैं। उपयोगकर्ता बिना सोचे-समझे अनुमति दे देते हैं। बाद में यही जानकारी दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। हालांकि सभी डिजिटल लोन प्लेटफॉर्म ऐसे नहीं हैं, लेकिन बिना जांच-पड़ताल के किसी भी एप का उपयोग जोखिम बढ़ा सकता है।


सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी राजेश श्रीवास्तव के अनुसार सबसे बड़ी चिंता यह है कि आम लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि कौन-सा प्लेटफॉर्म वैध है और कौन नहीं। कई एप खुद को अधिकृत वित्तीय संस्था बताकर प्रचार करते हैं जबकि उनका संचालन किसी मान्यता प्राप्त वित्तीय इकाई के माध्यम से नहीं होता। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए जोखिम और बढ़ जाता है।गया।
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