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Siddharthnagar News: कर्बला के शहीदों की याद में आयोजित हुई मजलिस
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नगर बाजार मे तकरीर करते मौलाना मुनौव्वर-स्रोत आयोजक
नगर बाजार। नगर पंचायत नगर बाजार स्थित मदरसा प्रांगण में चल रहे दस रोजा कार्यक्रम के आठवें दिन शनिवार को कर्बला के शहीदों की याद में अकीदतमंदों की बड़ी संख्या में मजलिस आयोजित की गई। मजलिस में मौलाना मुनव्वर ने कर्बला की दर्दनाक घटना और इमाम हुसैन व उनके परिवार की कुर्बानियों पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि कर्बला की सरजमीं पर दी गई शहादत इंसानियत, सब्र, त्याग और हक के लिए संघर्ष का सबसे बड़ा पैगाम है।
मौलाना मुनव्वर ने अपने बयान में हजरत अली अकबर की बहादुरी, हज़रत अली असगर की मासूम शहादत और इमाम हुसैन के अटूट धैर्य व बलिदान का भावुक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन और उनके साथियों ने दीन-ए-इस्लाम और इंसानियत की रक्षा के लिए अपने परिवार सहित कुर्बानी देकर पूरी दुनिया को सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर चलने की सीख दी। मजलिस के दौरान कर्बला के वाकये को सुनकर उपस्थित अकीदतमंद गमगीन हो उठे और पूरे माहौल में गम का माहौल छा गया।
उन्होंने कहा कि मुहर्रम केवल मातम का महीना नहीं बल्कि त्याग, धैर्य, भाईचारे और इंसानियत की रक्षा का संदेश देने वाला पवित्र समय है। कर्बला की कुर्बानी आज भी लोगों को अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देती है। मजलिस के बाद लोगों ने शहीद-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया और मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं।
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इस अवसर पर कारी नूर आलम, हाफिज गुलाम सरवर, मौलाना फैज मोहम्मद, इम्तियाज अहमद, नियाज अहमद, फिरोज अहमद, वसीम, कलीम, अतीक, हसन अली, शम्सुल हुदा नूरानी, कमरुल हुदा, अहमद, इकबाल अहमद, फरीद खान, कलीमुल्ला, शाहबाज आदि मौजूद रहे।
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मौलाना मुनव्वर ने अपने बयान में हजरत अली अकबर की बहादुरी, हज़रत अली असगर की मासूम शहादत और इमाम हुसैन के अटूट धैर्य व बलिदान का भावुक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन और उनके साथियों ने दीन-ए-इस्लाम और इंसानियत की रक्षा के लिए अपने परिवार सहित कुर्बानी देकर पूरी दुनिया को सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर चलने की सीख दी। मजलिस के दौरान कर्बला के वाकये को सुनकर उपस्थित अकीदतमंद गमगीन हो उठे और पूरे माहौल में गम का माहौल छा गया।
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उन्होंने कहा कि मुहर्रम केवल मातम का महीना नहीं बल्कि त्याग, धैर्य, भाईचारे और इंसानियत की रक्षा का संदेश देने वाला पवित्र समय है। कर्बला की कुर्बानी आज भी लोगों को अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देती है। मजलिस के बाद लोगों ने शहीद-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया और मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं।
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इस अवसर पर कारी नूर आलम, हाफिज गुलाम सरवर, मौलाना फैज मोहम्मद, इम्तियाज अहमद, नियाज अहमद, फिरोज अहमद, वसीम, कलीम, अतीक, हसन अली, शम्सुल हुदा नूरानी, कमरुल हुदा, अहमद, इकबाल अहमद, फरीद खान, कलीमुल्ला, शाहबाज आदि मौजूद रहे।