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Siddharthnagar News: भगवान के स्मरण से ही भवपार करता है प्राणी
Sat, 08 Mar 2025 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 08 Mar 2025 12:51 AM IST
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बिस्कोहर। कस्बे के पं. दीनदयाल नगर उत्तर यादव डीह पर आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बृहस्पतिवार की रात कथा व्यास पं. सुरेश मणि त्रिपाठी ने ध्रुव चरित्र व शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मनुष्य जीवन बार-बार नहीं मिलता है। इसलिए कलयुग में दया धर्म, भगवान के स्मरण से ही सारी योनियों को भवपार करता है। मनुष्य जीवन का महत्व समझाते हुए कहा कि भगवान की भक्ति में अधिक से अधिक समय देना चाहिए। कथा श्रवण करने से जन्म जन्मांतर का पाप कट जाता है। जीवन में विश्वास के साथ किए गए कार्य में सफलता निश्चित तौर पर मिलती है। शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि यह विवाह एक पवित्र संस्कार है। लेकिन आधुनिक समय में प्राणी संस्कारों से दूर भाग रहा है। आत्मा के बिना शरीर निरर्थक होता है। ऐसे ही संस्कारों के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं होता। भक्ति में दिखावा नहीं होनी चाहिए। जब सती के विरह में भगवान शंकर की दशा दयनीय हो गई तो सती ने भी संकल्प के अनुसार राजा हिमाचल के घर पर्वतराज की पुत्री होने पर पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती जब बड़ी हुईं तो हिमाचल को उनकी शादी की चिंता सताने लगी। एक दिन देवर्षि नारद हिमाचल के महल पहुंचे और पार्वती को देखकर उन्हें भगवान शिव के योग्य बताया। कठिन तपस्या के बाद भगवान शिव का विवाह पार्वती के साथ हुआ।
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