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समिति करेगी चीन और भारत के कब्जे का निरीक्षण
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नेपाल में सीमा समिति की गठन निर्णय की जानकारी देते हुए मंत्री वासकोटा
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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समिति करेगी चीन और भारत के कब्जे का निरीक्षण
तीन महीने के अंदर नेपाल सरकार को सौंपेगी रिपोर्ट
भारत और चीन के कब्जे से परेशान नेपाल ने लिया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर (कपिलवस्तु)। नेपाल की सीमा पर भारत और चीन के कब्जे से परेशान नेपाल ने अपनी सीमाओं के निरीक्षण के लिए समिति के गठन का निर्णय लिया है। तीन महीने के अंदर समिति भारत और चीन सीमा का निरीक्षण कर इसकी रिपोर्ट नेपाल सरकार को देगी। साथ ही नेपाल सरकार इसकी रिपोर्ट भारत और चीन को सौंपेगी। यह जानकारी नेपाल सरकार के प्रवक्ता एवं संचार तथा सूचना प्रविधि मंत्री गोकुल वासकोटा ने दी।
उन्होंने बताया कि नेपाल सरकार ने समिति का गठन इसलिए किया है कि वह भारत और चीन सीमा पर अतिक्रमण की जानकारी ले। कमेटी में गृह भूमि सुधार मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बताया कि मौसम अनुकूल होते ही सीमा पर समिति जाएगी। इसके बाद इसकी रिपोर्ट नेपाल सरकार को सौंपेगी। बता दें कि चीन की विस्तारवादी नीतियों से नेपाल जैसे उसके मित्र देश भी काफी परेशान हैं। नेपाल में चीनी दखल और उसकी विस्तारवादी नीति का बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है। प्रदर्शनकारी चीन वापस जाओ के नारे लगाते हुए नेपाल की हड़पी 36 हेक्टेयर जमीन वापस करने की मांग पर अड़े हैं। नेपाल के नागरिकों का कहना है कि हामला जिले में भागदारे नदी के पास करीब छह हेक्टेयर जमीन, करनाली जिले में चार हेक्टेयर जमीन पर चीन ने कब्जा कर रखा है। इसे चीन अब तिब्बत का हिस्सा बता रहा है। इसी तरह संजेन नदी और जाम्भू खोला में छह हेक्टेयर नेपाली जमीन को भी दक्षिण तिब्बत में दिखाया गया है। वहीं, भारत सरकार की ओर से जारी नए नक्शे में उत्तराखंड के कालापानी और लिपुलेख को भारतीय क्षेत्र में दर्शाए जाने को लेकर नेपाल में विरोध हो रहा है। नेपाली नागरिकों का कहना है कि लिपुलेख और कालापानी धारचूला जिले के हिस्से हैं।
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तीन महीने के अंदर नेपाल सरकार को सौंपेगी रिपोर्ट
भारत और चीन के कब्जे से परेशान नेपाल ने लिया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर (कपिलवस्तु)। नेपाल की सीमा पर भारत और चीन के कब्जे से परेशान नेपाल ने अपनी सीमाओं के निरीक्षण के लिए समिति के गठन का निर्णय लिया है। तीन महीने के अंदर समिति भारत और चीन सीमा का निरीक्षण कर इसकी रिपोर्ट नेपाल सरकार को देगी। साथ ही नेपाल सरकार इसकी रिपोर्ट भारत और चीन को सौंपेगी। यह जानकारी नेपाल सरकार के प्रवक्ता एवं संचार तथा सूचना प्रविधि मंत्री गोकुल वासकोटा ने दी।
उन्होंने बताया कि नेपाल सरकार ने समिति का गठन इसलिए किया है कि वह भारत और चीन सीमा पर अतिक्रमण की जानकारी ले। कमेटी में गृह भूमि सुधार मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बताया कि मौसम अनुकूल होते ही सीमा पर समिति जाएगी। इसके बाद इसकी रिपोर्ट नेपाल सरकार को सौंपेगी। बता दें कि चीन की विस्तारवादी नीतियों से नेपाल जैसे उसके मित्र देश भी काफी परेशान हैं। नेपाल में चीनी दखल और उसकी विस्तारवादी नीति का बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है। प्रदर्शनकारी चीन वापस जाओ के नारे लगाते हुए नेपाल की हड़पी 36 हेक्टेयर जमीन वापस करने की मांग पर अड़े हैं। नेपाल के नागरिकों का कहना है कि हामला जिले में भागदारे नदी के पास करीब छह हेक्टेयर जमीन, करनाली जिले में चार हेक्टेयर जमीन पर चीन ने कब्जा कर रखा है। इसे चीन अब तिब्बत का हिस्सा बता रहा है। इसी तरह संजेन नदी और जाम्भू खोला में छह हेक्टेयर नेपाली जमीन को भी दक्षिण तिब्बत में दिखाया गया है। वहीं, भारत सरकार की ओर से जारी नए नक्शे में उत्तराखंड के कालापानी और लिपुलेख को भारतीय क्षेत्र में दर्शाए जाने को लेकर नेपाल में विरोध हो रहा है। नेपाली नागरिकों का कहना है कि लिपुलेख और कालापानी धारचूला जिले के हिस्से हैं।
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