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नहीं थम रहा जापानी इंसेफेलाइटिस का कहर
Siddhartha nagar
Updated Sun, 29 Jul 2012 12:00 PM IST
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सिद्धार्थनगर। जापानी इंसेफेलाइटिस का कहर नहीं थम रहा है। इस बीमारी से अब तक 11 मौत के बाद भी स्वास्थ्य महकमा संजीदा नहीं हो सका है। यहां से पीड़ित बच्चों को रेफर कर दिया जा रहा है। इलाज के नाम महज खानापूर्ति हो रही है। मरीजों के परिजन सहमे हैं। यहां महज एक वार्ड बन गया, लेकिन संसाधन के मामले में यह फिसड्डी है।
इंसेफेलाइटिस से निपटने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन हालत ज्याें के त्यों बने हैं। जिला अस्पताल में 17 जुलाई से छह मरीज इलाज के लिए भर्ती हुए। 17 जुलाई को रीता (15) पुत्री द्वारिका निवासी दुलहा जुनेबी भर्ती हुई। इसका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा था। उसे बाद में गोरखपुर मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया। 25 जुलाई को नावेद (7) पुत्र समीउल्लाह निवासी को भर्ती कराया गया। उसे भी गोरखपुर मेडिकल कालेज रेफर किया गया। 23 जुलाई को अखिलेश (2) पुत्र विजय बहादुर, 25 जुलाई को साइना खातून (4) पुत्री गुलाम हुसैन, 26 जुलाई को सूर्यमती (12) पुत्री कल्लू को भर्ती कराया गया। इनका इलाज यहां चल रहा है।
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो चार माह के भीतर 11 पीड़ित बच्चे दम तोड़ चुके हैं। 47 बच्चे इससे पीड़ित हैं। इन 47 मरीजों में से 44 को गोरखपुर मेडिकल कालेज के लिए रेफर किया जा चुका है। इस वर्ष इस बीमारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य महकमा पहले से तैयारी करने की बात कह रहा था। टीकाकरण अभियान भी चलाने का दावा हुआ, लेकिन पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ने से सारे दावे हवा हवाई हो गए।
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इस संबंध में सीएमओ डा. किरन श्रीवास्तव का कहना है कि विभाग पूरी तरह से इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी से निपटने के लिए तैयार है। मरीजों का इलाज किया जाता है। जिनकी स्थिति गंभीर होती है, उन्हें ही रेफर किया जाता है।
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इंसेफेलाइटिस से निपटने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन हालत ज्याें के त्यों बने हैं। जिला अस्पताल में 17 जुलाई से छह मरीज इलाज के लिए भर्ती हुए। 17 जुलाई को रीता (15) पुत्री द्वारिका निवासी दुलहा जुनेबी भर्ती हुई। इसका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा था। उसे बाद में गोरखपुर मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया। 25 जुलाई को नावेद (7) पुत्र समीउल्लाह निवासी को भर्ती कराया गया। उसे भी गोरखपुर मेडिकल कालेज रेफर किया गया। 23 जुलाई को अखिलेश (2) पुत्र विजय बहादुर, 25 जुलाई को साइना खातून (4) पुत्री गुलाम हुसैन, 26 जुलाई को सूर्यमती (12) पुत्री कल्लू को भर्ती कराया गया। इनका इलाज यहां चल रहा है।
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विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो चार माह के भीतर 11 पीड़ित बच्चे दम तोड़ चुके हैं। 47 बच्चे इससे पीड़ित हैं। इन 47 मरीजों में से 44 को गोरखपुर मेडिकल कालेज के लिए रेफर किया जा चुका है। इस वर्ष इस बीमारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य महकमा पहले से तैयारी करने की बात कह रहा था। टीकाकरण अभियान भी चलाने का दावा हुआ, लेकिन पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ने से सारे दावे हवा हवाई हो गए।
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इस संबंध में सीएमओ डा. किरन श्रीवास्तव का कहना है कि विभाग पूरी तरह से इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी से निपटने के लिए तैयार है। मरीजों का इलाज किया जाता है। जिनकी स्थिति गंभीर होती है, उन्हें ही रेफर किया जाता है।