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Siddharthnagar News: 73 कोचिंग सेंटर पंजीकृत, फायर एनओसी किसी के पास नहीं
Wed, 24 Jun 2026 12:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 24 Jun 2026 12:30 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित तीन मंजिला इमारत में आग लगने से 15 छात्रों की जिंदा जलकर मौत गई। वहीं जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगाने वाले नौ छात्र गंभीर रूप से घायल हैं। आपात स्थिति में बिल्डिंग से बाहर निकलने के इंतजाम भी नाकाफी पाए गए।
जिले में चल रहे कोचिंग संस्थानों में कमोबेश यही हालात हैं। बेसमेंट में खिड़की की व्यवस्था नहीं है। वहीं, दूसरी-तीसरी मंजिल से आपात स्थिति में उतरने के भी इंतजाम नदारद हैं। अगर यहां भी लखनऊ जैसी आग लगी तो बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
लखनऊ में हुई दिल दहला देने वाली अग्निकांड और जनहानि को देखते हुए जिले में संचालित कोचिंग और शिक्षण संस्थानों की पड़ताल की गई तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में 73 कोचिंग सेंटर और डिजिटल लाइब्रेरी पंजीकृत है। कहीं दूसरी या तीसरी मंजिल तो कहीं बेसमेंट और संकरी गलियों में इनका धड़ल्ले से संचालन किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि एक भी कोचिंग सेंटर के संचालक या बिल्डिंग के मालिक ने अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं ली गई है। ऐसे में कोचिंग सेंटर की सुविधा, आपात स्थिति में बाहर निकलने की व्यवस्था और आग लगने पर बचाव के इंतजाम की पड़ताल के बाद ही वहां अपने बच्चों को पढ़ाई कराने की सोचें।
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सिद्धार्थनगर। राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित तीन मंजिला इमारत में आग लगने से 15 छात्रों की जिंदा जलकर मौत गई। वहीं जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगाने वाले नौ छात्र गंभीर रूप से घायल हैं। आपात स्थिति में बिल्डिंग से बाहर निकलने के इंतजाम भी नाकाफी पाए गए।
जिले में चल रहे कोचिंग संस्थानों में कमोबेश यही हालात हैं। बेसमेंट में खिड़की की व्यवस्था नहीं है। वहीं, दूसरी-तीसरी मंजिल से आपात स्थिति में उतरने के भी इंतजाम नदारद हैं। अगर यहां भी लखनऊ जैसी आग लगी तो बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
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लखनऊ में हुई दिल दहला देने वाली अग्निकांड और जनहानि को देखते हुए जिले में संचालित कोचिंग और शिक्षण संस्थानों की पड़ताल की गई तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में 73 कोचिंग सेंटर और डिजिटल लाइब्रेरी पंजीकृत है। कहीं दूसरी या तीसरी मंजिल तो कहीं बेसमेंट और संकरी गलियों में इनका धड़ल्ले से संचालन किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि एक भी कोचिंग सेंटर के संचालक या बिल्डिंग के मालिक ने अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं ली गई है। ऐसे में कोचिंग सेंटर की सुविधा, आपात स्थिति में बाहर निकलने की व्यवस्था और आग लगने पर बचाव के इंतजाम की पड़ताल के बाद ही वहां अपने बच्चों को पढ़ाई कराने की सोचें।
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