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छह हजार को ही मिल सका किसान बीमा का लाभ

Thu, 27 Dec 2018 10:39 PM IST
siddharthnagar Published by: राकेश पांडेय Updated Thu, 27 Dec 2018 10:39 PM IST
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only 6000 found profit of kisan bima
सिद्धार्थनगर। जिले में 70 हजार केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड ) धारकों में से सिर्फ छह हजार किसानों को ही किसान बीमा का लाभ मिला है। यह हाल तब है जब 59 किसानों के खाते में से फसल क्षति पूर्ति के नाम पर धान के सीजन में 1200 रुपये प्रति हेक्टेयर और गेंहू की फसल पर 1000 रुपये हेक्टेयर काटा जाता है। वहीं क्षतिपूर्ति की जब बात आती है तो कंपनी अपने हाथ खड़े कर देती है। वहीं कृषि विभाग अपनी भूमिका सिर्फ देने तक ही सीमित होने की बात कहता है। यह हाल तब है जब जिला बाढ़ प्रभावित है। आंकड़ों पर गौर करें तो करीब तीन लाख किसान पिछले साल प्रभावित हुए थे।
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बांसी तहसील के बंसतपुर गांव निवासी किसान कमल तिवारी ने बताया कि खेती करने के लिए बैंक से केसीसी पर कर्ज लिया हैं। नियमित लेनदेन भी होता है। हर वर्ष बीमा राशि भी खाते से कटती है। बीते वर्ष बाढ़ से फसल नष्ट हो गई। लाखों की क्षति भी हुई। नुकसान के बारे में राजस्व विभाग ने रिपोर्ट भेज दी, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला।
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वहीं भनवापुर ब्लॉक कठौतिया गांव निवासी किसान सत्यप्रकाश पांडेय ने बताया कि गांव राप्ती के किनारे हैं। यहां बाढ़ हर वर्ष पर तबाही मचाती है। सिकटा एसबीआई की शाखा में बीमा राशि के नाम खाते से किस्त भी कटती है, मगर पिछले वर्ष बाढ़ से नुकसान हुई फसल का मुआवजा नहीं मिला। भनवापुर ब्लॉक के कठौतिया गांव निवासी किसान सूर्य प्रकाश पांडेय किस्त कटने के बाद भी जब मुआवजा देने की बात आई तो सुध ही नहीं ली गई। जबकि पूरा फसल बाढ़ से नष्ट हो गई थी और कई बार मुआवजे के लिए दौड़ लगाया जा चुका है।
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किसान चंद्रप्रकाश पांडेय ने बताया कि ब्लॉक व गांव में आयोजित होने वाले कृषि मेले में फसल बीमा कराने के लिए बार- बार किसानों से आग्रह किया जाता है। किसान क्रेडिट कार्ड भी बनवाया गया है। बीमे की किस्त भी कटती है। लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला। कुछ ऐसा ही हाल किसान गंगोत्री, आशाराम, अब्दुल रहमान ने भी बताया।


विभाग की नजर में सिर्फ छह हजार है पीड़ित
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2017 में हुई फसल क्षतिपूर्ति के लिए अब तक छह हजार किसानों 13 करोड़ की राशि बतौर मुआवजा दी गई। वहीं जिले की बात करें तो यहां पर हर साल बाढ़ तबाही मचाती है। साथ ही आग से भी फसल नष्ट होती है। जिले के उसका, जोगिया, शोहरतगढ़, बढ़नी, भनवापुर, लोटन आदि क्षेत्र सबसे अधिक बाढ़ से प्रभावित रहते है।


इन आपदाओं में मिलता है बीमा का लाभ
बीमा कंपनी की ओर फसल बीमा योजना के तहत किसानों प्राकृतिक आपदा। जैसे बाढ़, तूफान, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि आदि आपदा में फसल नष्ट होने के बाद किसानों को बीमा कंपनी द्वारा मुआवजा दिया जाता है। इसका लाभ लेेने के लिए किसान केसीसी धारक होना चाहिए और उसके खाते से इसके एवज में उनके किस्त काटी गई हो।


अधिकारी बोले
जिला कृषि अधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि फसल क्षति पूर्ति की राशि बीमा कंपनी की ओर से दी जाती है। विभाग केवल नुकसान का रिपोर्ट लगाता है। जिनको बीमा का लाभ नहीं मिला है। वह क्लेम कर सकता है। उसे बीमा का लाभ दिलाया जाएगा।
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