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मनरेगा से पर्यावरण सुधार की कवायद, 6834 बनेंगे कंपोस्ट पिट
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मनरेगा से पर्यावरण सुधार की कवायद, 6834 बनेंगे कंपोस्ट पिट
1139 ग्राम पंचायतों में पांच निजी और एक सामुदायिक पिट बनेगा
फसल अवशेष प्रबंधन के साथ कंपोस्ट खाद भी किया जाएगा तैयार
संतोष श्रीवास्तव
सिद्धार्थनगर। कई घटनाओं में किसान की ओर से धान की पराली या अन्य फसल अवशेष खेतों में एक जगह एकत्र किया जा रहा है। उसके निस्तारण की सुविधा न उपलब्ध होने से उसमें आग लगाई जा रही है। फसल अवशेष जलाए जाने की घटनाओं को शासन ने गंभीरता से लिया है। अब मनरेगा के तहत प्रदेश के साथ ही जिले में भी 1139 ग्राम पंचायतों में 6834 कंपोस्ट पिट बनाए जाएंगे। इसमें पांच व्यक्तिगत और एक सामुदायिक पिट होगा।
धान की पराली को एकत्र कराकर गोशालाओं में पहुंचाने के निर्देश पहले ही आ चुके हैं। इसके अलावा धान की पराली इन-सिटू प्रबंधन कर कृषक के खेत में तथा सामुदायिक तौर पर कंपोस्ट बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। ऐसे में शासन ने किसान के खेत में अथवा सामुदायिक स्थलों पर उचित क्षमता वाले कंपोस्ट खाद के गड्ढे की खुदाई कराये जाने का निर्णय लिया है। कंपोस्ट खाद के गड्ढे की खुदाई, पराली, नरई, पताई को उखाड़ने, उसको उठाकर लाने और गड्ढे में डालने के साथ ही अन्य सामग्री मद का वहन शत-प्रतिशत मनरेगा से किया जाएगा। पीलीभीत जनपद के अभिनव प्रयोग को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में लागू करने का निर्णय लिया गया। अपर मुख्य सचिव कृषि डॉ. देवेश चतुर्वेदी के पत्र का अनुपालन करने के लिए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया है। उपायुक्त श्रम रोजगार संजय शर्मा ने बताया कि जिले की 1139 ग्राम पंचायतों में पांच-पांच व्यक्तिगत, एक-एक सामुदायिक कंपोस्ट पिट बनाने की कार्ययोजना पर अमल शुरू कर दिया गया है। सामुदायिक परियोजनाओं में ट्रैक्टर ट्राली से पराली, नरई, पताई के ढुलान का व्यय राज्य वित्त एवं 14वां वित्त की धनराशि से अभिसरित करते हुए मनरेगा योजना से किया जाएगा। संवाद
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1139 ग्राम पंचायतों में पांच निजी और एक सामुदायिक पिट बनेगा
फसल अवशेष प्रबंधन के साथ कंपोस्ट खाद भी किया जाएगा तैयार
संतोष श्रीवास्तव
सिद्धार्थनगर। कई घटनाओं में किसान की ओर से धान की पराली या अन्य फसल अवशेष खेतों में एक जगह एकत्र किया जा रहा है। उसके निस्तारण की सुविधा न उपलब्ध होने से उसमें आग लगाई जा रही है। फसल अवशेष जलाए जाने की घटनाओं को शासन ने गंभीरता से लिया है। अब मनरेगा के तहत प्रदेश के साथ ही जिले में भी 1139 ग्राम पंचायतों में 6834 कंपोस्ट पिट बनाए जाएंगे। इसमें पांच व्यक्तिगत और एक सामुदायिक पिट होगा।
धान की पराली को एकत्र कराकर गोशालाओं में पहुंचाने के निर्देश पहले ही आ चुके हैं। इसके अलावा धान की पराली इन-सिटू प्रबंधन कर कृषक के खेत में तथा सामुदायिक तौर पर कंपोस्ट बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। ऐसे में शासन ने किसान के खेत में अथवा सामुदायिक स्थलों पर उचित क्षमता वाले कंपोस्ट खाद के गड्ढे की खुदाई कराये जाने का निर्णय लिया है। कंपोस्ट खाद के गड्ढे की खुदाई, पराली, नरई, पताई को उखाड़ने, उसको उठाकर लाने और गड्ढे में डालने के साथ ही अन्य सामग्री मद का वहन शत-प्रतिशत मनरेगा से किया जाएगा। पीलीभीत जनपद के अभिनव प्रयोग को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में लागू करने का निर्णय लिया गया। अपर मुख्य सचिव कृषि डॉ. देवेश चतुर्वेदी के पत्र का अनुपालन करने के लिए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया है। उपायुक्त श्रम रोजगार संजय शर्मा ने बताया कि जिले की 1139 ग्राम पंचायतों में पांच-पांच व्यक्तिगत, एक-एक सामुदायिक कंपोस्ट पिट बनाने की कार्ययोजना पर अमल शुरू कर दिया गया है। सामुदायिक परियोजनाओं में ट्रैक्टर ट्राली से पराली, नरई, पताई के ढुलान का व्यय राज्य वित्त एवं 14वां वित्त की धनराशि से अभिसरित करते हुए मनरेगा योजना से किया जाएगा। संवाद
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