{"_id":"595925eb4f1c1b8e548b4883","slug":"51499014635-siddharthnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शराब तस्करों के लिए मुफीद साबित हो रही सीमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शराब तस्करों के लिए मुफीद साबित हो रही सीमा
Updated Sun, 02 Jul 2017 10:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
परसा (सिद्धार्थनगर)। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में नेपाली शराब की तस्करी जोरों पर है। खुली सीमा का लाभ उठाकर तस्कर धंधे में लगे हुए हैं। विभाग की कोशिशों के बावजूद तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा। इससे एक ओर जहां राजस्व की क्षति हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ आसानी से शराब उपलब्ध होने से युवाओं में नशे की लत बढ़ रही है।
ढेबरुआ और शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र का यह इलाका पहले से ही तस्करी को लेकर संवेदनशील रहा है। तस्करी का यह सिलसिला सरकारों के बदलने के बाद भी नहीं थमा है। यह हाल तब है, जब प्रदेश के आबकारी व मद्य निषेध मंत्री जयप्रताप सिंह इसी जिले से विधायक हैं। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के साथ-साथ विशेष पुलिस टीम व आबकारी विभाग लगातार चौकस होने के दावे करने से पीछे नहीं रहता। छापेमारी कर बरामदगी भी की जा रही है, बावजूद शराब की तस्करी के धंधे पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा। सूत्रों के मुताबिक ये तस्कर बढ़नी, बगही, बसंतपुर, लोहटी, कोटिया आदि बॉर्डर क्षेत्र से साइकिल व बाइक से नेपाली शराब की बड़ी खेप को भारतीय सीमा क्षेत्र के गांव तुलसियापुर, चरिहवां, मानपुर, खैरहिनिया, औदही, बसंतपुर,लोहटी, चंदई, बनचौरी, जलापुरवा, केवटलिया आदि गांवों में पहुंचाते रहते हैं। बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे स्थित बालानगर, कचरिहवा, इटहिया, ककरा आदि गांवों में कच्ची शराब बनाने का धंधा भी जोरों पर है। कई बार पुलिस और आबकारी की टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर कच्ची शराब को बनाने वालों को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन विभाग के ही कुछ विभीषणों के कारण एक व्यक्ति को छोड़कर दर्जनों ऑपरेशन में टीम किसी को नहीं पकड़ पाई। इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी अजय कुमार मिश्र ने बताया कि टीम लगातार छापेमारी कर रही है। टीम को सफलता भी मिल रही है। लगातार अभियान चल रहा है। शराब की तस्करी और कच्ची शराब के धंधे को रोकने के लिए पुलिस के साथ मिलकर प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
ढेबरुआ और शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र का यह इलाका पहले से ही तस्करी को लेकर संवेदनशील रहा है। तस्करी का यह सिलसिला सरकारों के बदलने के बाद भी नहीं थमा है। यह हाल तब है, जब प्रदेश के आबकारी व मद्य निषेध मंत्री जयप्रताप सिंह इसी जिले से विधायक हैं। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के साथ-साथ विशेष पुलिस टीम व आबकारी विभाग लगातार चौकस होने के दावे करने से पीछे नहीं रहता। छापेमारी कर बरामदगी भी की जा रही है, बावजूद शराब की तस्करी के धंधे पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा। सूत्रों के मुताबिक ये तस्कर बढ़नी, बगही, बसंतपुर, लोहटी, कोटिया आदि बॉर्डर क्षेत्र से साइकिल व बाइक से नेपाली शराब की बड़ी खेप को भारतीय सीमा क्षेत्र के गांव तुलसियापुर, चरिहवां, मानपुर, खैरहिनिया, औदही, बसंतपुर,लोहटी, चंदई, बनचौरी, जलापुरवा, केवटलिया आदि गांवों में पहुंचाते रहते हैं। बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे स्थित बालानगर, कचरिहवा, इटहिया, ककरा आदि गांवों में कच्ची शराब बनाने का धंधा भी जोरों पर है। कई बार पुलिस और आबकारी की टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर कच्ची शराब को बनाने वालों को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन विभाग के ही कुछ विभीषणों के कारण एक व्यक्ति को छोड़कर दर्जनों ऑपरेशन में टीम किसी को नहीं पकड़ पाई। इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी अजय कुमार मिश्र ने बताया कि टीम लगातार छापेमारी कर रही है। टीम को सफलता भी मिल रही है। लगातार अभियान चल रहा है। शराब की तस्करी और कच्ची शराब के धंधे को रोकने के लिए पुलिस के साथ मिलकर प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन