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8440 दिव्यांगों पर सिर्फ 43 शिक्षक
siddharthnagar/ संतोष श्रीवास्तव
Updated Sun, 02 Dec 2018 10:28 PM IST
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सिद्धार्थनगर। परिवार से लेकर समाज तक उपेक्षाभाव से गुजरने को विवश दिव्यांगों को महात्मा बुद्ध की धरा पर भी अनदेखी का सामना करना पड़ रहा है। जिले में 8440 दिव्यांग बच्चे हैं जिनकी पढ़ाई-लिखाई की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। अन्य बच्चों की भांति विद्यालय जा नहीं सकते। गए भी तो हाथ-पांव, मस्तिष्क में वह ताकत नहीं कि सामान्य बच्चों का मुकाबला कर सके। इनके साथ नाइंसाफी कुदरत ने ही की है। कोई जन्म से दिव्यांग तो कोई जन्म के बाद। मुसीबतें सभी की एक जैसी हैं। इनमें पूर्ण दृष्टिबाधित आंशिक दृष्टिबाधित, मूक बधिर, वाणी दोष, अस्थि बाधित, मानसिक दिव्यांग, बहु विकलांग, मस्तिष्क अगघात आदि की श्रेणी वाले बच्चे सम्मिलित हैं।
जिले के 1924 प्राथमिक व 740 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में नामांकन तो हैं, पर इन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं है। इनके लिए 42 इंटीनरेंटर टीचर, 2 रिसोर्स टीचर्स व 1 फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती की गई है, पर हर दिन एक ही विद्यालय पर पहुंच पाते हैं। ऐसे में सप्ताह में एक बार ही मौका मिलता है, शेष दिनों में सामान्य बच्चों के बीच समय बिताने अथवा तैनात शिक्षकों के सहयोग से कुछ समझने का प्रयास करते हैं।
120 बच्चों के लिए ब्रिजकोर्स
चिह्नित दिव्यांग बच्चों में से ही हर वर्ष 120 बच्चों के लिए ब्लॉक संसाधन केंद्र नौगढ़ के परिसर में आवासीय ब्रिजकोर्स कैंप चलाया जाता है। यहां इनका विशेष ख्याल रखा जाता है। इनका सहयोग कर इन्हें लिखना-पढ़ना सिखाया जाता है, मगर वर्ष भर बाद इन बच्चों को फिर से उसी व्यवस्था में जाना पड़ता है। ब्रिजकोर्स की क्षमता 120 की है और बच्चे 8440 हैं। ऐसे में सभी को शिक्षा कैसे मिले, आसानी से समझा जा सकता है।
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ठंडे बस्ते में शैक्षिक पुर्नवास केंद्र की स्थापना
एइएस, जेई के कारण मानसिक मंदता व श्रवणबाधा ग्रस्त बच्चों के लिए प्रत्येक विकास खंड में एक-एक शैक्षिक पुनर्वास केंद्र के गठन की आवश्यकता महसूस करते हुए 9 नवंबर 2011 को तत्कालीन जिलाधिकारी चैत्रा वी. ने राज्य परियोजना निदेशक को पत्र लिखते हुए सचिव बेसिक शिक्षा से भी इस दिशा में कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। पत्र में स्पष्ट किया था कि मानकों को शिथिल करते हुए 2011-12 में सप्लीमेंट्री प्लान में इन पुनर्वास केंद्रों की स्थापना के लिए केंद्र सरकार से अनुमोदित, स्वीकृति कराने की अपेक्षा की थी। इसके बाद अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी।
श्रेणी संख्या
पूर्ण दृष्टिबाधित 594
आंशिक दृष्टिबाधित 594
मूक बधिर 923
वाणी दोष 582
अस्थि बाधित 3275
मानसिक दिव्यांग 2111
अधिगम दिव्यांग 114
मस्तिष्क अगघात 14
आटिज्म (मस्तिष्क विकार) 9
बहु दिव्यांग 224
समेकित शिक्षा के तहत दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जिले में 43 विशेष शिक्षक तैनात हैं। संख्या कम होने के कारण एक अध्यापक सप्ताह में एक बार अधिकतम 10 विद्यालय ही देख पाते हैं। आवासीय शिविर में भी बाध्यता के चलते पर्याप्त बच्चों का नामांकन नहीं हो पाता है। उपलब्ध संसाधन में बेहतर कार्य किया जा रहा है।
-नागेंद्र प्रताप सिंह, समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक
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जिले के 1924 प्राथमिक व 740 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में नामांकन तो हैं, पर इन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं है। इनके लिए 42 इंटीनरेंटर टीचर, 2 रिसोर्स टीचर्स व 1 फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती की गई है, पर हर दिन एक ही विद्यालय पर पहुंच पाते हैं। ऐसे में सप्ताह में एक बार ही मौका मिलता है, शेष दिनों में सामान्य बच्चों के बीच समय बिताने अथवा तैनात शिक्षकों के सहयोग से कुछ समझने का प्रयास करते हैं।
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120 बच्चों के लिए ब्रिजकोर्स
चिह्नित दिव्यांग बच्चों में से ही हर वर्ष 120 बच्चों के लिए ब्लॉक संसाधन केंद्र नौगढ़ के परिसर में आवासीय ब्रिजकोर्स कैंप चलाया जाता है। यहां इनका विशेष ख्याल रखा जाता है। इनका सहयोग कर इन्हें लिखना-पढ़ना सिखाया जाता है, मगर वर्ष भर बाद इन बच्चों को फिर से उसी व्यवस्था में जाना पड़ता है। ब्रिजकोर्स की क्षमता 120 की है और बच्चे 8440 हैं। ऐसे में सभी को शिक्षा कैसे मिले, आसानी से समझा जा सकता है।
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ठंडे बस्ते में शैक्षिक पुर्नवास केंद्र की स्थापना
एइएस, जेई के कारण मानसिक मंदता व श्रवणबाधा ग्रस्त बच्चों के लिए प्रत्येक विकास खंड में एक-एक शैक्षिक पुनर्वास केंद्र के गठन की आवश्यकता महसूस करते हुए 9 नवंबर 2011 को तत्कालीन जिलाधिकारी चैत्रा वी. ने राज्य परियोजना निदेशक को पत्र लिखते हुए सचिव बेसिक शिक्षा से भी इस दिशा में कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। पत्र में स्पष्ट किया था कि मानकों को शिथिल करते हुए 2011-12 में सप्लीमेंट्री प्लान में इन पुनर्वास केंद्रों की स्थापना के लिए केंद्र सरकार से अनुमोदित, स्वीकृति कराने की अपेक्षा की थी। इसके बाद अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी।
श्रेणी संख्या
पूर्ण दृष्टिबाधित 594
आंशिक दृष्टिबाधित 594
मूक बधिर 923
वाणी दोष 582
अस्थि बाधित 3275
मानसिक दिव्यांग 2111
अधिगम दिव्यांग 114
मस्तिष्क अगघात 14
आटिज्म (मस्तिष्क विकार) 9
बहु दिव्यांग 224
समेकित शिक्षा के तहत दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जिले में 43 विशेष शिक्षक तैनात हैं। संख्या कम होने के कारण एक अध्यापक सप्ताह में एक बार अधिकतम 10 विद्यालय ही देख पाते हैं। आवासीय शिविर में भी बाध्यता के चलते पर्याप्त बच्चों का नामांकन नहीं हो पाता है। उपलब्ध संसाधन में बेहतर कार्य किया जा रहा है।
-नागेंद्र प्रताप सिंह, समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक