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एक छटाक कालानमक भी नहीं खरीद सका विभाग

Tue, 15 Jan 2019 10:50 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jan 2019 10:50 PM IST
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एक छटाक कालानमक भी नहीं खरीद सका विभाग
एक छटाक कालानमक भी नहीं खरीद सका विभाग
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फोटो-
एक छटाक कालानमक भी नहीं खरीद सका विभाग
- एक जिला एक उत्पाद के तहत चयनित है काला नमक
- खुले में बिक रहा है 80 रुपये किलो
- किसानों ने कहा, सरकार ने दिया है धोखा
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। ‘एक जिला एक उत्पाद’ के तहत काला नमक का चयन करने के बाद किसानों को यह लगा था कि काला नमक की खुश्बू और उसकी मिठास पूरे देश में एक बार फिर बिखरेगी। लेकिन किसानों के यह अरमान धरा का धरा रह गया। वजह प्रशासन की ओर से भेजा गया समर्थन मूल्य सरकार ने अब तक स्वीकार नहीं किया है। जबकि धान की कटाई दिसंबर माह में पूरी चुकी है और लगभग केंद्र भी धान की खरीददारी पूरी कर चुके हैं। ऐसे में एक बार फिर किसान मायूस होकर काला नमक खुले में बेच रहे हैं। यह हाल तब है जब सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद ही एक जिला एक उत्पाद की ब्रांडिंग करने में जुटे हैं। मौजूदा समय में काला नमक चावल 75 से 80 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि धान के समर्थन मृल्य का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन अब तक इस पर कोई फैसला नहीं आ सका है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस सत्र में समर्थन मूल्य घोषित हो जाए।

किसान बोले, सरकार ने दिया है धोखा
कालानमक की खेती जिले में गिने-चुने किसान ही करते है। इसकी वजह यह है कि पैदावार में समय लेता है। बर्डपुर मंझरिया निवासी प्रेम कुमार ने बताया कि एक बीघे काला नमक की खेती में करीब छह से सात हजार की लागत आती है। फुटकर बिक्री 40 रुपये प्रति किलो धान बिकता है। सरकार को इसी रेट से समर्थन मूल्य घोषित करना था, जो इस सीजन में नहीं हो सका। मजबूरी में धान बेचना पड़ा। बर्डपुर के प्रमोद यादव ने बताया कि समय से समर्थन मूल्य घोषित हो गया होता तो इस बार क्षेत्र के अधिक किसान काला नमक की बुआई करते, लेकिन ऐसा न होने से इस बार और भी कम लोग काला नमक की खेती करेंगे। सूर्यकुड़िया निवासी विष्णु रावत ने बताया कि सरकार के फैसले से उम्मीद जगी थी कि 10 साल पहले वाली स्थिति काला नमक की होगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसके पीछे जिला प्रशासन और सरकार दोषी है। कुछ ऐसा ही हाल किसान कमल त्रिपाठी ने कही। कहा कि अगर यही हाल रहा तो काला नमक की बुआई से मुहं मोड़ना पड़ेगा।
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घटता जा रहा है रकबा
कृषि विभाग के आकड़ों पर गौर करें तो कालानमक बुआई का रकबा साल दर साल घटता जा रहा है। 10 साल पहले जिले में 30 हजार हेक्टेयर की बुआई होती थी। वहीं अब वह तीन हजार पर सिमट कर रह गया है। पिछले साल जिले में 3000 हजार हेक्टेयर कालानमक की बुआई की गई थी, जो इस साल 2700 पर आकर अटक गई है। किसानों का कहना है कि अगर इस बार भी समर्थन मूल्य समय से घोषित नहीं हुआ तो यह रकबे और भी घटते जाएंगे।
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आंकड़े एक नजर में
एक हेक्टेयर में करीब 22 से 25 और एक बीघे में तीन क्विंटल धान की पैदावार होती है। वही सामान्य धान में एक बीघे में करीब आठ से नौ क्विंटल पैदा होता है।

काला नमक के लिए जरूरी है तापमान काला नमक के लिए सबसे जरूरी है तापमान। जिले में काला नमक के लिए तामपान बेहद अनुकूूल है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. मारकेंडय सिंह ने बताया कि औसतन 20 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान होना चाहिए।
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