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घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के मदद की जगी आस
Tue, 12 Mar 2019 10:51 PM IST
brijesh kumar
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Published by: brijesh kumar
Updated Tue, 12 Mar 2019 10:51 PM IST
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आशा वर्कर
- फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू हिंसा रोकने में आशा कार्यकर्ता महिलाओं की मदद करेंगी। शारीरिक व मानसिक हिंसा की सूचना मिलने पर आशा कार्यकर्ता परिवार के बीच पहुंचकर दोनों पक्षों की बातों को सुनकर सुलह कराएंगी। आपराधिक घटना होने पर स्थानीय पुलिस के साथ ही जिला प्रशासन को भी सूचना देंगी। जिले में आशा कार्यकर्ताओं की संख्या 2392 है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत नेशनल हेल्थ रिसोर्स सेंटर की इस योजना को जिले में भी लागू किया गया है। तीन चरण की प्रशिक्षण देने के बाद चौथे प्रशिक्षण का विषय घरेलू हिंसा रखा गया है। आशा कार्यकर्ता मां व बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए काम करती हैं। इस कारण समाज में उनकी अलग पहचान है। इसको देखते हुए घरों में होने वाली हिंसा को रोकने के लिए अब आशा कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिले में अब तक आशा कार्यकर्ता महिलाओं, पुरुषों, नवजात और किशोर किशोरियों को होने बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक करती रही हैं, लेकिन अब एक नई जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं पर विभाग की ओर से सौंपी जाएगी। जिले में 2392 आशा कार्यकर्ता हैं। जो घरेलू हिंसा रोकने के लिए भी कार्य करेंगी। महिलाओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, अनावश्यक कार्य के लिए दबाव बनाने, मजदूरी करने के लिए मारपीट किए जाने आदि जैसी हिंसा आम समस्या है।
इन समस्याओं से निपटने के लिए अब आशा कार्यकर्ता कार्य करेंगी। उन्हें अगर महिला हिंसा से जुड़ी जानकारी मिलती है, तो आशा कार्यकर्ता पहले विभाग को सूचना देने के साथ ही पुलिस को भी खबर करेंगी। इससे महिला हिंसा पर नियंत्रण की कोशिश की जा सकती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक राजेश शर्मा का कहना है कि सरकार की ओर से शुरू की जाने वाली यह व्यवस्था निश्चित रूप से कारगर साबित होगी। आशा कार्यकर्ताओं का कार्य क्षेत्र गांव है। इससे प्राथमिक स्तर पर महिलाओं को होने वाली परेशानी का बेहतर ढंग से पता चल जाएगा। समय रहते सही जगह पर सूचना पहुंच जाने से समस्याओं के समाधान में मदद मिलेगी।
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स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिलाने के साथ ही आशा कार्यकर्ताओं को दी जाने वाली यह जिम्मेदारी चुनौतीपूर्ण होगी। इस व्यवस्था से महिलाओं के साथ होने वाली घरेलू हिंसा को रोकने में काफी हद मदद मिल सकती है। डीबीसीपीएम मान बहादुर के मुताबिक गृह आधारित भ्रमण कार्यक्रम के तहत आशा कार्यकर्ताओं को घरेलू हिंसा के लिए प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके लिए हर ब्लॉक में होने वाले प्रशिक्षण के लिए होली पर्व के पूर्व दो ब्लॉकों के कार्यक्रम तय किए गए हैं। शेष ब्लॉकों में भी जल्द ही प्रशिक्षण की तिथि तय कर ली जाएगी।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत नेशनल हेल्थ रिसोर्स सेंटर की इस योजना को जिले में भी लागू किया गया है। तीन चरण की प्रशिक्षण देने के बाद चौथे प्रशिक्षण का विषय घरेलू हिंसा रखा गया है। आशा कार्यकर्ता मां व बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए काम करती हैं। इस कारण समाज में उनकी अलग पहचान है। इसको देखते हुए घरों में होने वाली हिंसा को रोकने के लिए अब आशा कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिले में अब तक आशा कार्यकर्ता महिलाओं, पुरुषों, नवजात और किशोर किशोरियों को होने बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक करती रही हैं, लेकिन अब एक नई जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं पर विभाग की ओर से सौंपी जाएगी। जिले में 2392 आशा कार्यकर्ता हैं। जो घरेलू हिंसा रोकने के लिए भी कार्य करेंगी। महिलाओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, अनावश्यक कार्य के लिए दबाव बनाने, मजदूरी करने के लिए मारपीट किए जाने आदि जैसी हिंसा आम समस्या है।
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इन समस्याओं से निपटने के लिए अब आशा कार्यकर्ता कार्य करेंगी। उन्हें अगर महिला हिंसा से जुड़ी जानकारी मिलती है, तो आशा कार्यकर्ता पहले विभाग को सूचना देने के साथ ही पुलिस को भी खबर करेंगी। इससे महिला हिंसा पर नियंत्रण की कोशिश की जा सकती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक राजेश शर्मा का कहना है कि सरकार की ओर से शुरू की जाने वाली यह व्यवस्था निश्चित रूप से कारगर साबित होगी। आशा कार्यकर्ताओं का कार्य क्षेत्र गांव है। इससे प्राथमिक स्तर पर महिलाओं को होने वाली परेशानी का बेहतर ढंग से पता चल जाएगा। समय रहते सही जगह पर सूचना पहुंच जाने से समस्याओं के समाधान में मदद मिलेगी।
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स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिलाने के साथ ही आशा कार्यकर्ताओं को दी जाने वाली यह जिम्मेदारी चुनौतीपूर्ण होगी। इस व्यवस्था से महिलाओं के साथ होने वाली घरेलू हिंसा को रोकने में काफी हद मदद मिल सकती है। डीबीसीपीएम मान बहादुर के मुताबिक गृह आधारित भ्रमण कार्यक्रम के तहत आशा कार्यकर्ताओं को घरेलू हिंसा के लिए प्रशिक्षण दिया जाना है। इसके लिए हर ब्लॉक में होने वाले प्रशिक्षण के लिए होली पर्व के पूर्व दो ब्लॉकों के कार्यक्रम तय किए गए हैं। शेष ब्लॉकों में भी जल्द ही प्रशिक्षण की तिथि तय कर ली जाएगी।