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3695 मुर्दे ले रहे थे पेंशन
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 04 Aug 2018 11:05 PM IST
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सिद्धार्थनगर। बुढ़ापे की लाठी, पति की मौत के बाद निराश्रित महिलाओं की सहायता व अशक्त हो चुके दिव्यांगजनों के लिए मील का पत्थर साबित होने वाले पेंशन पा रहे 3695 लाभार्थी परलोक सिधार चुके हैं। इसके बाद भी संबंधित महकमा मृतकों को पेंशन का लाभ दे रहा था। इसका खुलासा शासन के निर्देश पर हाल में हुए सत्यापन रिपोर्ट में हुआ है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सभी के पेंशन भुगतान को रोक दिया गया है।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में बुढ़ापे मेें आर्थिक रूप से मजबूती के लिए लागू वृद्धावस्था पेंशन के तहत जिले में 60662 लाभार्थी थे। पति के मौत के बाद निराश्रित महिला पेंशन योजना में 14683 लाभार्थी एवं दिव्यांगजनों के लिए लागू पेंशन में 11129 लाभार्थी थे। इन पेंशन योजनाओं में अपात्रों समेत मौत के बाद भी लाभान्वित होने की शिकायत को शासन ने गंभीरता से लिया है। इसके बाद जिलाधिकारी ने सभी पेंशनरों का सत्यापन कराने के लिए विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया। लगभग दो माह बाद हुए सत्यापन में आए रिपोर्ट चौंकाने वाले मिले। 3695 लाभार्थी परलोक सिधार चुके हैं, बावजूद महकमे के जिम्मेदार इस गंभीर प्रकरण पर चुप्पी साधे हुए थे। इनके खाते में धनराशि का हस्तातंरण होता रहा। अधिकांश लाभार्थियों के परिजन एटीएम के जरिए सरकारी पैसा का उपभोग करते रहे। सत्यापन रिपोर्ट के मुताबिक वृद्धावस्था पेंशन में 3067, निराश्रित महिलाओं के पेंशन में 467 व दिव्यांगजन पेंशन योजना में 161 लाभार्थी मृत पाए गए। कुणाल सिल्कू, जिलाधिकारी ने बताया कि पेंशन योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों के सत्यापन में मृतक व अपात्र मिले लोगों का भुगतान तत्काल रोकने के लिए विभागाध्यक्षों को कड़े निर्देश दिए गए हैं।
अपात्र मिले 140 लाभार्थी
विभिन्न पेंशन योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों के सत्यापन में 140 अपात्र पाए गए। इन में वृद्धावस्था पेंशन के 106, निराश्रित महिला पेंशन योजना में 8 व दिव्यांगजन पेंशन योजना में 26 लाभार्थी अपात्र मिले। अब सवाल उठता है कि अपात्रों का चयन करने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी, यह जनमानस में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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वित्तीय वर्ष 2018-19 में बुढ़ापे मेें आर्थिक रूप से मजबूती के लिए लागू वृद्धावस्था पेंशन के तहत जिले में 60662 लाभार्थी थे। पति के मौत के बाद निराश्रित महिला पेंशन योजना में 14683 लाभार्थी एवं दिव्यांगजनों के लिए लागू पेंशन में 11129 लाभार्थी थे। इन पेंशन योजनाओं में अपात्रों समेत मौत के बाद भी लाभान्वित होने की शिकायत को शासन ने गंभीरता से लिया है। इसके बाद जिलाधिकारी ने सभी पेंशनरों का सत्यापन कराने के लिए विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया। लगभग दो माह बाद हुए सत्यापन में आए रिपोर्ट चौंकाने वाले मिले। 3695 लाभार्थी परलोक सिधार चुके हैं, बावजूद महकमे के जिम्मेदार इस गंभीर प्रकरण पर चुप्पी साधे हुए थे। इनके खाते में धनराशि का हस्तातंरण होता रहा। अधिकांश लाभार्थियों के परिजन एटीएम के जरिए सरकारी पैसा का उपभोग करते रहे। सत्यापन रिपोर्ट के मुताबिक वृद्धावस्था पेंशन में 3067, निराश्रित महिलाओं के पेंशन में 467 व दिव्यांगजन पेंशन योजना में 161 लाभार्थी मृत पाए गए। कुणाल सिल्कू, जिलाधिकारी ने बताया कि पेंशन योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों के सत्यापन में मृतक व अपात्र मिले लोगों का भुगतान तत्काल रोकने के लिए विभागाध्यक्षों को कड़े निर्देश दिए गए हैं।
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अपात्र मिले 140 लाभार्थी
विभिन्न पेंशन योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों के सत्यापन में 140 अपात्र पाए गए। इन में वृद्धावस्था पेंशन के 106, निराश्रित महिला पेंशन योजना में 8 व दिव्यांगजन पेंशन योजना में 26 लाभार्थी अपात्र मिले। अब सवाल उठता है कि अपात्रों का चयन करने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी, यह जनमानस में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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