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खतरे के साये में पढ़ रहे बच्चे
siddharthnagar
Updated Sun, 22 Jul 2018 11:27 PM IST
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प्राथमिक विद्यालय थरौली का जर्जर भवन
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। एक ओर सरकार परिषदीय स्कूलों में अधिकाधिक बच्चों के प्रवेश पर जोर दे रही है। इसके लिए यूनिफॉर्म, किताबें बैग और मिड डे मील का प्रबंध किया जा रहा है। दूसरी ओर जिले के 14 ब्लॉकों में 1924 प्राथमिक और 740 पूर्व माध्यमिक स्कूलों में से करीब 100 स्कूलों के भवन जर्जर हो चुके हैं। कई तो ऐेसे हैं जो कभी भी ढह सकते हैं। ऐसे में बच्चे खतरे के साए में रहकर पढ़ने को मजबूर हैं।
जर्जर स्कूलों के कई भवन तो ऐेसे हैं जहां बारिश होने पर छत से पानी टपकता है। छत व दीवार पर लगे प्लास्टर टूट कर गिर रहे हैं। ऐसे ही एक स्कूलों में से एक नगर के सटा प्राथमिक विद्यालय थरौली है। यहां भवन जर्जर हो चुका है। बारिश होने के बाद परिसर में तालाब में तब्दील हो जाता है। मगर मुख्यालय से सटे इस विद्यालय पर भी जिम्मेदारों की नजर नहीं पहुंच रही है। वहीं, बढ़नी ब्लॉक विद्यालय बैरिया, औरहवा, मुजेहना समेत बड़ी संख्या में विद्यालय पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। प्राथमिक विद्यालय मटियार का रसोई घर बाढ़ में ढह गया, यह अभी तक नहीं बन सकता है। बीएसए राम सिंह ने बताया कि जर्जर भवनों की रिपोर्ट मांगी गई है। संख्या पता चलने के बाद सूची तैयार करके शासन को भेजा जाएगा। धन आने के बाद मरम्मत कार्य करवाया जाएगा।
दो माह में भी पूरा नहीं हुआ सर्वे
विभागीय जिम्मेदारों की माने तो पिछले दो माह से जर्जर विद्यालय के सर्वे के लिए संबंधित सभी बीईओ को कहा गया है, लेकिन अभी तक जर्जर भवनों का सर्वे नहीं हो सका।
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जर्जर भवन के मरम्मत की कर चुके हैं मांग
हियुवा के जिला महामंत्री व जिला पंचायत सदस्य अजय सिंह ने कहा कि बढ़नी क्षेत्र में 12 से अधिक विद्यालय भवन जर्जर हैं। यही हाल पूरे जिले का है। जर्जर विद्यालयों के मरम्मत के लिए जिम्मेदारों को अवगत भी कराया जा चुका है। मगर अभी तक मरम्मत के नाम पर कुछ नहीं हुआ।
भनवापुर ब्लॉक के विद्यालय का हाल
भनवापुर ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय जर्जर हो चुका है। यहां 70 बच्चे पंजीकृत हैं। यही हाल प्राथमिक विद्यालय मुडिला मिश्र का भी है। यहां 80 बच्चे पंजीकृत हैं। प्राथमिक विद्यालय गदाखौवा पंजीकृत 146 बच्चे हैं। खंड शिक्षा अधिकारी भनवापुर चंद्र भूषण पांडेय ने कहा कि विकास खंड में जर्जर विद्यालय कि संख्या 6-7 है जिसका प्रस्ताव बना कर भेजा जा रहा है।
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जर्जर स्कूलों के कई भवन तो ऐेसे हैं जहां बारिश होने पर छत से पानी टपकता है। छत व दीवार पर लगे प्लास्टर टूट कर गिर रहे हैं। ऐसे ही एक स्कूलों में से एक नगर के सटा प्राथमिक विद्यालय थरौली है। यहां भवन जर्जर हो चुका है। बारिश होने के बाद परिसर में तालाब में तब्दील हो जाता है। मगर मुख्यालय से सटे इस विद्यालय पर भी जिम्मेदारों की नजर नहीं पहुंच रही है। वहीं, बढ़नी ब्लॉक विद्यालय बैरिया, औरहवा, मुजेहना समेत बड़ी संख्या में विद्यालय पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। प्राथमिक विद्यालय मटियार का रसोई घर बाढ़ में ढह गया, यह अभी तक नहीं बन सकता है। बीएसए राम सिंह ने बताया कि जर्जर भवनों की रिपोर्ट मांगी गई है। संख्या पता चलने के बाद सूची तैयार करके शासन को भेजा जाएगा। धन आने के बाद मरम्मत कार्य करवाया जाएगा।
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दो माह में भी पूरा नहीं हुआ सर्वे
विभागीय जिम्मेदारों की माने तो पिछले दो माह से जर्जर विद्यालय के सर्वे के लिए संबंधित सभी बीईओ को कहा गया है, लेकिन अभी तक जर्जर भवनों का सर्वे नहीं हो सका।
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जर्जर भवन के मरम्मत की कर चुके हैं मांग
हियुवा के जिला महामंत्री व जिला पंचायत सदस्य अजय सिंह ने कहा कि बढ़नी क्षेत्र में 12 से अधिक विद्यालय भवन जर्जर हैं। यही हाल पूरे जिले का है। जर्जर विद्यालयों के मरम्मत के लिए जिम्मेदारों को अवगत भी कराया जा चुका है। मगर अभी तक मरम्मत के नाम पर कुछ नहीं हुआ।
भनवापुर ब्लॉक के विद्यालय का हाल
भनवापुर ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय जर्जर हो चुका है। यहां 70 बच्चे पंजीकृत हैं। यही हाल प्राथमिक विद्यालय मुडिला मिश्र का भी है। यहां 80 बच्चे पंजीकृत हैं। प्राथमिक विद्यालय गदाखौवा पंजीकृत 146 बच्चे हैं। खंड शिक्षा अधिकारी भनवापुर चंद्र भूषण पांडेय ने कहा कि विकास खंड में जर्जर विद्यालय कि संख्या 6-7 है जिसका प्रस्ताव बना कर भेजा जा रहा है।