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बौद्ध देश कपिलवस्तु में बनाएंगे मंदिर-होटल
siddharthnagar/मनीष जायसवाल
Updated Tue, 27 Mar 2018 10:55 PM IST
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संरक्षित क्षेत्र के बाहर जमीन की पैमाइश करने पहुंची राजस्व टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। महात्मा बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु में बौद्ध अनुयायी देशों ने बौद्ध मंदिर व होटल बनाने की इच्छा जताई है। चार देशों से प्रस्ताव मिलने के बाद पर्यटन विभाग जमीन की तलाश में जुट गया है। जिला प्रशासन से 15-20 एकड़ जमीन की मांग की गई है। मुख्यमंत्री के विशेष निर्देश के बाद प्रशासन भी जमीन के चिह्नांकन को लेकर सक्रिय हो गया है। सोमवार को सदर तहसील की टीम ने कपिलवस्तु पहुंचकर स्तूप के आसपास के संरक्षित क्षेत्र के बाहर राजस्व नक्शे के अनुसार उपयुक्त जमीन की नाप-जोख की। जल्द ही पर्यटन विभाग के अफसर जमीन देखने पहुंचेंगे। इसके बाद इस पर अंतिम फैसला होगा। जरूरत पड़ने पर निजी भूमि का अधिग्रहण भी किया जा सकता है।
दुनिया के दो सौ से भी अधिक देशों में महात्मा बुद्ध की पूजा होती है। इन देशों के नागरिकों के लिए बुद्ध की जन्मभूमि कपिलवस्तु किसी तीर्थ से कम नहीं। अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार वह यहां जरूर आना चाहते हैं। यहां आने वाले सैलानियों को अपने धर्म, कला, सभ्यता व संस्कृति से रुबरु कराने के लिए बौद्ध अनुयायी देशों ने अपनी शैली में बुद्ध मंदिरों का निर्माण भी कराया है। लुंबिनी (नेपाल), श्रावस्ती और कुशीनगर में इन देशों ने मंदिर व होटल बनवाए हैं। इसी तर्ज पर अब कपिलवस्तु में भी मंदिर व होटल बनवाने की तैयारी शुरू हो गई है। बौद्ध मतावलंबी श्रीलंका, म्यांमार, उत्तर कोरिया और थाईलैंड ने इसके लिए जमीन उपलब्ध कराने को पत्र लिखा है। कपिलवस्तु को विशेष पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की व्यक्तिगत रुचि के बाद जमीन की तलाश तेज हो गई है। पर्यटन विभाग ने प्रशासन से 15-20 जमीन देने के लिए पत्र लिखा है। इसके आधार पर प्रशासन भी उपयुक्त भूमि चयनित करने की कवायद में जुट गया है।
संरक्षित क्षेत्र के बाहर हो रही जमीन की तलाश
पर्यटन विभाग के प्रस्ताव पर तहसील प्रशासन ने जमीन की तलाश तेज कर दी है। सदर तहसीलदार संतोष कुमार ओझा की अगुवाई में टीम ने कपिलवस्तु के आसपास जमीन देखने पहुंची और राजस्व नक्शे के अनुसार गाटा संख्या, लोकेशन, सर्किल रेट व उसके स्वामित्व संबंधी विवरण तैयार किया। तहसीलदार के मुताबिक कपिलवस्तु स्तूप से 300 मीटर की परिधि में संरक्षित क्षेत्र है। इसके बाहर की जमीन का प्रस्ताव भेजा जाएगा। राजस्व टीम में कानूनगो गिरीश चंद्र मिश्र, लेखपाल रामशंकर दुबे, अनूप यादव, अशोक गुप्ता आदि शामिल रहे।
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फाइव स्टार होटल का होगा निर्माण
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी सिद्धार्थनगर अरविंद कुमार राय के मुताबिक फरवरी में हुए इंवेस्टर्स समिट के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए निर्देश के अनुसार थ्री और फाइव स्टॉर होटल के लिए भी जमीन देखी जा रही है। होटल का निर्माण उद्योगपति या विदेशी संस्थाओं के माध्यम से किया जाएगा। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सरकार खुद जमीन लेकर होटल निर्माण के लिए देगी या होटल बनाने वाली संस्थाओं के माध्यम से जमीन खरीदी जाएगी।
पर्यटन के विकास के लिए मिले हैं 35 करोड़
बौद्ध सर्किट योजना में कपिलवस्तु पहले से ही शामिल हैं। यहां पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए 35 करोड़ रुपये की कार्ययोजना मंजूर हो चुकी है। इससे हेलीपैड, वेस्ट मैनेजमेंट, सोलर लाइटिंग, मॉडल टायलेट, सीसीटीवी, वाई-फाई सहित अन्य कार्य होने हैं। 31 दिसंबर को सीएम ने इस परियोजना का शिलान्यास किया था। इसमें 2.08 करोड़ रुपये अवमुक्त हो चुके हैं। राजकीय निर्माण निगम के माध्यम से होने वाले कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है।
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दुनिया के दो सौ से भी अधिक देशों में महात्मा बुद्ध की पूजा होती है। इन देशों के नागरिकों के लिए बुद्ध की जन्मभूमि कपिलवस्तु किसी तीर्थ से कम नहीं। अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार वह यहां जरूर आना चाहते हैं। यहां आने वाले सैलानियों को अपने धर्म, कला, सभ्यता व संस्कृति से रुबरु कराने के लिए बौद्ध अनुयायी देशों ने अपनी शैली में बुद्ध मंदिरों का निर्माण भी कराया है। लुंबिनी (नेपाल), श्रावस्ती और कुशीनगर में इन देशों ने मंदिर व होटल बनवाए हैं। इसी तर्ज पर अब कपिलवस्तु में भी मंदिर व होटल बनवाने की तैयारी शुरू हो गई है। बौद्ध मतावलंबी श्रीलंका, म्यांमार, उत्तर कोरिया और थाईलैंड ने इसके लिए जमीन उपलब्ध कराने को पत्र लिखा है। कपिलवस्तु को विशेष पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की व्यक्तिगत रुचि के बाद जमीन की तलाश तेज हो गई है। पर्यटन विभाग ने प्रशासन से 15-20 जमीन देने के लिए पत्र लिखा है। इसके आधार पर प्रशासन भी उपयुक्त भूमि चयनित करने की कवायद में जुट गया है।
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संरक्षित क्षेत्र के बाहर हो रही जमीन की तलाश
पर्यटन विभाग के प्रस्ताव पर तहसील प्रशासन ने जमीन की तलाश तेज कर दी है। सदर तहसीलदार संतोष कुमार ओझा की अगुवाई में टीम ने कपिलवस्तु के आसपास जमीन देखने पहुंची और राजस्व नक्शे के अनुसार गाटा संख्या, लोकेशन, सर्किल रेट व उसके स्वामित्व संबंधी विवरण तैयार किया। तहसीलदार के मुताबिक कपिलवस्तु स्तूप से 300 मीटर की परिधि में संरक्षित क्षेत्र है। इसके बाहर की जमीन का प्रस्ताव भेजा जाएगा। राजस्व टीम में कानूनगो गिरीश चंद्र मिश्र, लेखपाल रामशंकर दुबे, अनूप यादव, अशोक गुप्ता आदि शामिल रहे।
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फाइव स्टार होटल का होगा निर्माण
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी सिद्धार्थनगर अरविंद कुमार राय के मुताबिक फरवरी में हुए इंवेस्टर्स समिट के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए निर्देश के अनुसार थ्री और फाइव स्टॉर होटल के लिए भी जमीन देखी जा रही है। होटल का निर्माण उद्योगपति या विदेशी संस्थाओं के माध्यम से किया जाएगा। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सरकार खुद जमीन लेकर होटल निर्माण के लिए देगी या होटल बनाने वाली संस्थाओं के माध्यम से जमीन खरीदी जाएगी।
पर्यटन के विकास के लिए मिले हैं 35 करोड़
बौद्ध सर्किट योजना में कपिलवस्तु पहले से ही शामिल हैं। यहां पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए 35 करोड़ रुपये की कार्ययोजना मंजूर हो चुकी है। इससे हेलीपैड, वेस्ट मैनेजमेंट, सोलर लाइटिंग, मॉडल टायलेट, सीसीटीवी, वाई-फाई सहित अन्य कार्य होने हैं। 31 दिसंबर को सीएम ने इस परियोजना का शिलान्यास किया था। इसमें 2.08 करोड़ रुपये अवमुक्त हो चुके हैं। राजकीय निर्माण निगम के माध्यम से होने वाले कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है।