{"_id":"597b70874f1c1ba1438b459a","slug":"171501261959-siddharthnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंचमी पर पूजे गए नाग देव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंचमी पर पूजे गए नाग देव
Updated Fri, 28 Jul 2017 10:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। नागपंचमी का पर्व शुक्रवार को जिले में धूमधाम व परंपरागत तकीरे से से मनाया गया। मंदिरों में जहां नाग देव को दूध-लावा चढ़ाकर पूजा अर्चना की गई वहीं, परिवार की सुख-समृद्धि की कामनाएं भी की गईं। सावन के गीत गाती हुईं महिलाओं ने जहां झूला झूलकर लुत्फ उठाया। इसके अलावा बच्चों ने भी झूले का आनंद लिया।
नागपंचमी पर खेल प्रतियोगिताओं में भी होनहारों ने हाथ आजमाया।
सावन शुक्ल पंचमी पर नागदेव के पूजन का विधान है। मान्यता है कि इस दिन नाग देव की पूजा कर दूध पिलाने से परिवार को काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। परंपरानुसार सुबह ही लोग पूजन-अर्चन में जुट गए थे। परिवार की महिलाओं ने घरों व आसपास के शिवालयों में जाकर पूजा-अर्चना की। नगर के सिंहेश्वरी मंदिर सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में पूजन-अर्चन का सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। इस बीच बच्चों, किशोरियों की टोली जगह-जगह झूला झुलने में मशगूल रहे।
वातावरण में हर तरफ सावनी गीत गूंजते रहे। घरों मेें विभिन्न व्यंजन बनाकर लुत्फ उठाया। शाम को गुड़िया पीटने की परंपरा का निर्वाह हुआ। जगह-जगह खेल प्रतियोगिताएं हुईं। कुश्ती-दंगल, कबड्डी, खो-खो में बच्चों ने हिस्सा और दम-खम दिखाया। जिले के बर्डपुर, लोटन, जोगिया, पकड़ी, शोहरतगढ़, बांसी, पथरा, मिठवल, इटवा, गोल्हौरा, बढनी, खुनियांव सहित अन्य क्षेत्रों में भी नागपंचमी पर विभिन्न आयोजनों की धूम रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
नागपंचमी पर खेल प्रतियोगिताओं में भी होनहारों ने हाथ आजमाया।
सावन शुक्ल पंचमी पर नागदेव के पूजन का विधान है। मान्यता है कि इस दिन नाग देव की पूजा कर दूध पिलाने से परिवार को काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। परंपरानुसार सुबह ही लोग पूजन-अर्चन में जुट गए थे। परिवार की महिलाओं ने घरों व आसपास के शिवालयों में जाकर पूजा-अर्चना की। नगर के सिंहेश्वरी मंदिर सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में पूजन-अर्चन का सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। इस बीच बच्चों, किशोरियों की टोली जगह-जगह झूला झुलने में मशगूल रहे।
विज्ञापन
वातावरण में हर तरफ सावनी गीत गूंजते रहे। घरों मेें विभिन्न व्यंजन बनाकर लुत्फ उठाया। शाम को गुड़िया पीटने की परंपरा का निर्वाह हुआ। जगह-जगह खेल प्रतियोगिताएं हुईं। कुश्ती-दंगल, कबड्डी, खो-खो में बच्चों ने हिस्सा और दम-खम दिखाया। जिले के बर्डपुर, लोटन, जोगिया, पकड़ी, शोहरतगढ़, बांसी, पथरा, मिठवल, इटवा, गोल्हौरा, बढनी, खुनियांव सहित अन्य क्षेत्रों में भी नागपंचमी पर विभिन्न आयोजनों की धूम रही।
विज्ञापन