{"_id":"5cc732b3bdec220726685b26","slug":"161556558515-siddharthnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब कपिलवस्तु में दर्शन को देने होंगे शुल्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब कपिलवस्तु में दर्शन को देने होंगे शुल्क
Mon, 29 Apr 2019 11:16 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Apr 2019 11:16 PM IST
विज्ञापन
अलीगढवा स्थित कपिलवस्तु का स्तूप।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। समग्र विश्व को शांति, अहिंसा व करुणा का संदेश देने वाले भगवान बुद्ध की स्थली पिपरहवा व गनवरिया स्थल पहुंचने वाले भारतीय व विदेशी पर्यटकों को अब शुल्क देना होगा। अब तक स्तूप दर्शन की निशुल्क व्यवस्था थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के इस नए निर्णय से भारतीय पर्यटकों को 25 रुपये और विदेशी पर्यटकों का 300 रुपये देने होंगे। हालांकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने शार्क देशों को राहत देते हुए भारतीय पर्यटकों के ही तर्ज पर 25 रुपये शुल्क लेने का फैसला लिया है।
कपिलवस्तु प्राचीन शाक्य राजघराने की राजधानी हुआ करती थी। इसी राज परिवार के शासन शुद्धोधन सिद्धार्थ के पिता थे। सिद्धार्थ ही आगे चलकर महात्मा बुद्ध कहलाए और उन्हें शाक्यमुनि के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 1973-74 में इस स्थल की खुदाई प्रो. केएम श्रीवास्तव के निर्देशन में हुई। खुदाई में प्राप्त अवशेषों से पिपरहवा को कपिलवस्तु होने पर मुहर लगाई गई। इसकी पुष्टि होने के बाद कपिलवस्तु स्थित मुख्य स्तूप व गनवरिया स्थित राजमहल के अवशेष को देखने के लिए भारतीयों के साथ ही विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। बीते 40 वर्षों से इन स्थलों पर पहुंचने वाले पर्यटकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था। कपिलवस्तु में पिपरहवा स्थित मुख्य स्तूप के मुख्य द्वार पर महानिदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली की ओर से चस्पा स्लिप में 1 मई 2019 से पिपरहवा व गनवरिया में शुल्क लगाए जाने का उल्लेख किया गया है।
भारतीय पर्यटकों को प्रति व्यक्ति 25 रुपये तो विदेशी पर्यटकों को 300 सौ रुपये देने होंगे। शुल्क न देने पर प्रवेश वर्जित रहेगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के क्षेत्रीय जूनियर इंजीनियर अमित कुमार ने महानिदेशक के आदेश की पुष्टि करते हुए बताया कि पहली मई से भारतीय पर्यटकों को 25 व विदेशी पर्यटकों को 300 रुपये देने होंगे।
विज्ञापन
शार्क और बिम्सटेक देशों को वरीयता
शार्क देशों में भारत, नेपाल, बांग्लादेश, मालदीव, श्रीलंका पाकिस्तान और भूटान शामिल हैं। इन देशों के पर्यटकों को भी भारतीय पर्यटकों के ही तर्ज पर स्तूप दर्शन के लिए 25 रुपये देने होंगे। हालांकि सबसे अधिक बौद्ध भिक्षु पर्यटक श्रीलंका और नेपाल से ही आते हैं। इसके अलावा दक्षिण कोरिया, चाइना से भी अच्छी खासी संख्या स्तूप दर्शन के लिए आती है। इसके अलावा बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी से तटवर्ती या समीपवर्ती देशों का अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग संगठन है) देशों को भी राहत दी गई है। इन देशों के पर्यटकों को भी 25 रुपये शुल्क ही देने होंगे। इन देशों में भारत, बांग्लादेश, बर्मा, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल शामिल हैं।
विज्ञापन
कपिलवस्तु प्राचीन शाक्य राजघराने की राजधानी हुआ करती थी। इसी राज परिवार के शासन शुद्धोधन सिद्धार्थ के पिता थे। सिद्धार्थ ही आगे चलकर महात्मा बुद्ध कहलाए और उन्हें शाक्यमुनि के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 1973-74 में इस स्थल की खुदाई प्रो. केएम श्रीवास्तव के निर्देशन में हुई। खुदाई में प्राप्त अवशेषों से पिपरहवा को कपिलवस्तु होने पर मुहर लगाई गई। इसकी पुष्टि होने के बाद कपिलवस्तु स्थित मुख्य स्तूप व गनवरिया स्थित राजमहल के अवशेष को देखने के लिए भारतीयों के साथ ही विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। बीते 40 वर्षों से इन स्थलों पर पहुंचने वाले पर्यटकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता था। कपिलवस्तु में पिपरहवा स्थित मुख्य स्तूप के मुख्य द्वार पर महानिदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली की ओर से चस्पा स्लिप में 1 मई 2019 से पिपरहवा व गनवरिया में शुल्क लगाए जाने का उल्लेख किया गया है।
विज्ञापन
भारतीय पर्यटकों को प्रति व्यक्ति 25 रुपये तो विदेशी पर्यटकों को 300 सौ रुपये देने होंगे। शुल्क न देने पर प्रवेश वर्जित रहेगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के क्षेत्रीय जूनियर इंजीनियर अमित कुमार ने महानिदेशक के आदेश की पुष्टि करते हुए बताया कि पहली मई से भारतीय पर्यटकों को 25 व विदेशी पर्यटकों को 300 रुपये देने होंगे।
विज्ञापन
शार्क और बिम्सटेक देशों को वरीयता
शार्क देशों में भारत, नेपाल, बांग्लादेश, मालदीव, श्रीलंका पाकिस्तान और भूटान शामिल हैं। इन देशों के पर्यटकों को भी भारतीय पर्यटकों के ही तर्ज पर स्तूप दर्शन के लिए 25 रुपये देने होंगे। हालांकि सबसे अधिक बौद्ध भिक्षु पर्यटक श्रीलंका और नेपाल से ही आते हैं। इसके अलावा दक्षिण कोरिया, चाइना से भी अच्छी खासी संख्या स्तूप दर्शन के लिए आती है। इसके अलावा बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी से तटवर्ती या समीपवर्ती देशों का अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग संगठन है) देशों को भी राहत दी गई है। इन देशों के पर्यटकों को भी 25 रुपये शुल्क ही देने होंगे। इन देशों में भारत, बांग्लादेश, बर्मा, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल शामिल हैं।