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सेहत सुधारने के लिए आए घी का नहीं हुआ वितरण
Mon, 24 Jun 2019 10:28 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jun 2019 10:28 PM IST
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सिद्धार्थनगर। आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित किशोरियों की सेहत सुधारने के साथ-साथ पोषित करने के उद्देश्य से घी का पैकेट तीन माह से वितरण के इंतजार में है। जनपद के 9 बाल विकास परियोजना कार्यालयों के स्टोर में 11 क्विंटल 65 किलोग्राम घी के पैकेट डंप हैं। विभाग के उच्चाधिकारी इस मुद्दे पर मौन अबतक मौन हैं। ऐसे में किशोरियों की सेहत सुधारने की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अधीन संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर नामांकित 11-24 आयु वर्ग की किशोरियों व युवतियों की सेहत सुधारने के उद्देश्य से शासन ने प्रत्येक चार माह के अंतराल पर 450 ग्राम घी का पैकेट मुहैया कराने का निर्णय लिया। इसके तहत अप्रैल 2019 में ही जनपद में 2589 किशोरियों के लिए 11 क्विंटल 65 किलोग्राम घी का पैकेट मुहैया करा दिया। इसके बाद इसे संबंधित बाल विकास परियोजना कार्यालयों के स्टोर में रखा गया। तीन माह बाद भी घी के पैकेट को किशोरियों के बीच वितरण को कौन कहे, विभागीय अधिकारियों ने सुधि लेने की फुर्सत नहीं निकाली। स्टोर में डंप घी के पैकेट की मियाद खत्म हो चुकी अथवा हैंडओवर किए गए पैकेट की मात्रा घटी तो नहीं, खराब तो नहीं हुआ जैसे बिंदुओं पर किसी की निगाह नहीं है।
छह ब्लॉकों में एक भी किशोरी नहीं
शासन स्तर से 11-24 आयु वर्ग की किशोरियों व युवतियों को चार माह पर एक बार 450 ग्राम घी का पैकेट मुहैया कराने का निर्णय लिया। जिले में भेजी गई मांग में आधा दर्जन बाल विकास परियोजना कार्यालयों की रिपोर्ट में ऐसे किशोरियों की संख्या शून्य दिखा दी गई। यह बात किसी को हजम नहीं हो रही है। जागरूक नागरिकों का दावा है कि गहनता से छानबीन कर लिए जाएं तो निश्चय ही इन परियोजनाओं में 11-24 वर्ष की किशोरियों व युवतियों की संख्या निकलकर सामने आ ही जाएंगी। विभाग ने जिन परियोजना कार्यालयों में संख्या शून्य दिखाई है, उनमें मिठवल, बांसी, शहर, भनवापुर व बढ़नी शामिल हैं।
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विभागीय रिपोर्ट पर सवाल
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में ही जनपद के 99148 बच्चे कुपोषित हैं। इसमें भी 22 हजार 715 अति कुपोषित शामिल हैं। अब सवाल उठता है कि यह आंकड़ा पूरे जिले का है जिसमें वह ब्लॉक भी शामिल हैं, जिसमें 11-24 वर्ष के किशोरियों की संख्या शून्य दिखाई गई है। जानकारों की मानें तो ऐसा हो नहीं सकता कि इन ब्लॉकों में एक भी उस उम्र की किशोरी ही नहीं होगी। बहरहाल विभागीय आंकड़ों के खेल में शासन व प्रशासन गुमराह हो रहा है जिस पर किसी का ध्यान नहीं है।
सीडीओ ने दिए सत्यापन के निर्देश
प्रकरण की जानकारी मिलने के बाद मुख्य विकास अधिकारी हर्षिता माथुर ने गंभीरता से लेते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने स्टोरों में डंप पड़े घी के पैकेट का सत्यापन करने के लिए सख्त हिदायत दी है। सत्यापन के बाद अविलंब वितरण कराने के लिए निर्देश दिए हैं।
किशोरियों को वितरित करने के लिए आए घी का पैकेट जिले में जब मुहैया कराया गया, उसके कुछ ही दिन बाद लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू हो गई थी। इस दिशा में जल्द ही वितरण कराने के लिए संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा।
-राजीव सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अधीन संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर नामांकित 11-24 आयु वर्ग की किशोरियों व युवतियों की सेहत सुधारने के उद्देश्य से शासन ने प्रत्येक चार माह के अंतराल पर 450 ग्राम घी का पैकेट मुहैया कराने का निर्णय लिया। इसके तहत अप्रैल 2019 में ही जनपद में 2589 किशोरियों के लिए 11 क्विंटल 65 किलोग्राम घी का पैकेट मुहैया करा दिया। इसके बाद इसे संबंधित बाल विकास परियोजना कार्यालयों के स्टोर में रखा गया। तीन माह बाद भी घी के पैकेट को किशोरियों के बीच वितरण को कौन कहे, विभागीय अधिकारियों ने सुधि लेने की फुर्सत नहीं निकाली। स्टोर में डंप घी के पैकेट की मियाद खत्म हो चुकी अथवा हैंडओवर किए गए पैकेट की मात्रा घटी तो नहीं, खराब तो नहीं हुआ जैसे बिंदुओं पर किसी की निगाह नहीं है।
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छह ब्लॉकों में एक भी किशोरी नहीं
शासन स्तर से 11-24 आयु वर्ग की किशोरियों व युवतियों को चार माह पर एक बार 450 ग्राम घी का पैकेट मुहैया कराने का निर्णय लिया। जिले में भेजी गई मांग में आधा दर्जन बाल विकास परियोजना कार्यालयों की रिपोर्ट में ऐसे किशोरियों की संख्या शून्य दिखा दी गई। यह बात किसी को हजम नहीं हो रही है। जागरूक नागरिकों का दावा है कि गहनता से छानबीन कर लिए जाएं तो निश्चय ही इन परियोजनाओं में 11-24 वर्ष की किशोरियों व युवतियों की संख्या निकलकर सामने आ ही जाएंगी। विभाग ने जिन परियोजना कार्यालयों में संख्या शून्य दिखाई है, उनमें मिठवल, बांसी, शहर, भनवापुर व बढ़नी शामिल हैं।
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विभागीय रिपोर्ट पर सवाल
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में ही जनपद के 99148 बच्चे कुपोषित हैं। इसमें भी 22 हजार 715 अति कुपोषित शामिल हैं। अब सवाल उठता है कि यह आंकड़ा पूरे जिले का है जिसमें वह ब्लॉक भी शामिल हैं, जिसमें 11-24 वर्ष के किशोरियों की संख्या शून्य दिखाई गई है। जानकारों की मानें तो ऐसा हो नहीं सकता कि इन ब्लॉकों में एक भी उस उम्र की किशोरी ही नहीं होगी। बहरहाल विभागीय आंकड़ों के खेल में शासन व प्रशासन गुमराह हो रहा है जिस पर किसी का ध्यान नहीं है।
सीडीओ ने दिए सत्यापन के निर्देश
प्रकरण की जानकारी मिलने के बाद मुख्य विकास अधिकारी हर्षिता माथुर ने गंभीरता से लेते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने स्टोरों में डंप पड़े घी के पैकेट का सत्यापन करने के लिए सख्त हिदायत दी है। सत्यापन के बाद अविलंब वितरण कराने के लिए निर्देश दिए हैं।
किशोरियों को वितरित करने के लिए आए घी का पैकेट जिले में जब मुहैया कराया गया, उसके कुछ ही दिन बाद लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू हो गई थी। इस दिशा में जल्द ही वितरण कराने के लिए संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा।
-राजीव सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी