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नीति आयोग की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
Thu, 10 Jan 2019 10:42 PM IST
राकेश पांडेय
siddharthnagar
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Published by: राकेश पांडेय
Updated Thu, 10 Jan 2019 10:42 PM IST
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हेमंत
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। नीति आयोग की रिपोर्ट में देश के 185 आकांक्षी जिलों में सिद्धार्थनगर को तीसरा और प्रदेश का पहला स्थान दिए जाने संबंधी रिपोर्ट को अपना दल युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत चौधरी ने आंकड़ों का खेल बताया। उन्होंने रिपोर्ट को पूरी तरह से गलत बताया है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने फर्जी रिपोर्ट देकर इस पायदान पर पहुंचाया है।
गुरुवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट के आधार पर जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता के मामले में बहुत ही अच्छा काम किया है। इसकी बदौलत जिले को यह स्थान हासिल हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं के रुबेला टीकाकरण में महज 65 प्रतिशत बच्चों को ही टीका लग सका है। जिले के 581 ऐसे विद्यालय है, जहां टीकाकरण हुआ ही नहीं है। इनमें 137 प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। जबकि 444 मदरसे हैं। जहां पर एक भी बच्चों को टीका नहीं लगा है। वहीं प्रशासन आंकड़ों में 100 प्रतिशत टीकाकरण होने को हवाला दे रहा है। परिषदीय विद्यालयों में आंकड़ों के मुताबिक बच्चों के नामांकन में जिले को दूसरा और प्रयागराज को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इसमें भी आंकड़ों का खेल हुआ। 99 प्रतिशत से अधिक बच्चों में ड्रेस व स्वेटर बांटे गए। अगर 99 प्रतिशत बच्चे ड्रेस और स्वेटर पा चुके है, तो आखिर टीकाकरण में शत प्रतिशत सफलता क्यों नहीं मिल पा रही है। स्वच्छता अभियान में भी यही खेल खेला गया है। जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। जबकि कई ऐसे गांव है, जहां पर एक भी शौचालय नहीं मिलेगा। ऐसे में यह बात साफ है कि कहीं न कहीं आंकड़ेबाजी हुई है और गलत रिपोर्ट सरकार को भेजी है।
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गुरुवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट के आधार पर जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता के मामले में बहुत ही अच्छा काम किया है। इसकी बदौलत जिले को यह स्थान हासिल हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं के रुबेला टीकाकरण में महज 65 प्रतिशत बच्चों को ही टीका लग सका है। जिले के 581 ऐसे विद्यालय है, जहां टीकाकरण हुआ ही नहीं है। इनमें 137 प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। जबकि 444 मदरसे हैं। जहां पर एक भी बच्चों को टीका नहीं लगा है। वहीं प्रशासन आंकड़ों में 100 प्रतिशत टीकाकरण होने को हवाला दे रहा है। परिषदीय विद्यालयों में आंकड़ों के मुताबिक बच्चों के नामांकन में जिले को दूसरा और प्रयागराज को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इसमें भी आंकड़ों का खेल हुआ। 99 प्रतिशत से अधिक बच्चों में ड्रेस व स्वेटर बांटे गए। अगर 99 प्रतिशत बच्चे ड्रेस और स्वेटर पा चुके है, तो आखिर टीकाकरण में शत प्रतिशत सफलता क्यों नहीं मिल पा रही है। स्वच्छता अभियान में भी यही खेल खेला गया है। जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। जबकि कई ऐसे गांव है, जहां पर एक भी शौचालय नहीं मिलेगा। ऐसे में यह बात साफ है कि कहीं न कहीं आंकड़ेबाजी हुई है और गलत रिपोर्ट सरकार को भेजी है।
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