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हल्लौर में गूंजी हाय अली-हाय हुसैन की सदाएं
Updated Sat, 17 Jun 2017 10:11 PM IST
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डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। शिया समुदाय के पहले इमाम हजरत अली के यौमे शहादत के मौके पर शनिवार को शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर में मर्सिया मजलिस का आयोजन किया गया। इस दौरान अकीदतमंदों ने अलम ताबूत का जुलूस निकालकर नौहा मातम किया। मर्सिया मजलिस नौहा मातम का सिलसिला बुधवार की रात से ही शुरू हो गया था, जो शनिवार की देर शाम तक चलता रहा। पूरा कस्बा गम में डूबा रहा। हर तरफ हाय अली की सदाएं बुलंद होती रहीं।
हजरत अली के यौमे शहादत 21 रमजान पर शनिवार की सुबह 5 बजे जामा मस्जिद में मर्सिया मजलिस आयोजित हुई। मर्सियाख्वानी हैदरे कर्रार व उनके हमनवा ने की। मजलिस में मौलाना वसीम रजा जैदी ने कहा कि दुनिया में पहला आतंकी हमला कूफा शहर (इराक) में एक मस्जिद में नमाज पढ़ने के दौरान 1355 साल पहले शियों के पहले इमाम हजरत अली पर हुआ था। 19 रमजान की सुबह नमाज के दौरान जहर से बुझी तलवार से सजदे के दौरान हजरत अली की गर्दन पर वार किया गया था। मौलाना वसीम रजा ने कहा कि 21वीं रमजान की सुबह उनकी शहादत हो गई।
हजरत अली की याद में हर साल रमजान की 19, 20 व 21 तारीख को शहादत मनाई जाती है। मजलिस के बाद अलम ताबूत का जुलूस निकाला गया। जुलूस इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल, अली असगर व जनाबे सकीना के रौजे से होते हुए इमामबाड़ा हुसैनिया अली हसन पहुंचा। बाद में जुलूस हल्लौर के मुख्य चौराहे पर पहुंचा, जहां पर हजरत अली के शहादत दिवस पर तकरीर का प्रोग्राम हुआ। यहां मौलाना वसीम रजा जैदी, जमाल हैदर, अजीम हैदर आदि ने हजरत अली की शहादत को बयां किया। शनिवार को पूरे दिन घर-घर व इमामबाड़ों में मर्सिया मजलिस आयोजित की गई। कार्यक्रमों में नफीस हल्लौरी, सज्जाद, कामयाब बब्लू, डॉ. कायनात, रीनू, कामयाब बब्लू, नायाब हैदर, आले रजा, माले, मंजर मास्टर, हानी हल्लौरी, सबीह हैदर, काजिम मेंहदी, डॉ. नायाब रिजवी, अजीम हैदर, मो. इमरान, शमसाद, नौशाद, अफरोज, अकबर मेंहदी, ताकीब रिजवी, इंतजार कदर, शम्मू, मजहर अब्बास, कसीम रिजवी, अली कदर, अफरोज, पिकू, यूसुफ, वजीर हैदर, शमशुुल, राहिब, महफूज, राकी, जानशीन अहमद, असकरी शमीम, सलमान, अली कदर आदि मौजूद रहे।
हजरत अली के यौमे शहादत 21 रमजान पर शनिवार की सुबह 5 बजे जामा मस्जिद में मर्सिया मजलिस आयोजित हुई। मर्सियाख्वानी हैदरे कर्रार व उनके हमनवा ने की। मजलिस में मौलाना वसीम रजा जैदी ने कहा कि दुनिया में पहला आतंकी हमला कूफा शहर (इराक) में एक मस्जिद में नमाज पढ़ने के दौरान 1355 साल पहले शियों के पहले इमाम हजरत अली पर हुआ था। 19 रमजान की सुबह नमाज के दौरान जहर से बुझी तलवार से सजदे के दौरान हजरत अली की गर्दन पर वार किया गया था। मौलाना वसीम रजा ने कहा कि 21वीं रमजान की सुबह उनकी शहादत हो गई।
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हजरत अली की याद में हर साल रमजान की 19, 20 व 21 तारीख को शहादत मनाई जाती है। मजलिस के बाद अलम ताबूत का जुलूस निकाला गया। जुलूस इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल, अली असगर व जनाबे सकीना के रौजे से होते हुए इमामबाड़ा हुसैनिया अली हसन पहुंचा। बाद में जुलूस हल्लौर के मुख्य चौराहे पर पहुंचा, जहां पर हजरत अली के शहादत दिवस पर तकरीर का प्रोग्राम हुआ। यहां मौलाना वसीम रजा जैदी, जमाल हैदर, अजीम हैदर आदि ने हजरत अली की शहादत को बयां किया। शनिवार को पूरे दिन घर-घर व इमामबाड़ों में मर्सिया मजलिस आयोजित की गई। कार्यक्रमों में नफीस हल्लौरी, सज्जाद, कामयाब बब्लू, डॉ. कायनात, रीनू, कामयाब बब्लू, नायाब हैदर, आले रजा, माले, मंजर मास्टर, हानी हल्लौरी, सबीह हैदर, काजिम मेंहदी, डॉ. नायाब रिजवी, अजीम हैदर, मो. इमरान, शमसाद, नौशाद, अफरोज, अकबर मेंहदी, ताकीब रिजवी, इंतजार कदर, शम्मू, मजहर अब्बास, कसीम रिजवी, अली कदर, अफरोज, पिकू, यूसुफ, वजीर हैदर, शमशुुल, राहिब, महफूज, राकी, जानशीन अहमद, असकरी शमीम, सलमान, अली कदर आदि मौजूद रहे।
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