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तीन दिनों में कैसे घोषित होंगे 100 गांव ओडीएफ
Updated Fri, 11 Aug 2017 10:20 PM IST
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सिद्धार्थनगर। स्वतंत्रता दिवस पर जिले के 100 गांवों को खुले में शौच मुक्त घोषित किया जाना है। इसके लिए पानी की तरह पैसा बहाया गया, बावजूद धरातल पर गंदगी का अंबार है। गांवों में शौचालय निर्माण पर आठ करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए जा चुके हैं, बावजूद अब तक जिले में महज तीन गांव ही ओडीएफ घोषित हुए हैं। विभागीय कार्यशैली को देखते सौ गांवों को ओडीएफ करने की कवायद कितनी सफल होगी, यक्ष प्रश्न है।
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत गांव को शौचालय से संतृप्त कर ग्रामीण जनता को स्वच्छता के महत्व को समझाते हुए उन्हें खुले में शौच से रोकना शासन की मंशा थी। मिशन को सफल बनाने के लिए पर्याप्त धनराशि भी मुहैया कराई गई पर एक वर्ष बाद भी इस मिशन के अपेक्षित परिणाम नहीं नजर आए। गांव को ओडीएफ घोषित करने की सूची तो जरूर बनी पर लिस्ट में शामिल गांव आज भी ओडीएफ घोषित होने की बाट जोह रहे हैं। स्वच्छता अभियान के लिए जिम्मेदार विभाग ने प्रशिक्षण और गोष्ठियों पर खूब पैसा खर्च किया मगर स्वच्छता की बात ग्रामीणों तक नहीं पहुंच सकी। विभाग ने स्वच्छता व शौचालय निर्माण के बारे में त्वरित जानकारी प्रदान करने के लिए डिजिटल वार रूम तक का निर्माण कर डाला बावजूद नतीजा सिफर रहा।
एक वर्ष में जिले के सिर्फ तीन गांव ही ओडीएफ घोषित हो सके हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक बार फिर 100 गांवों को ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है, पर जिन गांवों को सूची में स्थान मिला है। वह अभी शौचालय से संतृप्त नहीं हैं। इटवा विकास खंड के तीन गांव जिन्हें नई सूची में भी स्थान मिला है, अभी शौचालय से ही संतृप्त नहीं हैं। सिंहोरवा तिवारी, सेहरी और खखरा ग्राम सभाओं में अभी 75 फीसदी शौचालयों का लक्ष्य ही पूरा हो सका है। यही हाल सूची में शामिल अन्य गांवों का भी है। संबंध में डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह का कहना है कि सूची में अगर त्रुटि है तो उसे दुरुस्त कराया जाएगा। 15 अगस्त तक हर हाल में सौ गांवों को ओडीएफ घोषित किया जाएगा।
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शौचालय में देरी पर सचिवों को नोटिस
बर्डपुर। सूची में बर्डपुर विकासखंड के दो ऐसे गांव शामिल हैं, जो कहीं स्थित हैं और सूची में उन्हें कहीं और दर्शाया गया है। ऊंजी ग्राम सभा को सूची में बर्डपुर नंबर 13 में उल्लेखित किया गया है, जबकि यह बर्डपुर नंबर नौ में स्थित है। इसी प्रकार कलवारी ग्राम सभा जिसे बर्डपुर नंबर 10 में दर्शाया गया है। जबकि यह भी नंबर नौ में स्थित है। इतना ही नहीं, इन ग्राम सभाओं में शौचालय निर्माण अभी तक नहीं शुरू हुआ है, जिसे लेकर शुक्रवार को बर्डपुर बीडीओ ने पत्र जारी कर शौचालय निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने को निर्देशित किया। बावजूद अभी तक निर्माण कार्य में कोई प्रगति नहीं है।
जर्जर हैं ओडीएफ गांव के शौचालय
ओडीएफ घोषित हो चुके गांव के शौचालयों का बुरा हाल है। एक वर्ष के भीतर ही शौचालय गिरने के कगार पर हैं। किसी शौचालय का फाटक धराशायी है तो किसी की दीवार ढह चुकी है। उसका विकास खंड का भिटिया ग्राम सभा एक वर्ष पूर्व ओडीएफ घोषित हो चुका है। यहां के शौचालय शासन के स्वच्छता मिशन को मुंह चिढ़ा रहे हैं।
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स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत गांव को शौचालय से संतृप्त कर ग्रामीण जनता को स्वच्छता के महत्व को समझाते हुए उन्हें खुले में शौच से रोकना शासन की मंशा थी। मिशन को सफल बनाने के लिए पर्याप्त धनराशि भी मुहैया कराई गई पर एक वर्ष बाद भी इस मिशन के अपेक्षित परिणाम नहीं नजर आए। गांव को ओडीएफ घोषित करने की सूची तो जरूर बनी पर लिस्ट में शामिल गांव आज भी ओडीएफ घोषित होने की बाट जोह रहे हैं। स्वच्छता अभियान के लिए जिम्मेदार विभाग ने प्रशिक्षण और गोष्ठियों पर खूब पैसा खर्च किया मगर स्वच्छता की बात ग्रामीणों तक नहीं पहुंच सकी। विभाग ने स्वच्छता व शौचालय निर्माण के बारे में त्वरित जानकारी प्रदान करने के लिए डिजिटल वार रूम तक का निर्माण कर डाला बावजूद नतीजा सिफर रहा।
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एक वर्ष में जिले के सिर्फ तीन गांव ही ओडीएफ घोषित हो सके हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक बार फिर 100 गांवों को ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है, पर जिन गांवों को सूची में स्थान मिला है। वह अभी शौचालय से संतृप्त नहीं हैं। इटवा विकास खंड के तीन गांव जिन्हें नई सूची में भी स्थान मिला है, अभी शौचालय से ही संतृप्त नहीं हैं। सिंहोरवा तिवारी, सेहरी और खखरा ग्राम सभाओं में अभी 75 फीसदी शौचालयों का लक्ष्य ही पूरा हो सका है। यही हाल सूची में शामिल अन्य गांवों का भी है। संबंध में डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह का कहना है कि सूची में अगर त्रुटि है तो उसे दुरुस्त कराया जाएगा। 15 अगस्त तक हर हाल में सौ गांवों को ओडीएफ घोषित किया जाएगा।
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शौचालय में देरी पर सचिवों को नोटिस
बर्डपुर। सूची में बर्डपुर विकासखंड के दो ऐसे गांव शामिल हैं, जो कहीं स्थित हैं और सूची में उन्हें कहीं और दर्शाया गया है। ऊंजी ग्राम सभा को सूची में बर्डपुर नंबर 13 में उल्लेखित किया गया है, जबकि यह बर्डपुर नंबर नौ में स्थित है। इसी प्रकार कलवारी ग्राम सभा जिसे बर्डपुर नंबर 10 में दर्शाया गया है। जबकि यह भी नंबर नौ में स्थित है। इतना ही नहीं, इन ग्राम सभाओं में शौचालय निर्माण अभी तक नहीं शुरू हुआ है, जिसे लेकर शुक्रवार को बर्डपुर बीडीओ ने पत्र जारी कर शौचालय निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने को निर्देशित किया। बावजूद अभी तक निर्माण कार्य में कोई प्रगति नहीं है।
जर्जर हैं ओडीएफ गांव के शौचालय
ओडीएफ घोषित हो चुके गांव के शौचालयों का बुरा हाल है। एक वर्ष के भीतर ही शौचालय गिरने के कगार पर हैं। किसी शौचालय का फाटक धराशायी है तो किसी की दीवार ढह चुकी है। उसका विकास खंड का भिटिया ग्राम सभा एक वर्ष पूर्व ओडीएफ घोषित हो चुका है। यहां के शौचालय शासन के स्वच्छता मिशन को मुंह चिढ़ा रहे हैं।