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जीएसटी: भ्रांतियां नहीं हुईं दूर

Tue, 27 Jun 2017 09:59 PM IST
Updated Tue, 27 Jun 2017 09:59 PM IST
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जीएसटी: भ्रांतियां नहीं हुईं दूर
सिद्धार्थनगर। एक जुलाई से लागू होने वाले जीएसटी को लेकर व्यापारी अभी तक तैयार नहीं है। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद जीएसटी के प्रावधानों को लेकर उनमें असमंजस की स्थिति बनी हुई है। व्यापारियों को यह नहीं पता कि जीएसटी किस तरह के उत्पादों पर प्रभावी होगा। कौन-कौन सी वस्तुएं जीएसटी के दायरे में आएंगी। रिटर्न का तरीका क्या है और कर का भुगतान कैसे होगा। ऊहापोह से ग्रसित कुछ व्यापारी इसे उत्पीड़न का जरिया बता रहे हैं तो कई महंगाई बढ़ने के दावे कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि उन्हें अब तक जीएसटी के बारे में कोई समझाने ही नहीं आया। हालांकि वाणिज्य कर विभाग के दावे इससे इतर हैं। अफसरों की दलील है कि वह लगातार व्यापारियों के पास जा रहे हैं। उन्हें फायदे समझा रहे हैं। हेल्प डेस्क बनाकर समस्याएं सुलझाई जा रही हैं।
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अब तक प्रचलित सभी तरह के करों को खत्म कर सरकार एक जुलाई से गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को लागू करने जा रही है। दावा किया जा रहा है कि जीएसटी के रूप में पूरे देश में एक कर प्रणाली होगी, जिससे व्यापारियों को सहूलियत मिलेगी। टैक्स चोरी रुकेगी, आम उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा। वैसे तो सरकार ने काफी पहले से ही इसकी कवायद शुरू कर दी थी, लेकिन अब तक व्यापारियों को इसके लिए तैयार नहीं कर पाई है। जिले के व्यापारियों के असमंजस यथावत बने हुए हैं। जीएसटी के प्रावधानों से वाकिफ न होने के कारण व्यापारियों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। उद्योग व्यापार मंडल प्रतिनिधिमंडल के नगर अध्यक्ष संजय कसौधन का कहना है कि आज तक व्यापारियों को जीएसटी के बारे में समझाने कोई नहीं आया। जीएसटी में स्टॉक लंबे-चौड़े प्रोफार्मा पर स्टॉक मेंटेंन करने की बाध्यता रखी गई है, जबकि इसके लिए कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया। ऐसे में व्यापारी अचानक से जीएसटी को कैसे अपना सकेंगे। उन्होंने जीएसटी में कर का दायरा 20 प्रतिशत से कम रखने की जरूरत बताई। व्यापारी नेता सुधीर खेतान ने छोटे व्यापारियों को जीएसटी के दायरे में लाने पर असंतोष जताया। कहा कि कई प्रांतों में व्यापार करने वालों को जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए। कपड़ा उद्योग पर आज तक कोई टैक्स नहीं लगा, पहली बार इसे कर के दायरे में लाया जा रहा है। एक देश-एक कर की बात हो रही है, जबकि जीएसटी में सामानों और आय पर दोहरा कर थोपा जा रहा है। ईंट निर्माता संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सुल्तान अहमद का कहना है कि अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जीएसटी किन-किन वस्तुओं पर लगेगी। असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कृषि यंत्रों को कर से मुक्त रखना चाहिए। सरकार आधी-अधूरी तैयारियों पर ही जीएसटी को थोपना चाहती है, इसका पुरजोर विरोध होगा। अगर ईंट भट्ठों को जीएसटी की श्रेणी में रखा गया तो एक जुलाई से प्रदेश व्यापी हड़ताल होगी। रवि शर्मा का कहना है कि जिस जीएसटी की कल्पना व्यापारियों ने की थी, यह उसके अनुकूल नहीं है। जीएसटी के जरिए व्यापारियों के उत्पीडन की तैयारी है, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। पवन कुमार, सचिन गोयल ने कहा कि एक कर प्रणाली की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन पूरी तैयारी के बिना इसे लागू करना उचित नहीं है। यहां व्यापारियों को जीएसटी के बारे में अब तक समझाया ही नहीं गया तो फिर उनके अपेक्षा कैसे की जा सकती है।
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विभाग का दावा : लगातार व्यापारियों के बीच जा रहे अफसर
वाणिज्य कर विभाग का दावा है कि जीएसटी के प्रावधानों को समझाने के लिए अफसर रोजाना व्यापारियों के बीच जा रहे हैं। सहायक आयुक्त निखिल वाजपेई का कहना है कि विभाग के सारे अफसरों को इसी कार्य में लगाया गया है। 10-15 व्यापारियों का समूह बनाकर उन्हें जीएसटी के बारे में समझाया जा रहा है। कैंप भी आयोजित हो रहे हैं। विभागीय कार्यालय में हेल्प डेस्क भी बनाया गया है। इस पर दो अधिकारी और तीन कर्मचारियों की तैनाती है। हेल्प डेस्क पर आने वाली समस्याएं सुलझाई जा रही हैं। जीएसटी सरल कर प्रणाली है। इसे लेकर बेवजह भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। बताया कि व्यापारी तीन माह तक पुराने टिन नंबर के साथ काम कर सकते हैं। व्यापारियों को जागरुक होकर इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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